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Motivational Story: देश की राजधानी में कभी मज़दूरी करते थे आदर्श, अब JNU में करेंगे पढ़ाई

Motivational Story: आदर्श ने नारायणपुर के सरकारी विद्यालय से 10वीं परीक्षा पास करते हुए 75 फ़ीसद अंक लाया था। फिर उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए अरवल का रुख किया और वहां फतेहपुर संडा कॉलेज में 11वीं में एडमिशन लिया।

Motivational Story: हर इंसान तालीम हासिल कर अच्छा रोज़गार चाहता है, लेकिन कुछ मजबूरियों की वजह से उनके सपनों की उड़ान अधूरी रह जाती है। वहीं कुछ लोग परेशानियों से जूझते हुए अपने ख्वाब को संजोने की कोशिश करते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही युवक के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने कभी देश की राजधानी में मज़दूरी किया था और अब वह दिल्ली के मशहूर विश्वविद्यालय जवाहलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में तालीम हासिल करेंगे।

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    Motivational Story: Delhi में मज़दूरी करता था Adarsh, अब JNU से करेंगे पढ़ाई | वनइंडिया हिंदी |*News
    काफी संघर्ष के बाद तय हुए जेएनयू तक का सफर

    काफी संघर्ष के बाद तय हुए जेएनयू तक का सफर

    भोजपुर जिला के छपरापुर गांव के रहने वाले आदर्श कुमार ने अपनी ज़िंदगी में काफी संघर्ष कर जेएनयू तक का सफर तय किया है। आदर्श के पिता सत्येंद कुमार और बड़े भाई प्रीतम कुमार दिहाड़ी मज़दूर हैं और किसानी भी करते हैं। वहीं उनकी मां घरेलु महिला है। परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं थी, आदर्श का सपना बड़ा था। उन्होंने बचपन में ही आर्मी अधिकारी बनने का ख्वाब देखा था। अपने सपना को सच करने के लिए वह बचपन से ही तैयारी करते आ रहे हैं।

    कॉलेज में नहीं होती थी पढ़ाई- आदर्श

    कॉलेज में नहीं होती थी पढ़ाई- आदर्श

    आदर्श ने नारायणपुर के सरकारी विद्यालय से 10वीं परीक्षा पास करते हुए 75 फ़ीसद अंक लाया था। फिर उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए अरवल का रुख किया और वहां फतेहपुर संडा कॉलेज में 11वीं में एडमिशन लिया। यहां से 12वीं तक की पढ़ाई। कॉलेज में पढ़ाई नहीं होने की वजह से उन्होंने कोचिंग के सहारे पढ़ाई को जारी रखा और साइंस स्ट्रीम में 58 फीसद अंक के साथ 12वीं परीक्षा पास की। फिर उन्होंने ग्रैजुएशन की पढ़ाई के लिए मगध यूनिवर्सिटी से मैथ ऑनर्स में दाखिला लिया, जिसका बैच साल 2018 से 2021 का था। क़रीब 4 साल पूरा होने के बाद भी सिर्फ पार्ट वन का ही परीक्षा हुआ हैं।

    'मगध यूनिवर्सिटी परमानेंट वाइस चांसलर नहीं है'

    'मगध यूनिवर्सिटी परमानेंट वाइस चांसलर नहीं है'

    आदर्श ने मीडिया से मुखातिब होते हुए बताया कि ग्रैजुशन की डिग्री 4 सालों के बाद भी नहीं मिलने से वह परेशान हो गए। ग्रैजुएव लेवल के एग्ज़ाम में वह कामयाबी तो हासिल कर लेते थे, लेकिन डिग्री नहीं होने की वजह से मुकाम तक नहीं पहुंच पाते थे। उन्होंने अपनी परेशानियों की वजह से विरोध प्रदर्शन वगैरह भी किया। पुलिस की ज़ुल्म का शिकार भी हुए लेकिन मसले का हल नहीं निकला। उन्होंने बताया कि सबसे बड़ी समस्या है कि मगध यूनिवर्सिटी परमानेंट वाइस चांसलर नहीं है, इस वजह से छात्र के हक में कोई फ़ैसला नहीं लिया जाता है।

    रिज़ल्ट की राह देख रहे 90 हजार छात्र

    रिज़ल्ट की राह देख रहे 90 हजार छात्र

    आदर्श ने कहा कि परमानेंट वाइस चांसलर नहीं होने की वजह से सेशन लेट चल रहे हैं। 2021 में मुकम्मल होने वाला कोर्स अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। इतना ही नहीं साल 2017-2020 सेशन के छात्रों का रिज़ल्ट अभी तक पेंडिंग है। क़रीब 90 हजार छात्रों अपने रिज़ल्ट की राह देख रहे हैं। इन्हीं सब परेशानियों को देखते हुए उन्होंने माइग्रेशन लेकर सीयूइटी एग्जाम दिया और जापानी भाषा के लिए जेएनयू में दाखिला लिया है।

    दिल्ली में मज़दूरी कर चुके हैं आदर्श

    दिल्ली में मज़दूरी कर चुके हैं आदर्श

    जेएनयू में दाखिला होने से आदर्श काफी खुश हैं, उन्होंने बताया कि वह 12वीं पास कर के 2018 में दिल्ली का रुख किया कर एनडीए का एसएसबी देने पहुंचे, थे लेकिन अंग्रेज़ी कमज़ोर होने की वजह से इंटरव्यू नहीं निकाल पाए थे। इसके बाद उन्होंने यह फ़ैसला लिया की दिल्ली में रहकर कॉम्पिटेटिव एग्ज़ाम की तैयारी करूं। दिल्ली में रहना और खाना काफी महंगा था। इसलिए आदर्श ने वहां रह रहे बिहार के लोगों से संपर्क कर उनके साथ फैक्ट्री में मज़दूरी भी की। काम करने के साथ-साथ पढ़ाई करना मुश्किल हो रहा था तो वह वापस चले गए। आदर्श डिफेंस अफसर बनना चाहते थे लेकिन एनडीए के मुताबिक उम्र निकल चुकी है। इसलिए अब आदर्श यूपीएससी की तैयारी करने में जुट गए हैं।

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