बिहार में कोरोना से मौत पर गाइडलाइंस का नहीं हुआ था पालन, क्या चीन जैसी कठोरता भारत में मुमकिन है ?

बिहार में कोरोना से मौत पर गाइडलाइंस का नहीं हुआ था पालन

पटना। बिहार में कोरोना के एक मरीज ने तबाही फैला दी। उसकी जिंदगी और मौत, दोनों खौफ का शबब है। मुंगेर के इस शख्स ने 11 लोगों को संक्रमित कर दिया। उसके सम्पर्क में आये अधिकतर लोगों की जांच रिपोर्ट अभी नहीं आयी है। ये संख्या अभी बढ़ भी सकती है। उसकी मौत के बाद पटना से लेकर मुंगेर तक भयंकर चूक हुई। उसका शव सामान्य शव की तरह लाया गया और कई घंटे तक घऱ में यूं ही पड़ा रहा। जब कि कोरोना संक्रमित शव को रखने और अंतिम संस्कार के लिए सख्त गाइडलाइंस तय किये गये हैं। लेकिन इस मामले में किसी भी दिशा-निर्देश का पालन नहीं हुआ। अब नतीजा ये है कि हजारों लोग खौफ के साये में जिंदगी गुजार रहे हैं। चीन ने कोरोना पर काबू पाने के लिए अंतिम संस्कार को लेकर कोठर प्रतिबंध लगा दिया था। क्या भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में यह संभव है ?

...बहुत देर कर दी

...बहुत देर कर दी

केन्द्रीय स्वस्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइंस के मुताबिक कोरोना मृतक के शरीर को किसी भी हाल में छूना, गले लगाना या चूमन मना है। परिजन या मित्र अंतिम दर्शन तो कर सकते हैं, लेकिन पास जाने की बिल्कुल इजाजत नहीं है। स्वास्थ्यकर्मियों को एक खास गाउन पहन कर शव को बॉडी बैग में रखना होता है। लेकिन मुंगेर की घटना में एम्स जैसे प्रतिष्ठित अस्पताल ने घोर लापरवाही का परिचय दिया। जांच रिपोर्ट आये बिना उसका शव परिजनों को सौंप दिया गया। 21 मार्च की रात को ही परिजन शव लेकर मुंगेर पहुंच गये थे। रविवार दो पहर तक उसका शव घर में पड़ा रहा। इस दौरान किसी सुरक्षा मानक का पालन नहीं किया गया। घर के लोग और मित्र शव के पास ही जमे रहे। किसी को आइसोलेट नहीं किया गया। जब तक जिला प्रशासन की नींद खुलती तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

चीन में सख्त नियम

चीन में सख्त नियम

कोरोना महामारी सबसे पहले चीन में शुरू हुई थी। लेकिन उसने कठोर पाबंदिया लगा कर इस बीमारी पर एक हद तक काबू पा लिया। आखिर ऐसा क्या हुआ कि कोरोना का कहर चीन में तो रुक गया लेकिन दुनिया भर में जारी है ? चीन में साम्यवादी दल का निरंकुश शासन है। वहां सरकार के फरमान के खिलाफ कोई आवाज नहीं उठा सकता है। वहां धर्म, समुदाय की राजनीति की कोई अहमियत नहीं। सरकार ने जो आदेश जारी कर दिया उसका अनुपालन हर किसी को करना है। कोरोना के मामले में चीन ने बेहद सख्त आदेश का अनुपालन कराया। वहां जब कम्यूनिटी ट्रांसमिशन से कोरोना मौत की संख्या बेतहाशा बढ़ने लगी तो सरकार ने अंतिम संस्कार पर प्रतिबंध लगा दिया। उसने यह जिम्मेवारी अपने हाथ में ले ली। सरकार की देखरेख में मृतकों के शव को जला कर उसका केवल अस्थिकलश रखा जाता था। चीन सरकार का मानना था कि अगर शव को दफनाया गया तो कोरोना वायरस मिट्टी में फैल कर दूसरों को भी संक्रमित कर सकते हैं। इसलिए वहां हर कोरोना मृतक की अंत्येष्टि के लिए शवदाह अनिवार्य कर दिया गया।

अंतिम संस्कार अस्पताल की जिम्मेवारी

अंतिम संस्कार अस्पताल की जिम्मेवारी

चीन में जिन लोगों की मौत कोरोना से हुई उनके परिजन पहले से ही क्वारेंटाइन में थे। उनको घर से निकलने की इजाजत नहीं थी। अस्पताल से शव को निकट के शवदाहगृह में लाया जाता था। शव लाने की प्रक्रिया भी बहुत एहतियात वाली थी। जैसे ही किसी मरीज की मौत होती थी अस्पताल शव को असंक्रमित करने की प्रक्रिया शुरू कर देते थे। शव को एक विशेष सीलबंद बॉडी बैग में रख दिया जाता था। इसके बाद शव को जलाने के लिए निकट के शवदाह गृह में लाया जाता था। किसी शव को शवदाह गृह लाने के लिए भी सतर्कता बरती जाती थी। कर्मचारियों को एक विशेष सूट पहनना होता था। चीन में शव को जलाने के बाद परिजनों को केवल अस्थिकलश दिया जाता था। यह अस्थिकलश भी वे चौदह दिनों के बाद ही ले पाते थे।

भारत में कोरोना मृतक का अंतिम संस्कार

भारत में कोरोना मृतक का अंतिम संस्कार

दिल्ली में 14 मार्च को कोरना संक्रमित एक महिला की मौत हो गयी थी। जब उस महिला को दाह संस्कार के लिए निगमबोध घाट पर लाया गया तो शवदाह गृह के कर्मचारियों ने अंत्येष्टि की इजाजत नहीं दी थी। काफी हिल हुज्जत के बाद उस महिला का अंतिम संस्कर हो पाया था। इस विवाद के बाद स्वास्थ्य विभाग ने यह स्पष्ट किया था कि अंतिम संस्कार से कोरोना वायरस नहीं फैलता है। इसके बाद केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक दिशानिर्देश जारी कोरोना मृतक के शव को रखने, ले जाने और अंतिम संस्कार के संबंध में कुछ मानक तय किये। इसके मुताबिक किसी अंतिम संस्कार में शव को छूने या गले लगाने को छोड़ कर अन्य सामान्य धार्मिक प्रक्रिया की इजाजत है। श्मशान या कबिस्तान में भीड़ अधिक न हो इस लिए अधिकतम 20 लोगों के जमा होने की इजाजत है। एक महीना पहले तेलंगाना में एक कोरोना पोजिटिव की मौत हो गयी थी। इस बीमारी का ऐसा खौफ था कि उस व्यक्ति के अंतिम संस्कार में परिवार का कोई सदस्य शामिल नहीं हुआ। अंत में स्वास्थ्यकर्मियों को ही शव दफनाना पड़ा। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में क्या चीन जैसी कठोरता मुमकिन है ?

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