बिहारः LJP प्रमुख चिराग पासवान ने 3 अक्टूबर को बुलाई पार्टी की संसदीय बैठक, ले सकते हैं बड़ा फैसला
पटना। बिहार में एनडीए में सबकुछ ठीक होते-होते रह जा रहा है। बीते गुरुवार को भी लगातार लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के प्रमुख चिराग पासवान भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ बैठक करते रहे लेकिन कोई बड़ा नतीजा नहीं निकला। इसी कारण कल यानी कि शनिवार 3 अक्टूबर को, पार्टी के केंद्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाई गई है। सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार इस बैठक में एनडीए के साथ सीट शेयरिंग को लेकर चल रही खींचतान के बीच चिराग पासवान कोई बहुत बड़ा फैसला ले सकते हैं।

वहीं दूसरी तरफ लोजपा से टिकट चाहने वाले दावेदारों की सांसें अटकी हुई हैं। आलम यह है कि एनडीए का हिस्सा लोजपा रहेगी या नहीं यह भी अभी तय नहीं है। इसको लेकर खासकर टिकट के दावेदार काफी परेशान हैं। बिहार विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों का नामांकन भी शुरू हो गया है लेकिन अभी तक किसी भी बड़े दल का उम्मीदवार नामांकन के लिए नहीं पहुंचा।
टिकट के दावेदारों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे अपने क्षेत्र में जाकर खुलकर कुछ बोलने की स्थिति में नहीं हैं। आखिर वे किसके पक्ष में बोलेंगे। गठबंधन में रहना है या नहीं रहना है, यही तय नहीं है। ऐसे में भावी उम्मीदवार किस आधार पर अपने समर्थकों से अपने लिए वोट मांगेंगे? यही वजह है कि टिकट के दावेदार कई दिनों से दिल्ली में जमे हैं और लगातार अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान और पार्टी के अन्य पदाधिकारियों से मुलाकात कर रहे हैं।
एनडीए के घटकदलों की हर गतिविधि पर वे पैनी नजर बनाए हुए हैं। एनडीए में बने रहने को लेकर लोजपा के अधिकतर पुराने नेता, सांसद और विधायक अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष से बात कर रहे हैं। वहीं, कुछ ऐसे भी हैं जो चाहते हैं कि लोजपा अकेले चुनाव लड़े।
लोजपा अगर अकेले मैदान में उतरती है तो कम-से-कम 143 सीटों पर उम्मीदवार खड़ा करेगी। वहीं, अगर एनडीए में बने रहकर पार्टी चुनाव मैदान में उतरती है तो उसके काफी कम उम्मीदवार को मौका मिलेगा। गौरतलब हो कि एनडीए के तहत वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में लोजपा के 42 उम्मीदवार मैदान में थे। इस बार एनडीए का हिस्सा जदयू भी है। जदयू की दावेदारी काफी अधिक है।












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