बिहार में फिर तेज़ हुई जदयू-भाजपा के अलग होने की चर्चा, जानिये क्यों गरमाई सियासत ?
बिहार में सियासी संग्राम शुरू हो जारी है, स्थानीय प्राधिकार कोटे से बिहार विधान परिषद के नवनिर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण के बाद से सियासी पारा चढ़ गया है।
पटना, 14 अप्रैल 2022। बिहार में सियासी संग्राम शुरू हो जारी है, स्थानीय प्राधिकार कोटे से बिहार विधान परिषद के नवनिर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण के बाद से सियासी पारा चढ़ गया है। एक बार फिर से बिहार में भाजपा और जदयू के रास्ते अलग होने की चर्चा को हवा मिल गई है। बिहार में विधान परिषद चुनाव हारे हुए नेताओं का कहना है कि पार्टी के अंदर विश्वासघात हुआ जिसकी वजह से वह हारे हैं। भारतीय जनता पार्टी के नेता और राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं का कहना है कि सहयोगी दल के धोखा देने की वजह से हम लोगों चुनाव में मात मिली है।

भाजपा को अकेले लड़ना चाहिए चुनाव- रजनीश
इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी के नेता रजनीश कुमार ने अपने सहयोगी दल जनता दल यूनाइटेड पर गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के उम्मीदवार की जीत पर नीतीश कुमार ज़िन्दाबाद के नारे लगे। क्या यही एनडीए का गठबंधन है? उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व से अलग होने की मांग की है। सोशल मीडिया के ज़रिए उन्होंने अपनी बातों को रखते हुए कहा कि बिहार में अब गठबंधन की सियासत कामयाब नहीं होने वाली है। बिहार भाजपा को उत्तर प्रदेश की तरह खुद पर यक़ीन करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। बिहार की सियासत में अब बिना गठबंधन के चुनावी रण में उतरने का वक़्त आ चुका है।

भाजपा उम्मीदवार की चुनाव में हार
विधान परिषद चुनाव परिणाम को लेकर बेगूसराय सीट भी सुर्खियों में रहा है। रजनीश कुमार बेगूसराय से विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं। इस बार भी वह भाजपा की टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे थे। सियासी गलियारों में उनकी जीत तय मानी जा रही थी। सियासी गलियारों में चर्चा तेज़ है कि गुटबाजी को हवा देने के चक्कर में रजनीश कुमार ही गुटबाजी के शिकार हो गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि गिरिराज सिंह के बेगूसराय आने के बाद से ही रजनीश कुमार ने गुटबाजी शुरू कर दी थी। जिसके बाद से ही गिरिराज गुट रजनीश सिंह को सबक सिखाने की रणनीति तैयार करने में जुट गया था।

गुटबाज़ी का शिकार हुए रजनीश कुमार
बिहार विधानपरिषद चुनाव में गिरिराज गुट को मौक़ा मिल गया, सभी कार्यकर्ताओं ने विधान परिषद के चुनाव रजनीश सिंह को चुनावी मंक्षदार में अकेले छोड़ दिया। जिसका नतीजा यह हुआ कि यहां से रजनीश सिंह को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। वहीं राजीव कुमार चुनाव जीत गए। इसके अलावा सियासी गलियारों में यह भी चर्चा तेज है कि भाजपा प्रत्याशी का बेगूसराय को लेकर जदयू विधायक संजीव कुमार मदद नहीं कर रहे थे। उन्होंने अपने भाई राजीव सिंह को कांग्रेस से टिकट दिलवाया और जमकर उनके पक्ष में प्रचार किया। इसी का नतीजा है कि भाजपा के रजनीश कुमार की हार हुई और अब रजनीश का राजनीतिक भविष्य दांव पर है।
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