PICs: बाढ़ की विनाश लीला से बिहार में त्राहिमाम, सैकड़ों गांव के लाखों लोग बेहाल
इसी का नतीजा है कि किशनगंज के बाढ़ प्रभावित लोगों को देखने आए कांग्रेस के सांसद असरारुल हक कासमी के आश्वासन को सुनते-सुनते पीड़ित बेकाबू हो गए और उन्हें घंटों बंधक बनाकर रखा।
पटना। भयानक और प्रलयकारी बाढ़ के चपेट में फंसे उत्तरी बिहार के सैकड़ों गांव के 73 लाख लोग त्राहिमाम कर रहे हैं। ये त्राहिमाम की स्थिति पिछले कई दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण ज्यादा देखने को मिली है। वहीं नेपाल से आने वाली पानी के कारण सीमांचल के साथ-साथ कई अन्य इलाकों में भी बाढ़ की रफ्तार तेज हो गई है। तो कई जगह बाढ़ से हाहाकार मच गया है। उत्तरी बिहार के सीतामढ़ी मोतिहारी के साथ-साथ अन्य जिले में भी बाढ़ का तांडव दिख रहा है। वहीं सरकार के द्वारा किए जा रहे दावे का उचित मुआवजा नहीं मिलने के कारण बाढ़ पीड़ितों में आक्रोश का माहौल देखने को मिल रहा है। इसी का नतीजा है कि किशनगंज के बाढ़ प्रभावित लोगों को देखने आए कांग्रेस के सांसद असरारुल हक कासमी के आश्वासन को सुनते-सुनते पीड़ित बेकाबू हो गए और उन्हें घंटों बंधक बनाकर रखा।

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जानकारी के मुताबिक 14 जिले के सैकड़ों गांव के लगभग 73 लाख लोग बाढ़ पीड़ित हैं। जिसमें से अब तक सैकड़ों लोगों की मौत हो जाने की बात बताई जा रही है, वहीं दर्जनों लापता हैं। तो इनकी सुरक्षा में मौजूद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सेना के जवान लोगों के राहत कार्य में लगे हुए हैं और अब तक तीन लाख लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया है। सेना की सात टीम और एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की 27 यूनिट पिछले 24 घंटे में सीतामढ़ी पूर्णिया, मधुबनी, दरभंगा, शिवहर, सुपौल के 25 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाते हुए अन्य लोगों की मदद कर रहे हैं। वहीं भयानक बाढ़ की चपेट में फंसे पीड़ितों को खाना देने के लिए एयरफोर्स के 2 हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं। वहीं जानकारी लेते हुए डिजास्टर डिपार्टमेंट के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने बताया कि खगड़िया, गोपालगंज, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सारण बिहटा, छपरा, मोतिहारी, बेतिया में भी पीड़ित लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का काम किया जा रहा है।



कृषि विभाग के द्वारा जानकारी देते हुए बताया गया कि भयानक बाढ़ की चपेट में आने से अब तक उत्तर बिहार में 4.43 लाख हेक्टेयर में क्षेत्र में फसल की क्षति हुई जिसमें 2.23 लाख हेक्टेयर धान की फसल है। लगभग उत्तर बिहार के सभी जिले के नदियों ने भयानक बारिश के कारण जमकर उत्पात मचाया। गंडक, बूढ़ी गंडक, मसान, पंडई, दोहरम, गांगुली, सिकटा, ओरिया, द्वारदह, हड़बोड़ा, बलोर व हरपतबेनी नदी खतरे के निशान से ऊपर बढ़ रही है।


चूड़ा-मूढ़ी खाते हुए रात भर जागने को मजबूर हैं बाढ़ से ग्रसित लोग...
पीड़ित लोग किसी तरह चूड़ा-मूढ़ी खाकर दिन और रात काट रहे हैं। नजारा कटिहार जिले का है जहां प्राणपुर, कदवा, बलरामपुर, आजमनगर, अमदाबाद, हसनगंज डंडखोड़ा, मनसाही, बारसोई व सदर प्रखंड के 15 लाख लोग अभी भी बाढ़ में फंसे हुए है और इन लोगों का संपर्क मुख्यालय से कट चुका है। प्रशासन की तरफ से इन लोगों के लिए अब तक कोई उचित व्यवस्था नहीं की गई है। हालात ऐसे हो गए हैं कि मोबाइल का नेटवर्क भी धवस्त हो गया है। लोग अपने सगे-संबंधियों से संपर्क भी नहीं कर पा रहे हैं।












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