क्या महाराष्ट्र के रास्ते पर बढ़ रहा है बिहार, नीतीश के JDU के टूटने के दावों में कितना दम?
महाराष्ट्र में विपक्षी महा विकास अघाड़ी के साथ खेल होने के बाद बिहार में भी सत्ताधारी महागठबंधन को लेकर राजनीतिक अटकलबाजियां शुरू हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विरोधियों का दावा है कि उनका जनता दल (यूनाइटेड) भी टूट की ओर बढ़ रहा है।
जानकारी के मुताबिक नीतीश कुमार की ओर से लगातार तीन दिनों से पार्टी के विधायकों और सांसदों के साथ एक-एक करके बैठकों के बाद इस तरह की अटकलाबाजियों को और हवा मिल रही है।

कई वजहों से बिहार में बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
मंगलवार को भी कम से कम तीन सांसदों संतोष कुशवाहा, सुनील कुमार पिंटू और खीरू महतो ने सीएम नीतीश से मुलाकात की है। दरअसल, बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के खिलाफ जिस तरह से लैंड फॉर जॉब स्कैम में सीबीआई ने चार्जशीट दायर किया है और उनके प्रदेश से गैर-मौजूदगी के दौरान कुछ बड़े तबादले हुए हैं, उससे और भी कयासबाजियां जन्म ले रही हैं।
बिहार में भी बन सकती है महाराष्ट्र वाली स्थिति- अठावले
इन सबके बीच नीतीश के राजनीतिक विरोधियों को यहां तक दावा करने का मौका मिल गया है कि जेडीयू के जो एमएलए एनडीए छोड़ने के उनके फैसले से नाराज हैं, उनकी वजह से राज्य में महाराष्ट्र जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। पीटीआई के मुताबिक केंद्रीय मंत्री और आरपीआई नेता रामदाव अठावले ने दावा किया है, 'बिहार और यूपी में भी महाराष्ट्र जैसी स्थिति बन सकती है, क्योंकि आरजेडी से हाथ मिलाने के चलते नीतीश कुमार के कई सारे एमएलए नाखुश हैं।'
सुशील मोदी भी कर चके हैं जेडीयू में 'विद्रोह' के माहौल का दावा
उन्होंने कहा, 'इसी तरह यूपी में भी जयंत चौधरी एनडीए में शामिल हो सकते हैं, क्योंकि वह पटना में विपक्ष की बैठक में शामिल नहीं हुए थे।' इसी तरह का दावा भाजपा के दिग्गज और बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी भी कर चुके हैं। उनके मुताबिक जेडीयू में 'विद्रोह' का माहौल बन रहा है और यह कभी भी टूट सकता है। क्योंकि, इसके कई सांसद और एमएलए बीजेपी और दूसरे दलों से बात कर रहे हैं।
बीजेपी के राज्यसभा के सांसद ने दावा किया कि जेडीयू के ये नेता न तो नीतीश की जगह राजद के तेजस्वी यादव को स्वीकार करेंगे औ न ही संयुक्त विपक्ष के नेता के तौर पर राहुल गांधी को। उन्होंने कहा था,'जब से नीतीश कुमार ने राजद के तेजस्वी यादव को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया है और राहुल गांधी को नेता स्वीकार किया है, बिहार में भी जदयू में विद्रोह का वातावरण पैदा हो रहा है। जेडीयू का कोई भी एमएलए या एमपी राहुल गांधी और तेजस्वी यादव को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।'
'जेडीयू को पार्टी में टूट के आसार दिख रहे हैं'
उन्होंने यहां तक कहा कि, 'जेडीयू को पार्टी में टूट के आसार दिख रहे हैं....आने वाले दिनों में कुछ भी संभव है। कोई गारंटी नहीं दे सकता कि जेडीयू में कुछ भी नहीं होगा।' उनके मुताबिक 'जदयू के ज्यादातर सांसदों को लगता है कि अगले चुनाव में उन्हें टिकट नहीं मिलेगा। नीतीश की ओर से तेजस्वी को अपना उत्तराधिकारी घोषित करने के बाद उन्हें अपना भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। इसलिए जदयू में अफरा-तफरी है। इसके विधायक-सांसद दूसरे दलों से संपर्क कर रहे हैं।'
'बीजेपी जदयू और कांग्रेस विधायकों को लुभाने की कोशिशें में'
टीओआई की एक रिपोर्ट में भी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि महागठबंधन में इस बात की चर्चा है कि बीजेपी के नेता 'जदयू और कांग्रेस विधायकों' को लुभाने की कोशिशें कर रहे हैं। दूसरी तरफ कुछ सूत्रों का यह भी कहना है कि इन सारी अटकलबाजियों के पीछे खुद नीतीश कुमार हैं, जो इसी बहाने तेजस्वी को सत्ता सौंपने के लालू के दबाव को फिलहाल टालना चाहते हैं।
बहरहाल, बिहार में जेडीयू के 45 विधायक हैं। ऐसे में नीतीश कुमार की पार्टी में टूट के लिए कम से कम 30 विधायकों की आवश्यकता पड़ेगी। जो कि बहुत ही चुनौतीपूर्ण लग रहा है। लेकिन, महाराष्ट्र के राजनीतिक घटाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में भी जरूर सरगर्मी बढ़ा दी है।












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