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भैंस को चारा, लालटेन में पढ़ाई, फिर रिक्शा चलाया, लालू कैसे बने हजार करोड़ के मालिक?

जब किस्मत का बंटवारा हो रहा था तो लालू यादव सबसे आगे थे जहां उन्हें सरस्वती तो नहीं मिली पर लक्ष्मी जरूर मिली।

नोएडा। लालू प्रसाद यादव और राबड़ी के ठिकानों पर सीबीआई जो बरामद करेगी वो तो सामने आएगा ही लेकिन लालू के राजनीतिक सफर में ये दिन पहली बार नहीं आया है। वहीं लालू को सुनने पढ़ने वालों के लिए ये एक दिलचस्प मुद्दा है कि आखिर लालू यहां तक पहुंचे कैसे? तो जानिए आखिर क्या है लालू प्रसाद यादव के निजी जीवन की वो बातें जो बताती हैं कि लालू की पूरी कहानी।

जब घर में नहीं थी लालटेन

जब घर में नहीं थी लालटेन

सबसे पहले आपको बता दें की गरीबी के अंधेरे तले अपने जीवन कि शुरुआत करने वाले लालू प्रसाद यादव बचपन में गाय-भैंस चराकर अपना दिन काटते थे और गांव के ही सरकारी स्कूल में पढ़ाई करते थे। इससे भी जब उनका खर्च और परिवार के हालात नहीं सुधरे तो रिक्शा चलाकर अपने परिवार के साथ-साथ अपनी पढ़ाई की। अब आप सोच रहे होंगे कि रिक्शा चालक से हजार करोड़ तक की संपत्ति तय करने का सफर कैसे लालू ने पार किया तो हम आपको बता दें की भगवान के द्वारा जब किस्मत का बंटवारा हो रहा था तो लालू यादव सबसे आगे थे जहां उन्हें सरस्वती तो नहीं मिली पर लक्ष्मी जरूर मिली।

लालू प्रसाद यादव का जन्म बिहार के गोपालगंज जिले के फुलवरिया गांव में हुआ। जन्म के बाद जैसे-जैसे वो बड़े हुए पढ़ाई-लिखाई के लिए मारीपुर गांव में एडमीशन कराया गया। लेकिन परिवार के हालात कुछ ठीक नहीं थे जिसकी वजह से उन्हें पढ़ाई में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। स्कूल जाने से पहले भैंस को खिलाना फिर स्कूल से आने के बाद भैंस का चारा लाने के बाद जो समय बचता उसमें पढ़ाई करना। इसके बावजूद भी उन्हें स्कूल में फीस देने के लिए पैसे का इंतजाम नहीं होता था। जिसे देखते हुए वो हर शनिवार रिक्शा चलाते थे तो गुड़ और चावल फीस के रूप में मास्टर को देते थे। तो गरीबी की हालात देखकर गांव के लोग उन्हें देखते हुए सोरठी-बृजभार गाने लगते थे। जिससे लालू यादव गुस्से में आ जाते थे।

'चौधरी से यादव'

'चौधरी से यादव'

बचपन के दिन गुजरने के बाद लालू प्रसाद यादव अपने चाचा यदुनंदन चौधरी के कहने पर अपने भाई मुकुंद चौधरी के साथ पटना आए। लालू के भाई मुकुंद चौधरी 11 आना पर मजदूरी करते थे। पटना आने के बाद लालू यादव परिवार चौधरी से यादव बन गया। लालू यादव पढ़ने-लिखने में पहले से ही काफी तेज थे। जिसके वजह से उनका नामांकन पटना में ही शेखपुरा मोर के मिडिल स्कूल में कराया गया। जहां 1 साल पढ़ने के बाद बीएमपी 5 के मिडिल स्कूल में नामांकन कराते हुए सातवीं तक की पढ़ाई पूरी की।

शौचालय तक नहीं था घर में

शौचालय तक नहीं था घर में

पटना आने के बाद लालू यादव परिवार वेटरनरी क्वाटर में रहता था। जहां घर में शौचालय की सुविधा नहीं थी लोग शौच के लिए खेत में जाया करते थे। उनके भाई की कमाई 45 रुपए महीने थी। फिर भी लालू यादव की आगे पढ़ाई के लिए आठवीं क्लास में नामांकन कराया गया। स्कूल की पढ़ाई के दौरान वो एनसीसी में शामिल हुए और बहुत जल्द फुटबॉल लीडर बन गए।

लालू ने बेची है चाय भी

लालू ने बेची है चाय भी

गरीबी के उन दिनों में लालू प्रसाद यादव के घर में रोशनी के लिए लालटेन तक नहीं थी। उनके परिवार के लोग अंधेरे में रहते थे तो रूम में अंधेरा होने के चलते लालू सोलर लाइट की रोशनी में जाकर अपनी पढ़ाई करते थे। स्कूल से गरीब बच्चों को दिए जाने वाली राशि की वजह से लालू यादव की पढ़ाई का खर्च पूरा होता था। हालांकि इस खर्च को पूरा करने के लिए लालू यादव कभी चाय भी बेचा करते थे।

बचपन से ही थी डॉक्टर बनने की ख्वाहिश

बचपन से ही थी डॉक्टर बनने की ख्वाहिश

लालू प्रसाद यादव को बचपन से ही डॉक्टर बनने का शौक था लेकिन गरीबी की वजह से उनके सपने पूरे नहीं हुए। अपने सपने पूरे करने के लिए लालू प्रसाद यादव ने एक ऐसे युवक के साथ दोस्ती की थी जो परिवार से मालदार था और उसकी ही साइकिल पर बैठकर लालू ने आगे की पढ़ाई पूरी की। आगे की पढ़ाई पूरी करने के बाद वो बीएन कॉलेज में एडमिशन लेने पहुंचे। लेकिन हमेशा से ही लालू अलजेब्रा में कमजोर थे जिसकी वजह से साइंस छोड़ उन्होंने आर्ट से पढ़ाई की पॉलिटिकल साइंस, हिस्ट्री से ग्रेजुएशन की पढ़ाई के बाद वो राजनीति में आए।

पहली बार छात्र संघ के बने थे नेता

पहली बार छात्र संघ के बने थे नेता

पटना यूनिवर्सिटी में अपनी पढ़ाई के दौरान 1971 में लालू छात्र संघ चुनाव हिस्सा रहे और छात्र संघ के महासचिव चुन लिए गए। डॉक्टर बनने का सपना पूरा नहीं होने के बाद लालू यादव ने एलएलबी की पढ़ाई शुरू की और वकालत के जरिए अपना कैरियर बनाने की सोची। पढ़ाई के दौरान वो वेटरनरी कॉलेज में क्लर्क का भी काम करते थे।

ऐसे हुई थी लालू की शादी

ऐसे हुई थी लालू की शादी

वेटरनरी कॉलेज में क्लर्क का काम कर रहे लालू यादव की शादी का रिश्ता आया। शादी की बात सुनने के बाद लालू यादव और डॉक्टर रामचंद्र को रावड़ी देवी को देखने के लिए भेजा गया। सब कुछ तय होने के बाद लालू यादव शादी के लिए तैयार हुए। लालू की शादी के तुरंत बाद ही बिहार में पूर्ण क्रांति आंदोलन की शुरुआत हुई और लालू पटना आ गए। इसी बीच 18 मार्च 1974 को राबड़ी देवी का पटना आने का फैसला हुआ और राबरी देवी अपने भाई के साथ पटना आई।

जब हुआ था कि मारे गए लालू...

जब हुआ था कि मारे गए लालू...

बिहार में संपूर्ण क्रांति के सभी छात्र आक्रोशित हो गए थे और जमकर आंदोलन करने लगे थे। जिसे देखते ही सेना के जवानों ने लालू यादव की जमकर पिटाई कर दी। जिसके बाद पटना में ये अफवाह बड़े जोर-शोर से उठी थी की लालू प्रसाद यादव मारा गया। जिसके बाद लालू प्रसाद यादव के भाई के साथ-साथ उनके करीबी उन्हें खोजने के लिए गली-गली घुमने लगे। अचानक लालू प्रसाद यादव एयरपोर्ट गेट पर अपने भाई से मिले और राबड़ी को धैर्य बनाए रखने की सलाह दी। कुछ दिनों बाद ही लालू को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद लालू की किस्मत बदल गई

गिरफ्तारी के बाद लालू की किस्मत बदल गई

आंदोलन में गिरफ्तार होने के बाद लालू यादव की किस्मत बदल गई। जेल से बाहर आने के बाद लालू प्रसाद यादव की छवि एक नेता की बन चुकी थी और 1977 में आम चुनाव हुआ तो लालू यादव सांसद चुने गए। जिसके बाद 1980 से 1985 में वो MLA बने फिर प्रतिपक्ष के नेता और 1990 में बिहार के मुख्यमंत्री बने। बिहार के मुख्यमंत्री बनने के बाद लालू प्रसाद यादव पर एक-एक कर घोटाले के आरोप लगने लगे और इसी आरोप के चलते उन्हें जेल जाना पड़ा तो अब फिर एक बार लालू पर संकट मंडराने लगा है।

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