बिहार: ऑटो ड्राइवर के बेटे ने बनाई क्रिकेट टीम में जगह, तूफानी गेंदबाजी से छुड़ाये बल्लेबाजों के छक्के
क्रिकेट खेलने के शौकीन तो ज्यादातर युवा होते हैं, लेकिन क्रिकेट खिलाड़ी के तौर पर कैरियर बनान क्रिकेट खेलने जैसा आसान नहीं है। आज हम आपको एक ऐसे ही क्रिकेट खिलाड़ी के संघर्ष की कहानी से रूबरू करवाने जा रहे हैं।
पटना, 5 सितंबर 2022। क्रिकेट खेलने के शौकीन तो ज्यादातर युवा होते हैं, लेकिन क्रिकेट खिलाड़ी के तौर पर कैरियर बनान क्रिकेट खेलने जैसा आसान नहीं है। आज हम आपको एक ऐसे ही क्रिकेट खिलाड़ी के संघर्ष की कहानी से रूबरू करवाने जा रहे हैं। जिनके पिता ऑटो चलाते थे और वह क्रिकेट खेलते थे तो पिता और चाचा की डांट सुननी पड़ती थी। इसके बावजूद गांव की गलियों में क्रिकेट खेलते हुए इंडियन टीम में जगह बना ली। हम बात कर रहे हैं बिहार के गोपालगंज ज़िले से ताल्लुक रखने वाल मुकेश कुमार की जिन्होंने न्यूजीलैंड-ए के खिलाफ पहले 'अनाधिकृत' टेस्ट मैच में शानदार प्रदर्शन कर बल्लेबाज़ों के छक्के छुड़ा दिए।

बिहार के बेटे ने किया प्रदेश का नाम रोशन
मुकेश कुमार गोपालगंज जिले के काकड़कुंड गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने न्यूजीलैंड-ए के खिलाफ पहले 'अनाधिकृत' टेस्ट मैच शानदार बॉलिंग कर पांच विकेट चटकाया। ग़ौरतलब है कि गुरुवार की शाम से शुक्रवार की दोपहर तक हुए डेब्यू मैच में मुकेश कुमार ने 23 ओवर बॉलिंग किया। 23 ओवर में 86 रन देते हुए पांच दिग्गज बल्लेबाज़ों का विकेट झटक लिया। पहले दिन ही शानदार प्रदर्शन से उनका टीम इंडिया की तरफ़ से रेगुलर मैच खेलने के आसार नज़र आ रहे हैं। आपको बता दें कि चार दिन का डेब्यू मैच 4 सिंतबर तक चिन्नस्वामी स्टेडियम (बैंगलुरू) में खेला गया।

मुकेश की तूफानी गेंदबाजी की हो रही तारीफ़
बैंगलुरू के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुए क्रिकेट मैच में मुकेश कुमार के प्रदर्शन की सभी लोग तारीफ़ कर रहे हैं। मुकेश कुमार के साथ गोपालगंज क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान अमित सिंह भी बैगलुरु पहुंचे थे। अमित कुमार ने मुकेश के गेदबाज़ी की तारीफ़ की। वहीं उन्होंने कहा कि हिदुंस्तान की टीम ने पहली बार किसी गेंदबाज़ ने 23 ओवर में 5 ओवर मेडन, 106 डॉट्स बॉल, 5 विकेट लेते हुए 86 रन दिया है। अमिता कुमार ने कहा कि अंडर-19,अंडर-23, हिदुंस्तान-ए और वरिष्ठ क्रिकेट टीम के किसी भी खिलाड़ी ने आज तक ऐसा प्रदर्शन नहीं किया है।

गांव की गलियों में मुकेश ने सीखा क्रिकेट
स्थानीय लोगों की मानें तो मुखेश कुमार बचपन से ही क्रिकेट खेलने का शौकीन था, वह गांव ( काकड़कुंड ) की गलियों में ही क्रिकेट खेलने लग जाया करता थै। बचपन में क्रिकेट खेलने के जुनून में उसके पिता काशीनाथ सिंह से मुकेश को काफी डांट भी सुननी पड़ती थी। वही चाचा कृष्णा सिंह भी उसके कक्रिकेट खेलने के खिलाफ थे। मुकेश के सिर से पिता का साया तो उठ गया लेकिन चाचा कृष्णा सिंह आज भी मुकेश के बचपन की बातों को बताते हुए भावुक हो जाते हैं। मुकेश बहुत ही साधारण परिवार से ताल्लुक रखता है, इसके बावजूद क्रिकेट में नाम रोशन कर सभी लोगों को गौरवांवित कर रहा है।

मुकेश के घर की आर्थिक स्थिति नहीं थी ठीक
मुकेश के घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की वजह से उनके पिता कोलकाता में ऑटो चलाया करते थे। खुद का ऑटो चलाने से जो भी आमदनी होती थी उसी से पूरे परिवार को गुज़ार होता था। वहीं मकेश कुमार के चाचा धर्मनाथ ने कहा कि टीवी पर मुकेश को खेलता देख बहुत फख्र महसूस होती है। वह देश के लिए खेल कर देश का नाम रोशन कर रहा है। आपको बता दें कि मुकेश बंगाल से रणजी ट्रॉफी खेल चुके हैं । पहली बार उन्हें इंडिया-ए टीम में जगह मिली है। मुकेश की कामयाबी पर मां मालती देवी ने खुशी का इजहार किया। वहीं उन्होंने कहा कि परिवार की जिम्मेदारियों की वजह से बैंगलुरू मैच देखने नहीं गई। मोबाइल पर बेटे से बात कर वैसी ही खुशी मिली जैसी खेल के मैदान में मैच देख कर होती।
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