क्या लालू के ये वाले विवादित किस्से जानते हैं आप...?

बेटी की शादी हो या सास-ससुर का रेल सफर और साले की इच्छा हर तरह से लालू विवादित रहे हैं।

पटना। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव अपनी चतुर राजनीति को लेकर पूरे देश मे चर्चित हैं। राजनीति की चतुराई में कभी-कभी राजद सुप्रीमो की दबंगई की नजर आती है। इसी का नतीजा है कि सारे कायदे कानून को छोड़ लालू प्रसाद यादव अपने आवास पर सरकारी डॉक्टर को बुलाते हुए दरबार लगाते हैं। हालांकि जब मामले का पर्दाफाश हुआ तो सभी अपनी सफाई देने में लग गए। ये दबंगई और कानून तोड़ने की बात पहली बार नहीं देखी गई है। इससे पहले भी कई बार लालू प्रसाद कानून को तोड़ते हुए देखे गए हैं। आइए आज आपको हम बताने जा रहे हैं लालू यादव की दबंगई की वो कहानी जिसने उन्हें चतुर नेता से दबंग बना दिया था। चाहे विदाउट टिकट ट्रेन में सफर करने का मामला हो या फिर जबरदस्ती एजेंसी की सारी गाड़ी उठाने की बात हो सब विवादों में घिरा रहा पर लालू यादव को इस से कोई फर्क नहीं पड़ा।

बेटी की शादी में लुटेरा बन गए थे लालू...

बेटी की शादी में लुटेरा बन गए थे लालू...

बात साल 2002 की है जब उनकी बेटी की शादी की जा रही थी। दिन शुक्रवार का था जब लालू की दूसरी बेटी रोहिणी आचार्य की शादी बड़ी धूम-धाम से पटना के एक अणे मार्ग में की जा रही थी। इस शादी में शामिल होने के लिए लगभग 25 हजार से अधिक लोग आए थे जिसमें सभी से यह दावा किया गया था कि बराती में शामिल होने आए लोगों को नई और चमचमाती गाड़ी से दरवाजे तक लाई जाएगी। फिर क्या था इस वादे को पूरा करने के लिए राजद कार्यकर्ता और लालू प्रसाद यादव के दोनों साले साधु यादव और सुभाष यादव ने Mahindra और Maruti एजेंसी से नई गाड़ी रातों रात उठवा ली और बारातियों का स्वागत जमकर किया। फिर बाराती के जाने के बाद सभी गाड़ी एजेंसी के बाहर खड़ी कर दी गई। कई दिनों तक राजनीतिक गलियारों में इस दबंगई की चर्चा होती रही पर ना तो किसी राजद कार्यकर्ता पर कार्रवाई हुई और ना ही लालू परिवार पर।

विदाउट टिकट ट्रेन में सफर कर रहे थे लालू के सास-ससुर...

विदाउट टिकट ट्रेन में सफर कर रहे थे लालू के सास-ससुर...

दूसरा मामला तब देखने को मिला जब लालू प्रसाद यादव के सास ससुर बिना टिकट के ट्रेन में सफर कर रहे थे। बात सन् 2007 के 13 फरवरी की है जब लालू के सास ससुर बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में विदाउट टिकट एसी में सफर कर रहे थे। तब किसी दूसरे यात्री जिसके नाम पर वो सीट आरक्षित थी वह वहां आ गया और अपनी सीट के लिए हंगामा मचाने लगा। हंगामा को देखते ही टीटी वहां पहुंचे और छपरा तक फर्स्ट क्लास एसी की टिकट होने की बात बताई। लेकिन यात्री का कहना था कि छपरा तक सफर करने के लिए फर्स्ट क्लास एसी का टिकट तो बनता ही नहीं है। इस पर टीटी ने झट से जवाब देते हुए कहा कि इस सीट पर बैठे हुए व्यक्ति रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के सास और ससुर हैं। मामला हाई प्रोफाइल होने के कारण तुरंत मीडिया में फैल गया। जिसके बाद टीटी से लालू प्रसाद ने बातचीत की और अपने ससुर शिव प्रसाद चौधरी और सास श्रीपति देवी को विदाउट टिकट फाइन भरवाया। इस मामले में मदद करने वाले टीटी को लालू प्रसाद यादव ने अगले दिन सम्मानित किया।

साले के लिए बदलवा दिया था प्लेटफार्म...

साले के लिए बदलवा दिया था प्लेटफार्म...

बात उस वक्त की है जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे और उनका साला सुभाष यादव गुवाहाटी राजधानी से दिल्ली जा रहे थे और पटना जंक्शन पहुंचे थे। गुवाहाटी राजधानी रोजाना प्लेटफार्म नंबर-3 पर आती थी। लेकिन उस दिन लालू यादव के साले सुभाष यादव ने उसे प्लेटफार्म नंबर-1 पर लगाने की जिद कर दी और मजबूरन रेलवे को लाचार होकर उसे प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर लगाया गया। जब यह मामला मीडिया के नजरों में आया तो रेल मंत्रालय के तरफ से एक बयान जारी किया गया। जिसमें यह कहा गया कि सुभाष यादव के जान पर खतरा को देखते हुए रेलवे ने गुवाहाटी राजधानी को प्लेटफॉर्म नंबर एक पर खड़ा कर दिया था।

सरकारी एंबुलेंस पर किया था कब्जा...

सरकारी एंबुलेंस पर किया था कब्जा...

बात साल 2016 की है जब गरीबों के इलाज और आने-जाने के लिए 108 एंबुलेंस पर लालू परिवार का कब्जा चल रहा था। दिनभर यह एंबुलेंस राबड़ी देवी की सरकारी आवास के बाहर खड़ा रहता था। जब इस बात की जानकारी मीडिया में आई तो इस पर जमकर बवाल हुआ और राजनीतिक सियासत भी हुई। फिर 9 अप्रैल 2016 को एंबुलेंस वापस बुला ली गई। एंबुलेंस लगाए जाने पर ऐसा कहा जा रहा था कि निजी रसूख का इस्तेमाल के लिए लालू यादव ने इसे अपने आवास पर रखने का मौखिक आदेश दे दिया था।

घर को ही बना लिया अस्पताल...

घर को ही बना लिया अस्पताल...

बात 8 जून 2017 की है जहां इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के तीन डॉक्टर और दो नर्स लालू यादव के सरकारी आवास 10 सर्कुलर रोड पटना में तैनात थे। तैनाती 28 मई से की गई थी और मामला सामने आने के बाद उन्हें 8 जून को वापस अस्पताल में बुला लिया गया। यह बात तब की है जब लालू प्रसाद के परिवार में कोई भी बीमार नहीं था तो डॉक्टर और नर्स की तैनाती क्यों।

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