जानिए कैसे पटना के बंगाली टोला इलाके में बनाया गया तमिलनाडु प्रवासी हमले का फर्जी वीडियो, अब 3 हुए गिरफ्तार
Tamil Nadu Migrant Workers Fake Video:तमिलनाडु में प्रवासी हमले का फर्जी वीडियो बनाने वाला आरोपी राकेश सिंह ने अनिल यादव और आदित्य कुमार नाम के दो आदमियों को वीडियो में घायल मजदूरों के रूप दिखाने के लिए काम पर रखा था।

बिहार पुलिस ने तमिलनाडु में प्रवासी श्रमिकों पर हमले का फर्जी वीडियो बनाने वाले तीन मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। पटना के बंगाली टोला इलाके में तमिलनाडु प्रवासी हमले का फर्जी वीडियो बनाया गया था। अब पटना पुलिस ने इस मामले की सारी सच्चाई बताई है। आइए जानें कैसे पटना में किराए के मकान में रची गई ये साजिश?
पटना के एक छोटे फल व्यापारी राजकुमार प्रसाद गुप्ता को 01 मार्च को इस बात का अहसास नहीं था कि जिस राकेश रंजन कुमार सिंह को वह अपना पटना के बंगाली टोला इलाके वाला घर किराए पर रहे हैं, वह एक बड़ी मुसीबत बन जाएगी। राजकुमार प्रसाद गुप्ता उस वक्त चौंक गए जब 10 मार्च को पटना पुलिस उनके किरायेदार राकेश रंजन कुमार सिंह के साथ उनके दरवाजे पर दस्तक देने आई।
राकेश रंजन कुमार सिंह ने पटना पुलिस को बताया है कि वह एक यूट्यूब चैनल, बीएनआर न्यूज एजेंसी चलाते हैं। उन्होंने ये भी कहा कि उन्होंने पटना के बंगाली टोला इलाके वाले किराए के घर का इस्तेमाल तमिलनाडु में प्रवासी श्रमिकों के साथ मारपीट का एक नकली वीडियो बनाने के लिए किया था।
गोपालगंज से गिरफ्तार हुआ राकेश सिंह
पुलिस ने कहा कि राकेश सिंह को 8 मार्च को गोपालगंज जिले में उसके गांव से गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ के दौरान, राकेश सिंह ने 6 मार्च को फर्जी वीडियो बनाने और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड करने के लिए जक्कनपुर थाना क्षेत्र के तहत फल व्यापारी राजकुमार प्रसाद गुप्ता के घर को किराए पर लेने की बात स्वीकार कर ली है।
राकेश सिंह ने वीडियो के लिए घायल मजदूरों के रूप में पोज देने के लिए अनिल यादव और आदित्य कुमार के रूप में पहचाने गए दो लोगों को काम पर रखा था। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि मकान मालिक गुप्ता ने पुलिस को बताया कि वह जानता था कि आरोपी कमरे में वीडियो बनाता था, लेकिन वह बारीकियों से वाकिफ नहीं था।
कैसे किया फर्जी वीडियो शूट
हिन्दुस्तान टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक पटना पुलिस के अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ''राकेश सिंह ने तमिलनाडु में बिहारी प्रवासी श्रमिकों पर चोटों को दिखाने के लिए एक स्थानीय दवा की दुकान से कपास, पट्टी और बीटाडीन खरीदा था। मेकअप का उपयोग करके नकली चोट के निशान बनाया गया था। पूरा सेटअप तैयार करने के बाद राकेश सिंह ने अपने मोबाइल फोन से वीडियो शूट किया और इसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया था। जो देखते ही देखते वायरल हो गया था।''
यूट्यूबर मनीष कश्यप का नाम भी इस केस में
इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर मशहूर यूट्यूबर मनीष कश्यप ने भी इसे अपने चैनल पर शेयर किया था। मनीष कश्यप अपने फेसबुक और ट्विटर अकाउंट से "सच तक न्यूज" चैनल चलाते हैं। अधिकारी ने कहा कि राकेश सिंह ने पुलिस को बताया कि उसने मनीष कश्यप के निर्देश पर वीडियो बनाया था, जिसने उसे फर्जी वीडियो के लिए अच्छे पैसे का आश्वासन दिया था।
इससे पहले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने प्रवासी श्रमिकों पर हिंसा के आरोपों को खारिज करते हुए दहशत फैलाने वाले अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी थी। उन्होंने अपने बिहार समकक्ष नीतीश कुमार को भी आश्वस्त किया था कि श्रमिकों को कोई नुकसान नहीं होगा।
इस महीने की शुरुआत में इस मुद्दे ने बिहार विधानसभा को हिलाकर रख दिया था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने कार्यवाही को रोक दिया, दावा किया कि तमिलनाडु में हिंदी बोलने के लिए बिहारी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। आरोपों की जांच करने वाली बिहार के अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय समिति ने भी पुष्टि की कि दक्षिणी राज्य में ऐसा कोई हमला नहीं हुआ था।












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