8 साल बाद गांधी मैदान में हुए ब्लास्ट का आया फैसला, जानिये कैसे पूरी हुई जांच प्रक्रिया
पटना। आठ साल पहले 2013 में बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान में हुए सीरियल बम ब्लास्ट केस में एनआईए कोर्ट ने आज कुल 10 आरोपियों में में से 9 को दोषी करार दिया है। वहीं एक आरोपी के खिलाफ सबूत ना मिलने के चलते अदालत ने उसको बरी कर दिया है। 2013 में गांधी मैदान में ये धमाके तब हुए थे जब उस समय के भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी यहां चुनाव प्रचार के लिए यहां हुंकार रैली करने आ रहे थे। बता दें कि इस मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी थी। ब्लास्ट के दौरान गांधी मैदान में नरेंद्र मोदी सहित कई बड़े नेता मौजूद थे। गांधी मैदान से पूर्व एक धमाका पटना जंक्शन पर भी हुआ था। इस धमाके में 6 लोगों की मौत हुई थी और करीब 84 लोग घायल हो गए थे।
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ब्लास्ट के मामले की जांच एनआईए ने अगले दिन ही शुरू कर दिया था और साल 2014 के 21 अगस्त को 11 अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। इसके बाद एनआईए की टीम ने इस मामले में हैदर अली, नोमान अंसारी, मो. मुजिबुल्लाह अंसारी, इम्तियाज आलम, अहमद हुसैन, फकरुद्दीन, मो. फिरोज असलम, इम्तियाज अंसारी, मो. इफ्तिकार आलम, अजहरुद्दीन कुरैशी और तैफिक अंसारी को गिरफ्तार किया था। फिलहाल इस मामले में कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है।
गांधी मैदान ब्लास्ट का मास्टर माइंड हैदर अली और मोजिबुल्लाह था। बताया जा रहा है कि बम धमाके के बाद वो डर गया था इसलिए मौके से भागने की कोशिश की लेकिन तब तक पुलिस मौके पर पहुंच गई और उसे पकड़ लिया था। इस बीच पूछताछ के दौरान उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने पूछताछ के दौरान बताया था कि वो अपनी पूरी टीम के साथ गांधी मैदान में हुंकार रैली को दहलाने के लिए पहुंचा हुआ था।
जब एनआईए ने पकड़े गए आतंकी इम्तियाज से सख्ती की पूछताछ की तो उसने कई नाम बताए, जिसके बाद मास्टर माइंड मोनू सहित दो दर्ज से अधिक आतंकियों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद में बोधग्या ब्लास्ट मामले का खुलासा भी इसी आतंकी के बयान से हुआ था।












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