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बिहार: तालाब के नीचे मछली पालन और उसके ऊपर बिजली उत्पादन, जानिए FSP की खासियत

बिहार में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लाने के लिए अब पूरी तरह से ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।

पटना, 18 अप्रैल 2022। बिहार में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लाने के लिए अब पूरी तरह से ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। बड़े पैमाने पर कई जगहों में सोलर प्लांट लगाने की योजना तैयार की जा रही है। बिहार की पर्यटन नगरी राजगीर और बोधगया को ग्रीन एनर्जी से रोशन करने के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है। इन दो शहरों में ट्रैडिशनल तरीक़े से विद्युत संयंत्रों द्वारा बिजली सप्लाई नहीं की जाएगी। प्रदेश में कई बिजली के प्लांट चालू हुए हैं। इसके अलावा हाल ही में सीतामढ़ी में एक पावर ग्रिड का उद्घाटन किया गया। इस क्षेत्र में एक कदम और बढ़ाते हुए सरकार ने दरभंगा में एक अनोखा काम किया है।

नीचे मछली पालन और ऊपर बिजली उत्पादन

नीचे मछली पालन और ऊपर बिजली उत्पादन

राजगीर और बोधगया में सोलर प्लांट से पैदा की गई बिजली आपूर्ति की जायेगी। इस बाबत भारत सरकार के अधीन सोलर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया से 25 वर्षों तक बिजली कंपनी ने करार किया है। वहीं अब बिहार के दरभंगा में एक तालाब के नीचे मछली पालन की जा रही है तो वहीं उसके ऊपर बिजली बनाई जा रही है। इस प्लांट से पैदा की गई बिजली को उपभोक्ताओं को सप्लाई की जाने की भी योजना तैयार की जा रही है। आपको बता दें कि 1.6 मेगावाट बिजली सोलर प्लांट से जेनरेट की जा रही है।

ब्रेडा कंपनी के साथ 25 सालों का करार

ब्रेडा कंपनी के साथ 25 सालों का करार

बिजली विभाग की स्थानीय पावर सब स्टेशन के के जरिए सोलर प्लांट से बनाई गए बिजली उपभोगताओं को सप्लाई की जा रही है। बिजली विभाग ने प्लांट स्थापित करने के लिए चार हजार सोलर पैनल तालाब पर लगाए हैं। ब्रेडा कंपनी से 25 सालों तक प्लांट के रखरखाव सहित अन्य सभी कार्यो के निष्पादन के लिए करार हुआ है। आपको बता दें कि गर्मी के वक्त दरभंगा शहर में 45 मेगावाट बिजली की खपत होती है। वहीं जाड़े के मौसम में बिजली की खपत सिर्फ़ 30 मेगावाट ही होती है।

क्या है फ्लोंटिग सोलर प्लांट ?

क्या है फ्लोंटिग सोलर प्लांट ?

आपने सोलर प्लांट के बारे में सुना होगा लेकिन फ्लोटिंग सोलर प्लांट के बारे में ज़्यादातर लोगों नहीं सुना होगा। आईए जानते हैं कि फ्लोंटिग सोलर प्लांट की क्या खासियत है ? जमीन पर लगाए गए सोलर प्लांट से फ्लोंटिग सोलर प्लांट काफी अलग होता। भूमि-आधारित सोलर प्लांट्स के लिए वाटर बॉडीज की सतह पर फोटोवोल्टिक पैनलों की तैनाती की जाती है, उसे ही फ्लोंटिग सोलर प्लांट कहते हैं। सोलर प्लांट्स लगाने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसमें ग्रिड कनेक्टिविटी, भूमि अधिग्रहण और विनियम का ध्यान रखना होता है। वहीं फ्लोटिंग सोलर प्लांट्स में इन मुश्किलों से निजात पाने में मदद मिलता है । फ्लोटिंग सोलर प्लांट को लगाने से वाटर बॉडीज कूलिंग प्रभाव सही हो जाता है जिसकी वजह से एफएसपी का 10 फ़ीसद तर प्रदर्शन बढ़ जाता है।

राज्य सरकार हो रहा काफ़ी मुनाफा

राज्य सरकार हो रहा काफ़ी मुनाफा

फ्लोटिंग सोलर प्लांट से की वजह से बिजली उत्पादन तो किया जा ही रहा है। साथ ही मछली उत्पादन से भी मुनाफ़ा हो रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक एफएसपी के ज़रिए तीन हजार घरों तक बिजली सप्लाई की जा रही है। वहीं ग्रीन एनर्जी को भी बढ़ावा देते हुए कार्बन डाइऑक्साइड को भई कम किया जा रहा है। इन सबके अलावा तालाब में मछली पालन भी किया जा रहा है और साथ ही पानी की भी बचत हो रही है। एक तीर से कई निशाने लगाकर बिहार सरकार काफी मुनाफा कमा रही है।

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