Lok Sabha Chunav: बिहार में एनडीए की राह नहीं आसान, अपने ही बनने लगे नासूर, भाजपा के लिए नफा या नुकसान
Lok Sabha Chunav: बिहार में लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र एनडीए के सहयोगी दलों के बीच सीटों बंटवारा हो गया। सीटों के बंटवारे के बाद एनडीए गठबंधन के नेता प्रदेश की सभी 40 सीटों पर जीत का दावा कर रहे हैं। वहीं मौजूदा समीरकरण देखने के बाद बिहार में एनडीए की रहा आसान नज़र नहीं आ रही है।
NDA गठबंधन के सहयोगी दल ही भाजपा के लिए नासूर बनते जा रहे हैं। सीट शेयरिंग में RLJP को एक भी सीट नहीं मिली। इससे नाराज़ हो कर राष्ट्रीय लोक जन शक्ति पार्टी प्रमुख, केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस ने अपने पद से इस्तीफ़ा देते हुए एनडीए से किनारा कर लिया है।

वहीं एनडीए की सीट शेयरिंग से उपेंद्र कुशवाहा भी नाराज़ नज़र आ रहे हैं। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा को एनडीए गठबंधन की तरफ़ से एक सीट मिली है। सिर्फ एक काराकाट लोकसभा सीट मिलने से उपेंद्र कुशवाहा नाराज़ चल रहे हैं।
उपेंद्र कुशवाहा की ख्वाहिश थी कि एनडीए की सीट शेयरिंग में उनकी पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा को दो सीटें दी जाएं। वह एक तो काराकाट लोकसभा सीट और दूसरा सुपौल या फिर सीतामढ़ी में से एक सीट पर दावा ठोकते आ रहे थे, लेकिन शेयरिंग के बाद सिर्फ 1 सीट ही उनकी पार्टी के खाते में आई।
सूत्रों की मानें तो उपेंद्र कुशवाहा ने सीट शेयरिंग से पहले ही सीट को लेकर अपनी ख्वाहिश बता दी थी, लेकिन इसे बावजूद उनकी बातों को नज़र अंदाज़ कर दिया गया। एनडीए की सीट शेयरिंग में बिहार की 40 लोकसभा सीटों में भाजपा 17 सीटों पर, जदयू 16 सीटों पर, 5 सीटों पर लोजपा (R) और 1 पर HAM और 1 पर RLM चुनाव लड़ेगी।
एनडीए की सीट शेयरिंग के बाद भाजपा के लिए ही अपने ही नासूर बन गए हैं, जो कि आगामी लोकसभा चुनाव में एनडीए के लिए नुकसान देह साबित हो सकता है। सूत्रों की मानें तो महागठबंधन की तरफ़ से राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी 5 सीटें दी जा सकती हैं। जिसमें हाजीपुर, खगड़िया, समस्तीपुर, वैशाली और नवादा लोकसभा सीट शामिल है।
हाजीपुर लोकसभा सीट से पशुपति कुमार पारस खुद ही चुनावी दांव खेलेंगे। ग़ौरतलब है कि यह सीटें हैं जहां से चिराग पासवान अपनी पार्टी के उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रहे हैं। इन सीटों पर अविभाजित लोजपा का वर्चस्व रहा है, अब लोजपा दो गुटों में बंट गई है। इसलिए पशुपति पारस हर वह मुमकिन कोशिश करेंगे, जिससे कि चिराग पासवान की पार्टी को हरा सकें।












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