बिहार के Sitamarhi में बनेगा भव्य जानकी मंदिर, नीतीश कुमार ने शेयर की पहली झलक! देखें प्रस्तावित डिज़ाइन
Sita Mandir In Punaura Dham Sitamarhi Bihar: बिहार में इसी साल प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश सरकार ने एक बड़ा सांस्कृतिक और राजनीतिक कदम उठाते हुए सीतामढ़ी के पुनौराधाम स्थित जानकी जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण का फैसला लिया है। इस परियोजना के लिए मंदिर का प्रस्तावित डिज़ाइन भी तैयार कर लिया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वयं अपने आधिकारिक सोशल मीडिया माध्यम से इस भव्य मंदिर की डिज़ाइन साझा की, जो राज्य में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देने के साथ-साथ मिथिला क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। वही विधानसभा चुनाव से पहले इसे बेहद महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।
एक ट्रस्ट का भी गठन कर दिया गया है- नीतीश कुमार
नीतीश कुमार ने भव्य मंदिर की डिज़ाइन साझा करते हुए लिखा कि, 'मुझे बताते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि जगत जननी मां जानकी की जन्मस्थली पुनौराधाम, सीतामढ़ी को समग्र रूप से विकसित किए जाने हेतु भव्य मंदिर सहित अन्य संरचनाओं का डिजाइन अब तैयार हो गया है, जिसे आपके साथ साझा किया जा रहा है। इसके लिए एक ट्रस्ट का भी गठन कर दिया गया है ताकि निर्माण कार्य में तेजी आ सके। हमलोग पुनौराधाम, सीतामढ़ी में भव्य मंदिर निर्माण शीघ्र पूरा कराने हेतु कृतसंकल्पित हैं। पुनौराधाम में मां जानकी के भव्य मंदिर का निर्माण हम सभी बिहारवासियों के लिए गौरव और सौभाग्य की बात है।'

लोगों में जगी आस
गौरतलब है कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद से ही सीतामढ़ी के पुनौराधाम स्थित जानकी जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण की मांग जोर पकड़ने लगी थी। स्थानीय लोग और श्रद्धालु पिछले कई वर्षों से इस मांग को लेकर लगातार आवाज़ उठा रहे थे। अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा प्रस्तावित डिज़ाइन साझा किए जाने के बाद लोगों में विश्वास जगा है कि जानकी मंदिर का निर्माण कार्य जल्द ही प्रारंभ होगा, जिससे मिथिला क्षेत्र की सांस्कृतिक आस्था को एक नई पहचान मिलेगी।
पुनौराधाम: मिथिला की सांस्कृतिक आस्था का प्रतीक
पुनौराधाम(Punaura Dham) बिहार के सीतामढ़ी जिले में स्थित एक अत्यंत पावन और श्रद्धा से ओत-प्रोत स्थल है, जिसे जनकनंदिनी माता सीता की जन्मभूमि के रूप में संपूर्ण भारतवर्ष में मान्यता प्राप्त है। पुरातन मान्यताओं और वाल्मीकि रामायण के अनुसार, यह वही पुण्यभूमि है जहाँ मिथिला नरेश राजा जनक ने अकाल से पीड़ित राज्य में हल जोतते हुए भूमि की गहराइयों से एक दिव्य कन्या सीता को प्राप्त किया था, जो आगे चलकर भगवान श्रीराम की अर्धांगिनी बनीं और सनातन धर्म में नारी शक्ति, त्याग, मर्यादा और शौर्य की प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठित हुईं।
यह स्थल न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि मिथिला की सांस्कृतिक पहचान और वैदिक परंपरा का जीवंत प्रतीक भी है। अयोध्या में राम जन्मभूमि जितनी श्रद्धा रामभक्तों के लिए महत्वपूर्ण है, ठीक उसी भाव से पुनौराधाम जनकनंदिनी के भक्तों के लिए एक तीर्थस्वरूप है। यहां प्रतिवर्ष जानकी नवमी, रामनवमी और विवाह पंचमी जैसे पर्वों पर लाखों श्रद्धालु एकत्र होते हैं, जिससे यह स्थान न केवल धार्मिक चेतना, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक समरसता का भी केंद्र बन गया है।
राज्य सरकार द्वारा अब इस स्थान पर भव्य जानकी मंदिर के निर्माण की घोषणा के साथ ही पुनौराधाम को एक अंतरराष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जाने की दिशा में भी ठोस प्रयास आरंभ हो चुके हैं, जिससे यह भूमि एक बार पुनः अपने गौरवपूर्ण अतीत की स्मृति को सजीव कर सकेगी।
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