Bihar News: 'समाजिक एकता की मिसाल', हिंदू परिवार दशकों से कर रहा मकबरे की देखभाल
मुस्लिम समुदाय के मकबरे का हिंदू परिवार देखभाल कर रहे हैं, पूरे इलाके में इस पहल की लोग काफी सराहना कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नफरत के इस दौर में मोहब्बत बांटी जा रही है।

Gaya News: समाज में दिन पर दिन धर्म के नाम सियासी खेल बढ़ता ही जा रहा है। लेकिन धार्मिक उन्मादों के बीच कुछ ऐसी तस्वीरे भी देखने को मिल जाती हैं, जिसे देख कर आप भी कहेंगे की यही है असली इंसानियत। एक ऐसी ही तस्वीर बिहार के गया ज़िले से सामने आई है, जहां एक हिंदू परिवार करीब पांच दशकों से मकबरे की देखभाल कर रहा है। मुस्लिम उर्दू साहित्यकार इमदाद इमाम असर के कब्र की देखभाल हिंदु परिवार के द्वारा करना इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। आइए विस्तार से जानते हैं कि पूरा मामला क्या है।

कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री अवधेश सिंह की हवेली के पिछले हिस्से में इमदाद इमाम असर का कब्र स्थित है। इमदाद असर के अलावा उनके वंशजों की चार और कब्रें वहां स्थित हैं। ग़ौरतलब है कि अवधेश सिंह और उनका परिवार इन कब्रों की देखभाल करते हैं। हर साल मकबरे पर 'चादरपोशी' भी करते हैं। इसके साथ ही त्योहार के मौके पर फातिहा का भी आयोजन करते हैं। 1960 में पूर्व मंत्री अवधेश सिंह के परिवार ने हवेली खरीदी थी। 1964 से अवधेश सिंह वहां रह रहे हैं। अपने पिता की हिदायत पर पिछले 49 सालों से मकबरे की हिफाजत औऱ देखभाल करते आ रहे हैं।
अवधेश सिंह ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि यह हमारे लिए फख़्र की बात है कि अज़ीम शख्सियत की ज़िंदगी यहां गुज़री और उनका कब्र भी आज हम लोगों के बीच यहीं स्थित है। आज हम उनके आशीर्वाद से ही एक बडे मुकाम तक पहुंचे हैं। वहीं स्थानीय लोगों ने कहा कि समाज में आज हर तरफ नफरत का माहौल देखने को म्ल रहा है। यह बहुत ही बड़ी बात है कि एक हिंदू परिवार मुस्लिम व्यक्ति के कब्र की देखभाल कर रहा है। गंगा जमुनी तहज़ीब की यह शानदार मिसाल है।
इमदाद इमाम असर का जन्म 1849 में हुआ था। 11 मार्च 1933 को उन्हें मानपुर स्थित बंगले में दफन किया गया था। इमाम असर के पिता के पिता करापार सराय सलारपुर (पटना) के नवाब थे। पटना कॉलेज में इतिहास और अरबी के शिक्षक के तौर पर इमदाद असर ने काम किया। उन्हें नवाब की उपाधि ब्रिटिश सरकार की तरफ से दी गई थी। पटना से उन्होंने गया का रुख किया वही बस गए। मानपुर (गया) में उन्होंने एक हवेली का निर्माण करवाया। आज की तारीख में उसी हवेली में अवधेश सिंह रह रहे हैं।
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