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समस्तीपुर में आमने सामने JDU के दो मंत्री का परिवार, किसके लिए वोट अपील करेंगे सीएम नीतीश?

Lok Sabha Election: देश के अंदर लोकसभा चुनाव की है गहमागहमी है। सत्तारूढ़ दल हो या फिर विपक्ष हर कोई एक दूसरे पर तरह-तरह की राजनीतिक टिप्पणियां कर रही है। ऐसे में कभी-कभी यह टिप्पणियां निजी और पारिवारिक भी हो जाती है जिसको लेकर नेता चुनाव आयुक्त के पास भी जाते रहते हैं। लेकिन इन सब के इतर बिहार के एक और लोकसभा सीट पर काफी रोचक मुकाबला देखने को मिल रहा है।

यह सीट है समस्तीपुर लोकसभा सीट। वैसे तो सीट सुरक्षित है लेकिन यहां पर जो उम्मीदवार उतारे जाते हैं उनकी या तो राजनीतिक पहुंच अच्छी होती है या परिवार की राजनीतिक बैकग्राउंड मजबूत होता है। ऐसे में अब यहां पर एनडीए और इंडिया की लड़ाई में जो उम्मीदवार मैदान में उतरे हैं उन दोनों का परिवार वर्तमान परिवेश में एनडीए से जुड़ा हुआ है। ऐसे में असमंजस की स्थिति यह है कि आखिर प्रचार किया जाए तो किसका?
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Samastipur

समस्तीपुर लोकसभा सीट पर चौथे चरण के दौरान यानी की 13 मई को वोटिंग होनी है। दरअसल सीट बंटवारे के फार्मूले के तहत यह सीट एनडीए में लोजपा (रामविलास) के पास गई है। चिराग पासवान ने यहां शांभवी चौधरी को टिकट दिया है। वही इंडिया गठबंधन के तहत यह सीट कांग्रेस के पाले में गई है और कांग्रेस ने यहां से सन्नी हजारी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। लेकिन बात सिर्फ कैंडिडेट घोषित करने तक की होती तो फिर यह सीट उतनी रोचक नहीं होती। इस सीट पर रोचकता की वजह उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि है।

इन दोनों के पिता जेडीयू के नेता हैं और मौजूदा बिहार सरकार में अच्छी दमखम रखते हैं। दोनों नीतीश कैबिनेट में मंत्री भी हैं और काफी अच्छा विभाग भी मिला हुआ है। लिहाजा नीतीश कुमार के करीबी भी हैं। ऐसे में सबसे बड़ी दुविधा नीतीश कुमार के लिए है कि वह आखिर प्रचार करने जाएं तो किसके लिए क्योंकि यहां दोनों ऐसे कैंडिडेट हैं जिनके पिता नीतीश कुमार के काफी अच्छे दोस्त और करीबी माने जाते हैं।

समस्तीपुर सीट पर जातीय समीकरण
सबसे पहले हम जानते हैं कि समस्तीपुर लोकसभा सीट पर जातीय समीकरण क्या है? तो यहां पर दलित समाज की अच्छी खासी जनसंख्या है। लिहाजा सीट दलितों के लिए आरक्षित किया गया है। ऐसे में यहां जो भी कैंडिडेट उतारे जाते हैं वह दलित समाज से संबंध रखते हैं। ऐसे में लोजपा (रामविलास) के तरफ से शांभवी चौधरी को उम्मीदवार बनाया गया जो की पासी समाज से आती हैं और सबसे बड़ी बात है कि यह बिहार सरकार के मंत्री और नीतीश कुमार के काफी कवि माने जाने वाले अशोक चौधरी की बिटिया हैं।

वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के तरफ से या सन्नी हजारी को दिया गया जो की पासवान समाज से आते हैं। अब बड़ी बात यह है कि उनके पिता भी बिहार सरकार में मंत्री हैं और यह महेश्वर हजारी के बेटे हैं। महेश्वर हजारी जदयू के नेता है और हाल ही में उन्हें बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष से इस्तीफा दिलवा कर कैबिनेट में शामिल किया गया है। ऐसे में वह नीतीश कुमार के काफी करीबी माने जाते हैं।
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किसके लिए वोट की अपील करेंगे सीएम?
समस्या वाली बात यह है कि खुद नीतीश कुमार अब यहां पर प्रचार किसके लिए करेंगे क्योंकि दोनों नेता के पिता नीतीश कुमार के काफी करीबी भी हैं। ऐसे में नीतीश कुमार के लिए थोड़ी समस्या होने वाली है।

हालांकि राजनीतिक जानकारों का यह कहना है कि नीतीश कुमार यहां पर शांभवी चौधरी के पक्ष में वोट अपील करते नजर आएंगे क्योंकि वह इंडिया के प्रत्याशी हैं। नीतीश वर्तमान में एनडीए के साथ हैं। लेकिन यह जरूर होगा कि वह यहां पर कांग्रेस कैंडिडेट को लेकर कुछ भी नहीं बोलेंगे। सीएम यहां चुप्पी साधते हुए सिर्फ लालू परिवार पर हमला बोल कर अपनी चुनावी जनसभा को समाप्त कर सकते हैं।

इसके बाद दूसरा सवाल यह है कि आखिर महेश्वर हजारी किसके लिए प्रचार करेंगे क्योंकि महेश्वर हजारी एनडीए के नेता हैं और बिहार सरकार में मंत्री हैं ऐसे में उनको प्रचार के लिए शांभवी चौधरी के साथ रहना होगा लेकिन बात जब परिवार पर आएगी तो फिर महेश्वर हजारी का मूवमेंट क्या होता है यह देखने वाली बात होगी।

प्रिंस नहीं नजर आ रहे एक्टिव
उधर इस सीट पर निर्वतमान सांसद प्रिंस राज कहीं भी एक्टिव में नजर नहीं आ रहे हैं। जबकि वह पासवान समाज से आते हैं और चिराग के चचेरे भाई हैं। इस सीट पर उनकी अच्छी खासी पकड़ बताई जाती है। ऐसे में यदि वह शांभवी चौधरी का प्रचार करेंगे तो उनके लिए चुनाव थोड़ा आसान हो जाएगा।

राजनीतिक जानकारों का यह भी कहना है कि यहां पर कांग्रेस ने जिन्हें उम्मीदवार बनाया है यानी सन्नी हजारी वह प्रिंस पासवान के रिश्तेदार लगते हैं। ऐसे में प्रिंस राज भी किसी के पक्ष में प्रचार नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि प्रिंस को इस बात की फिक्र है कि यदि वह किसी एक के पक्ष में प्रचार किया तो दूसरा पक्ष नाराज हो जाएगा। लिहाजा अब देखने वाली बात यह होगी कि जब इस लोकसभा सीट पर एनडीए के किसी स्टार प्रचारक की चुनावी जनसभा होती है तो फिर प्रिंस राज उसे जनसभा में नजर आते हैं या नहीं।

बात सिर्फ प्रचार करने की ही नहीं बल्कि चिराग पासवान से नजदीकियां और दूरियों को लेकर भी है। भले ही पशुपति पारस कह चुके हैं कि वह चिराग पासवान के लिए प्रचार करेंगे लेकिन अभी तक जितनी जनसभा हुई है उसमें से कहीं भी दोनों नेता एक साथ मंच पर नजर नहीं आए हैं। लिहाजा अब समस्तीपुर लोकसभा सीट की लड़ाई काफी रोचक होने वाली है। कहने को तो यहां एनडीए और इंडिया की लड़ाई है लेकिन गौर से देख देखा जाए तो यहां लड़ाई एनडीए वर्सेस एनडीए ही हैं।
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