भारतीय सेना में नहीं गया लालू यादव का नाती, इस देश की आर्मी में ले रहा ट्रेनिंग, मां रोहिणी आचार्य हुईं इमोशनल
Lalu Yadav Grandson (Rohini Acharya Son): आरजेडी (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के नाती और रोहिणी आचार्य का बेटा आदित्य यादव को लेकर एक खबर इन दिनों काफी चर्चा में है। आमतौर पर लोग मान बैठे थे कि आदित्य भारतीय सेना में शामिल हुआ है, लेकिन सच्चाई इससे थोड़ी अलग है। लालू यादव का नाती भारतीय सेना में नहीं, बल्कि सिंगापुर की सेना में दो साल की कड़ी मिलिट्री ट्रेनिंग ले रहा है। इस बात की जानकारी खुद उसकी मां रोहिणी आचार्य ने भावुक अंदाज में सोशल मीडिया के जरिए दी है।
सिंगापुर में रह रहीं रोहिणी आचार्य ने बताया कि उनके बड़े बेटे आदित्य ने 18 साल की उम्र में अपनी प्री-यूनिवर्सिटी की पढ़ाई पूरी करने के बाद दो साल की 'बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग' (Basic Military Training ) के लिए कदम बढ़ाया है। यह ट्रेनिंग सिंगापुर में नेशनल सर्विस के तहत कराई जाती है, जो वहां के ज्यादातर पुरुष नागरिकों के लिए अनिवार्य मानी जाती है। रोहिणी ने बेटे की एक तस्वीर शेयर करते हुए गर्व और भावनाओं से भरा संदेश लिखा, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया।

मां रोहिणी आचार्य बोलीं- 'कठिन लड़ाइयों में ही योद्धा बनते हैं'
रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि आज उनका दिल गर्व से भरा हुआ है। उन्होंने बेटे को आशीर्वाद देते हुए कहा कि आदित्य बहादुर, साहसी और अनुशासनप्रिय है और उसे हमेशा याद रखना चाहिए कि जीवन की सबसे कठिन लड़ाइयों में ही सच्चे योद्धा बनते हैं।
रोहिणी आचार्य ने एक्स पर लिखा,
''आज मेरा दिल गर्व से भरा हुआ है ,आज अपनी प्री -यूनिवर्सिटी (Pre-University) की पढ़ाई पूरी करने के बाद 18 साल की उम्र में हमारा बड़ा बेटा आदित्य 2 साल की Basic Military Training के लिए गया है। आदित्य तुम बहादुर,साहसी और अनुशासन के साथ रहने वाले हो,जाओ कमाल कर दिखाओ , हमेशा याद रखना जीवन की सबसे कठिन लड़ाइयों में ही योद्धा बनते हैं। हम सबों का सारा प्यार और हौसला हमेशा तुम्हारे साथ है।''
क्या होती है सिंगापुर की बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग (What is Basic Military Training)
सिंगापुर की बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग को काफी कठिन और अनुशासनपूर्ण माना जाता है। इस ट्रेनिंग का मकसद युवाओं में शारीरिक मजबूती, मानसिक दृढ़ता, टीम वर्क और नेतृत्व क्षमता विकसित करना होता है।
दो साल की इस अवधि में युवाओं को हथियारों की जानकारी, फायरिंग, परेड, मार्चिंग के साथ-साथ जंगल और खुले मैदानों में कठिन परिस्थितियों में जीवित रहने की ट्रेनिंग दी जाती है। ट्रेनिंग के दौरान किए गए प्रदर्शन के आधार पर ही यह तय होता है कि आगे उन्हें इन्फैंट्री, नेवी या एयरफोर्स जैसी किस यूनिट में भेजा जाएगा।
राजनीति से दूरी, परिवार पर फोकस
रोहिणी आचार्य वही शख्सियत हैं, जिन्होंने अपने पिता लालू यादव को किडनी दान देकर देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं। हालांकि, हाल के समय में उन्होंने बिहार की राजनीति और लालू परिवार से खुद को अलग करने का एलान किया था।
बिहार विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने तेजस्वी यादव के करीबी लोगों पर गंभीर आरोप लगाए और सार्वजनिक रूप से राजनीति से दूरी बनाने की बात कही। सारण लोकसभा सीट से चुनाव हारने के बाद अब उनका पूरा ध्यान अपने बच्चों और परिवार के भविष्य पर केंद्रित है।
परिवार के लिए गर्व का पल
ऐसे समय में बेटे आदित्य का सेना की ट्रेनिंग के लिए जाना रोहिणी आचार्य के निजी जीवन का एक बड़ा और सकारात्मक अध्याय माना जा रहा है।
यह कदम न सिर्फ अनुशासन और सेवा भावना की मिसाल है, बल्कि यह भी दिखाता है कि राजनीतिक परिवार से होने के बावजूद नई पीढ़ी अपने रास्ते खुद चुन रही है। लालू यादव के नाती का यह फैसला आने वाले समय में और भी चर्चा का विषय बन सकता है, क्योंकि इसमें देश सेवा, संघर्ष और आत्मनिर्भरता की कहानी छिपी हुई है।












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