आधी आबादी पर यह कैसी राजनीति? बिहार के 40 सीटों पर मात्र 11 महिला कैंडिडेट, BJP का सबसे बुरा हाल...
Lok Sabha Election, Bihar Female Candidates: लोकसभा चुनाव की शुरुआत हो चुकी है। सात चरणों में हो रहे इस चुनाव के लिए दो चरण के लिए वोटिंग भी की जा चुकी है। 7 मई को 12 राज्यों की कुल 94 लोकसभा सीटों पर तीसरे चरण में मतदान होना है। बिहार में पहले और दूसरे चरण के दौरान 9 लोकसभा सीटों पर वोटिंग हुई थी, 31 सीटों पर मतदान होना अभी बाकी है।
सभी सीटों पर इंडिया ब्लॉक और एनडीए ने अपने-अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है। कुछ निर्दलीय उम्मीदवार भी इस बार मैदान में हैं। हालांकि, इस बार के चुनाव में सबसे हॉट टॉपिक बिहार में महिला कैंडिडेट का बना हुआ है। महागठबंधन/इंडिया ब्लॉक, एनडीए और निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या को एकसाथ मिलाकर देखें तो 40 लोकसभा सीटों पर कुल 11 महिला उम्मीदवार हैं।
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इन 11 महिलाओं में भी 6 उम्मीदवार अकेले इंडिया ब्लॉक के घटक दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से हैं, जबकि बाकी बची 5 महिला कैंडिडेट्स में से एक निर्दलीय और 4 एनडीए कोटे से मैदान में उतरी हैं।
एनडीए की 4 महिला उम्मीदवारों में 2 को लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और दो कैंडिडेट जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से हैं। निर्दलीय महिला उम्मीदवार की बात करें तो इस लोकसभा चुनाव में बिहार में केवल एक निर्दलीय महिला कैंडिडेट हैं, हिना शहाब। हिना आरजेडी से अलग होकर सिवान सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में हैं।
कौन हैं बिहार की 11 महिला उम्मीदवार?
बिहार के चुनावी रण में उतरने वाली 11 महिला कैंडिडेट्स में सबसे पहला नाम इंडिया ब्लॉक की अर्चना रविदास का है जो आरजेडी के टिकट पर जमुई से मैदान में हैं। बता दें, जमुई सीट पर पहले चरण यानी 19 अप्रैल को वोटिंग हो चुकी है।
इस लिस्ट में दूसरा नाम है बीमा भारती का। बीमा भारती कुछ वक्त पहले बिहार में फ्लोर टेस्ट के दौरान पाला बदलने वाले विधायकों में से एक हैं। 5 बार विधायक रह चुकी बीमा, जेडीयू छोड़ कर राजद से साथ आई हैं। बता दें, बीमा को आरजेडी ने पूर्णिया से टिकट दिया है जहां से पप्पू यादव टिकट की आस लगाए बैठे थे। सीट बंटवारे के तहत यह सीट राजद के पाले में गई और राजद ने बीमा को उम्मीदवार घोषित किया। जिसके बाद हाल ही में कांग्रेस में अपनी पार्टी का विलय करने वाले पप्पू यादव इस सीट से निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए। पूर्णिया सीट पर दूसरे चरण के तहत 26 अप्रैल को मतदान हो चुका है।
तीसरा नाम अनीता देवी का है जिन्हें आरजेडी ने मुंगेर से टिकट दिया है। इस लिस्ट में अगले दो नाम बिहार के सबसे बड़े सियासी परिवार से तालुक रखते हैं। ये नाम हैं राजद सुप्रीमो लालू यादव की बेटियों के। आरजेडी ने लालू यादव की छोटी बिटिया रोहिणी आचार्या को सारण से चुनाव मैदान में उतारा है जबकि बड़ी बेटी मीसा भारती एक बार फिर पाटलिपुत्र सीट से उम्मीदवारी कर रही हैं।
बता दें, रोहिणी आचार्या पहली बार चुनाव मैदान में हैं और राजनीति में एंट्री के साथ ही उन्हें लोकसभा का टिकट मिल गया है। बिहार में इंडिया ब्लॉक के लिस्ट में आखिरी महिला उम्मीदवार रितु जयसवाल हैं। रीतु आरजेडी के टिकट पर शिवहर से मैदान में हैं।
बात करें एनडीए की तो अलायन्स ने 4 महिला कैंडिडेट्स को मैदान में उतारा है। लोजपा रामविलास से टिकट पाने वाली दो महिला कैंडिडेट्स में समस्तीपुर सीट से शांभवी चौधरी जबकि दूसरी उम्मीदवार वैशाली सीट से वीणा देवी हैं। बता दें, चिराग की पार्टी से चुनाव मैदान में उतरने वाली शांभवी के पिता अशोक चौधरी जेडीयू के कद्दावर नेताओं में हैं। बिहार सरकार में मंत्री, अशोक चौधरी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी भी माने जाते हैं।
इस लिस्ट में अगला दो नाम जेडीयू के कोटे से है। विजयलक्ष्मी को सिवान सीट से टिकट दिया गया है जहां इनका मुकाबला इंडिया ब्लॉक के अवध बिहारी चौधरी के साथ-साथ निर्दलीय उम्मीदवार हिना शहाब से है। पूर्व सांसद आंनद मोहन की पत्नी लवली आनंद शिवहर से चुनाव लड़ रही हैं। जेडीयू के कोटे से मैदान में उतरी लवली का मुकाबला यहां आरजेडी की महिला उम्मीदवार रितु जयसवाल से है। गौरतलब है कि बीजेपी ने अपने कोटे से एक भी महिला उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया है।
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महिलाओं के आरक्षण पर राजनीति, टिकट क्यों नहीं?
लोकसभा चुनाव से पहले देशभर में महिला आरक्षण बिल हो या महिला सशक्तिकरण, महिलाओं के हक को लेकर राजनीति तेज थी। महिला सशक्तिकरण को लेकर सभी राजनीतिक दल के नेता अपना-अपना विजन बता रहे थे। सभी खुद को महिलाओं का हितैषी बताने में लगे हुए थे, लेकिन लोकसभा चुनाव के लिए जब कैंडिडेट्स के नाम तय करने की बात आई तो ये सारे विजन धरे के धरे रह गए।
कैंडिडेट के नाम के ऐलान के साथ ही सभी दावों का हकीकत निकल कर सामने आने लगी। इस चुनाव में मात्र 11 महिला कैंडिडेट मैदान में हैं, जिनमें से केवल 10 को पार्टी से टिकट मिला है। एक महिला उम्मीदवार निर्दलीय है।
बीजेपी ने किया महिलाओं को नजरअंदाज
'नारी शक्ति का वंदन' अपने चुनावी घोषणा पत्र में रखने वाली बीजेपी ने 17 में से एक भी सीट महिला कैंडिडेट को नहीं दी है। बिहार में सीट बंटवारे के तहत 40 में से 17 लोकसभा सीट भाजपा के खाते में हैं लेकिन नारी सशक्तिकरण की बात करने वाली बीजेपी ने एक भी महिला उम्मीदवार को चुनाव मैदान में नहीं उतारा है।
इसके इतर भाजपा ने अपनी एक मात्र महिला सांसद का टिकट भी काट दिया है। हालांकि, यह सीट जदयू के खाते में गई है और उन्होंने महिला को ही अपना कैंडिडेट बनाया है। लेकिन, सवाल यह है महिलाओं को लेकर तरह-तरह की योजनाओं का दावा करने वाली भाजपा बिहार में किसी महिला पर भरोसा क्यों नहीं दिखा पाई है?
जदयू ने भी नहीं दिया महिलाओं को अधिक महत्त्व
महिला आरक्षण का झंडा बुलंद करने वाले नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने इस लोकसभा चुनाव में महिला कैंडिडेट्स को अधिक महत्व नहीं दिए है। आम चुनाव में जदयू के तरफ से दो महिला कैंडिडेट को मैदान में उतारा गया है। बाहुबली नेता आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद को शिवहर सीट से जदयू ने अपना कैंडिडेट बनाया है। इसके अलावा सिवान सीट से रमेश कुशवाहा की पत्नी विजयलक्ष्मी कुशवाहा को पार्टी के जातीय समीकरण का ख्याल रखकर टिकट दिया है।
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चिराग ने दिया आधा हक
बाद बात करें एनडीए के अन्य घटक दलों की तो मात्र लोजपा (रामविलास ) के तरफ से ही दो महिला को अपना कैंडिडेट को बनाया गया है। इसमें वैशाली लोकसभा सीट से जदयू एमएलसी की पत्नी वीणा देवी को पार्टी का सिंबल दिया गया है। जबकि समस्तीपुर सीट से अशोक चौधरी की बेटी शांभवी को लोजपा (रामविलास) ने अपना कैंडिडेट बनाया है।
राजद से दिया 6 महिलाओं को टिकट
उधर, महागठबंधन के तरफ से सिर्फ राजद ने ही महिलाओं को अपना कैंडिडेट बनाया है। जमुई, पूर्णिया, मुंगेर, सारण, पाटलिपुत्र और शिवहर लोकसभा सीट पर राजद में महिला कैंडिडेट्स को मैदान में उतारा है। जबकि कांग्रेस या इंडी गठबंधन के अन्य किसी दल ने बिहार में महिला उम्मीदवारों को टिकट नहीं दिया है।
कुल मिला कर देखें तो आधी आबादी को चुनाव के मैदान में एक तिहाई हक भी नहीं दिया गया है। ज्यादातर पॉलिटिकल पार्टियों ने या तो महिलाओं को नजरअंदाज किया है या बहुत कम सीटों पर महिलाओं को टिकट दिया है। चुनाव संपन्न होने और नतीजे घोषित होने के बाद ही ये साफ हो पाएगा कि पार्टी ने जिन सीटों पर महिलाओं की जगह पुरुष उम्मीदवारों पर भरोसा दिखाया है वो भरोसे पर कितना खरा उतरते हैं।
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