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कोरोना से निपटने में फेल नीतीश सरकार के लिए क्या मजबूरी बन गए हैं भाजपा कोटे के स्वास्थ्य मंत्री

पटना। क्या नीतीश कुमार भाजपा के सामने मजबूर हैं ? क्या वे भाजपा के दबाव के कारण खुल कर फैसला नहीं ले पा रहे ? कोरोना महासंकट के बीच भाजपा कोटे के स्वास्थ्य मंत्री नाकाम हैं और किरकिरी हो रही है नीतीश की। बार-बार स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को क्यों बदला जा रहा है ? अगर स्वास्थ्य विभाग कोरोना से निबटने में नाकाम है तो क्या इसके लिए केवल प्रधान सचिव ही जिम्मेवार हैं ? स्वास्थ्य मंत्री की कोई जिम्मेवारी नहीं ? स्वास्थ्य मंत्री को क्यों नहीं बदला जा रहा ? प्रशासनिक दक्षता के लिए नीतीश पहले कठोर फैसला लेते रहे हैं। उन्होंने भागलपुर दंगे की बंद फाइल दोबारा खोलने के लिए भाजपा की परवाह नहीं की थी। लेकिन कोरोना महासंकट के समय नीतीश कठोर फैसला नहीं ले पा रहे हैं। क्या गठबंधन की मजबूरी में वे स्वास्थ्य मंत्री को नहीं बदल पा रहे हैं ? नीतीश की राजनीतिक मजबूरी चाहे जो भी हो, कोरोना को लेकर उनकी चौतरफा आलोचना हो रही है। अगर यही स्थिति रही तो नीतीश को बड़ा चुनावी नुकसान हो सकता है।

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    मंत्री और आला अफसर में अनबन

    मंत्री और आला अफसर में अनबन

    बिहार में मार्च महीने से कोरोना का संक्रमण शुरू हुआ था। उस समय संजय कुमार स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव थे। विभाग का कामकाज ठीक चल रहा था। अप्रैल-मई में जब कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ने लगा तो प्रधान सचिव संजय कुमार और स्वास्थ्य़ मंत्री मंगल पांडेय के बीच तालमेल में कमी होने लगी। संजय कुमार नीतीश कुमार की पसंद थे। संजय कुमार विभाग के शीर्ष अधिकारी होने के नाते रोजाना ट्वीटर पर नये कोरोना संक्रमितों की संख्या जारी करते थे। इस बीच मंत्री मंगल पांडेय भी सक्रिय हो गये। वे भी ट्वीटर पर कोरोना अपडेट के आकंड़े जारी करने लगे। लेकिन सरकार के लिए समस्या तब उत्पन्न हो गयी जब मंत्री और प्रधान सचिन के आंकड़ों में अंतर आने लगा। इससे कोरोना संक्रमण को लेकर भ्रम पैदा होने लगा। इसके अलावा मंत्री और प्रधान सचिव के बीच कुछ अन्य मुद्दों पर भी असहमति थी। दोनों के बीच दूरी बढ़ने लगी। कहा जाता है कि मंत्री ने संजय कुमार को हटाने के लिए नीतीश कुमार पर दबाव बनाया था। भाजपा के कुछ शीर्ष नेता भी इसमें शामिल बताये गये थे। गठबंधन की सरकार चला रहे मजबूर नीतीश को ये बात माननी पड़ी। संजय कुमार का तबादला कर दिया गया। संजय कुमार को हटाने के बाद नीतीश कुमार ने उदय सिंह कुमावत को स्वास्थ्य विभाग का प्रधान सचिन बनाया। लेकिन मंत्री मंगल पांडेय की इनसे भी पटरी नहीं बैठी। मंगल पांडेय ने नीतीश कुमार से सीधे उदय सिंह कुमावत की शिकायत कर दी। नीतीश को फिर भाजपा के दवाव में झुकना पड़ा। उदय सिंह कुमावत को भी इस पद से रुखसत कर दिया गया। अब सवाल ये है कि नीतीश कुमार स्वास्थ्य मंत्री के कहने पर बार बार प्रधान सचिव क्यों हटा रहे हैं ? क्या व्यवस्था सुधारने के लिए एक मात्र यही उपाय है ? क्या गारंटी है कि नये प्रधान सचिव के साथ मंत्री का बेहतर तालमेल होगा ? सत्ता के गलियारे से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि संजय कुमार को स्वास्थ्य विभाग से हटाने का फैसला सही नहीं था।

    दो महीने में दो प्रधान सचिव हटे

    दो महीने में दो प्रधान सचिव हटे

    दो महीने के बीच स्वास्थ्य विभाग के दो प्रधान सचिव बदले गये। कोरोना महासंकट के बीच शायद ही किसी राज्य में इतने प्रयोग किये गये। लेकिन इसका नतीजा क्या हासिल हुआ ? डॉक्टरों की कमी है, अस्पताल में बेड की कमी है, कोरोना जांच की कमी है, स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सुरक्षा किट की कमी है, मरीजों को आक्सीजन की कमी है। बिना संसाधन के स्वास्थ्यकर्मी क्या करेंगे ? एनएमसीएच जैसे बड़े अस्पताल की भी स्थिति भी खराब है। यहां मरीजों को शव के बीच रहने पर हंगामा मच गया था। कोरोना की रफ्तार और तेज हो गयी है। 13 जुलाई से 26 जुलाई के बीच दस दिनों में कोरोना मरीजों की संख्या 13 हजार से 26 हजार हो गयी थी। दो प्रधान सचिवों के बदलने से क्या स्थिति बदल गयी ? अगर मंत्री की नजर में प्रधान सचिव कार्यकुशल नहीं है तो मुख्यमंत्री को भी अपने मंत्री के कार्य की समीक्षा कर उनकी योग्यता का आकलन करना चाहिए। अगर स्वास्थ्य विभाग मनमाफिक नतीजे नहीं दे रहा है तो उसमें आमूलचूल बदलाव की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग में कई अधिकारी कुंडली मार कर बैठे हैं। उन पर भी नजर होनी चाहिए। मंत्री वही रहें, अन्य कर्मचारी वहीं रहें और सिर्फ प्रधान सचिव बदल दिया जाए तो क्या समस्या खत्म हो जाएगी ?

    तेजस्वी का स्वास्थ्य मंत्री पर निशाना

    तेजस्वी का स्वास्थ्य मंत्री पर निशाना

    नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय को हटाने की मांग की है। तेजस्वी के मुताबिक, मंगल पांडेय ने अपने कार्यकाल में चमकी से लेकर कोरोना तक लापरवाही की पराकाष्ठा पार की है। ऐसे में मुख्यमंत्री को प्रधान सचिव की जगह मंत्री को हटाना चाहिए। तेजस्वी ने मंगल पांडेय को सबसे असफल स्वास्थ्य मंत्री बताया है। पिछले साल बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान राजद ने स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय को जबर्दस्त तरीके से घेरा था। उस समय इंसेफेलाइटिस यानी चमकी बुखार से मुजफ्फरपुर इलाके में करीब 160 बच्चों की मौत हो गयी थी। तब राजद ने मंत्री मंगल पांडेय के इस्तीफे की मांग की थी। विधानसभा में जम कर हंगामा किया था। इसके कारण सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई थी। उस समय आरोप लगा था कि जब चमकी बुखार पर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्द्धन के साथ बैठक चल रही थी तब मंगल पांडेय भारत-पाकिस्तान मैच का स्कोर पूछते दिखायी पड़े थे। तेजस्वी ने इस प्रकरण को भी मुद्दा बनाया था। तेजस्वी के मुताबिक, मंत्री मंगल पांडेय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भी बात नहीं मानते। तेजस्वी ने कटाक्ष किया है कि भाजपा के दबाव के कारण मुख्यमंत्री अपने मंत्री को नहीं हटा पा रहे हैं। लेकिन उन्हें इसके लिए हिम्मत दिखानी चाहिए।

    बिहार: IMA की शिकायत के बाद नीतीश सरकार ने स्वास्थ्य सचिव को पद से हटाया, IAS प्रत्यय अमृत को सौंपी कमान

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