Munna Shukla Surrender: पूर्व IPS ने खोला मुन्ना शुक्ला का काला चिट्ठा, तिहाड़ जेल में डालने की कर दी मांग
Amitabh Das On Munna Shukla Surrender: बाहुबली राजद नेता मुन्ना शुक्ला को उम्रकैद की सज़ा होने के बाद, गुरुवार को वह गाड़ियों के काफिले के साथ सरेंडर करने पहुंचे। इस दौरान रास्ते में लोगों ने फूल माला पहनाकर गर्मजोशी के साथ विदाई देते नज़र आए।
मुन्ना शुक्ला का हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह कह रहे थे कि साज़िश के तहत फंसाया गया है। मेरी सरकार आएगी तो इसी जगह मिलेंगे। वहीं उसकी एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रही है, जिसमें वह जेल में नर्तकी के साथ हाथ में हथियार लेकर डांस करते नज़र आ रहे हैं।

वन इंडिया हिंदी से इन्हीं सब मुद्दों पर अपनी बयान को लेकर चर्चाओं में रहने वाले पूर्व IPS अमिताभ दास ने बात की, उन्होंने मुन्ना शुक्ला के इतिहास को उजागर करते हुए उसे खूंखार माफिया बताया। अमिताभ दास ने कहा कि यह बहुत ही शर्म की बात है कि ईमानदार लोग दो रोटी के मोहताज हैं।
माफिया को लोग मसीहा बनाने पर तुले हुए हैं। आपको बता दूं कि यह मुन्न शुक्ला वैशाली के लालगंज का रहने वाला है। इसके पिता राम दास शुक्ला की हत्या हो गई थी। यह चार भाई है, छुट्टन शुक्ला, भुटकुन शुक्ला, मुन्ना शुक्ला और मानमर्दन शुक्ला। इसमे से छुट्टन शुक्ला की हत्या हो चुकी है।
हत्या का शक बृज बिहारी प्रसाद पर हुआ था। इसके बाद भुटकुन शुक्ला की भी हत्या हो गई। इस हत्या का शक भी बृज बिहारी प्रसाद पर गया था। मान मर्दन शुक्ला ज़िदा है अभी सियासत करता है। मुन्ना शुक्ला को 3 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट से उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई गई। 15 दिनों के अंदर सरेंडर करने कहा गया था।
18 अक्टूबर को समय सीमा समाप्त हो रही थी, उसने 16 अक्टूबर को समर्पण कर दिया। यह पूरा मामला है, बृज बिहारी प्रसाद हत्याकांड का जो 13 जून 1998 को हुआ था। यह भी एक अपराधिक छवि का नेता था और बिहार सरकार में मंत्री था। घोटाले की वजह से कुर्सी गई और जेल भी जाना पड़ा। बेऊर जेल पटना में था।
बिमारी का बहाना बनाकर बृज बिहारी इंदिरा गांधी आयर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में भर्ती हो गया। वहीं शाम के वक्त टहल रहा था, इसी दौरान गोलियों से उसे भून दिया गया था। हत्या मामले में 8 लोग अभियुक्त बनाए गए थे। इन अभियुक्तों को निचली अदालत ने उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई थी।
पटना हाईकोर्ट ने बरी कर दिया, फिर सुप्रीम कोर्ट ने उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई। यह पूरा मामला यही है। मुन्ना शुक्ला लालगंज से जदयू की टिकट पर विधायक भी रह चुका है। मई में जो लोकसभा चुनाव संपन्न हुए उसमें वैशाली से राजद की टिकट पर चुनाव लड़ा था। अभी भी जो यह सरेंडर किया है तो यह बोलते हुए गया है कि हमारी सरकार बनेगी तो यही से बैठक होगी।
कहते हैं ना रस्सी जल गई लेकिन ऐठन नहीं गई, ऐसा ही हाल मुन्ना शुक्ला है। इसे उम्र कैद तो होना ही चाहिए था। लेकिन बेऊर जेल में रहकर यह फिर लोकतंत्र और कानून व्यवस्था का मज़ाक बना देगा। जिस तरह से लॉरेंस बिश्नोई ने साबरमती जेल को मज़ाक बना दिया है। जेलर पर इसका इतना धाक रहेगा कि जेल में दरबार लगाएगा।
होटल से खाना मंगा के खाएगा, एक समय जेल में था तो बार बालाओं के साथ जेल में ही डांस करता था। इसलिए मेरी मांग है कि मुन्ना शुक्ला को दिल्ली के तिहाड़ जेल भेज दिया जाए। सारी हेकड़ी निकल जाएगी। तिहाड़ जेल तो एशिया का सबसे बड़ा जेल है, वहां किसी की धाक नहीं चलेगी। प्रशासनिक स्तर पर ही कोर्ट से इजाज़त लेकर इसे तिहाड़ भेज दिया जाए। मैं इस मामले में PIL दाखिल करूंगा।












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