'सनातन का अपमान और खास धर्म का सम्मान', लालू ने टोपी पहन दरगाह में की चादरपोशी तो भड़क गए यूजर, BJP ने भी घेरा
Lalu Yadav: बिहार चुनाव की तारीखो का ऐलान अभी बाकी है, लेकिन सियासत का पारा पहले से ही चढ़ा हुआ है। नेता बयान और दौरे कर रहे हैं, सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप की झड़ी लगी हुई है। इस बीच आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव शुक्रवार (12 सितंबर) को पटना हाई कोर्ट दरगाह पहुंचे और उर्स के मौके पर चादरपोशी की। उन्होंने इसकी तस्वीरें खुद अपने एक्स (Twitter) अकाउंट पर पोस्ट कीं।
गौर करने वाली बात यह है कि कुछ दिन पहले ही लालू यादव गया गए थे, जहां उन्होंने सात कुलों का पिंडदान किया था। यानी एक तरफ धार्मिक अनुष्ठान, दूसरी तरफ दरगाह की हाजिरी। लेकिन इस बार मामला सोशल मीडिया पर खूब तूल पकड़ गया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने लालू यादव पर इसको लेकर कटाक्ष किया है। वहीं सोशल मीडिया पर भी लालू यादव ट्रोल हो रहे हैं।

बीजेपी का हमला-"राम का अपमान करने वालों को मंच क्यों?"
लालू यादव के इस कदम पर भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और आरजेडी ने उन लोगों को मंच पर जगह दी, जिन्होंने भगवान राम और सनातन धर्म का अपमान किया। अनुराग ठाकुर ने सीधे-सीधे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और उनके बेटे उदयनिधि का जिक्र किया और सवाल उठाया-"बिहार की जनता जानना चाहती है कि आखिर राम मंदिर के विरोधियों को लालू और कांग्रेस क्यों सर पर बिठा रहे हैं?"
अनुराग ठाकुर बोले,''जो व्यक्ति (तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन) भगवान राम को नहीं मानते, वे राम मंदिर निर्माण के खिलाफ थे और उनके बेटे ने सनातन धर्म के बारे में जो बयान दिए, उससे सनातन धर्म का अपमान हुआ। कांग्रेस और RJD ने उन्हें अपने मंच पर जगह क्यों दी? बिहार की जनता यह जानना चाहती है।"
सोशल मीडिया पर यूजर्स भड़के
लालू यादव की चादरपोशी की तस्वीरें इंटरनेट पर वायरल होते ही यूजर जमकर भड़क गए। लालू यादव की दरगाह यात्रा की तस्वीर सामने आने के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने उन पर सवाल उठाए। यूजर्स ने पूछा कि क्या यह 'सनातन धर्म' का अपमान है और क्या वह ऐसा सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, "ये वही लोग हैं जो 'सनातन धर्म' का अपमान करते हैं और सिर्फ वोट बैंक के लिए टोपी पहनते हैं।"
किसी ने लिखा-"बीमारी का बहाना बनाकर बेल पर घूम रहे हैं और अब कोर्ट के सामने ही दरगाह में चहलकदमी कर रहे हैं।" एक यूजर ने तंज कसते हुए कहा-"वो जज जिन्होंने बीमारी के नाम पर इनको बेल दिया, जरूर बहुत पुण्य किए होंगे।"
"महाकुंभ को फालतू, उर्स की बधाई?"
कई लोगों ने लालू यादव की इस चादरपोशी को उनके पुराने बयान से जोड़ दिया। यूजर्स याद दिलाने लगे कि लालू ने कभी महाकुंभ को "फालतू" कहा था। एक यूजर ने लिखा-"देख रहे हो ना बिनोद,'सनातन का अपमान और खास धर्म का सम्मान।''
एक अन्य यूजर ने कहा, ''महाकुंभ को फालतू बताते हैं और उर्स की मुबारकबाद देने पहुंच जाते हैं। गजबे हैं लालू जी।'' एक अन्य ने लिखा-"तुष्टिकरण की राजनीति का इससे बड़ा उदाहरण और क्या होगा।"
तेजस्वी को लेकर भी चर्चाएं
कुछ लोगों ने इसे तेजस्वी यादव की मुश्किलों से भी जोड़ दिया। एक यूजर ने कहा-"राहुल गांधी की मुस्लिम क्षेत्रों में यात्रा ने भाजपा को कितना नुकसान पहुंचाया, ये तो पता नहीं। लेकिन तेजस्वी यादव इतने दबाव में हैं कि उन्हें लालू यादव को बाहर निकालकर दरगाह भेजना पड़ा।"
कुल मिलाकर, लालू यादव की दरगाह पर चादरपोशी ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छेड़ दी है। कहीं इसे "सनातन का अपमान" बताया जा रहा है, तो कहीं "खास धर्म का सम्मान"। और ये बहस चुनावी मौसम में और भी गरमाने वाली है।












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