Bihar News: गोपनीय कंप्यूटर, गुम होती फाइलें और 9 कर्मी कटघरे में, बिहार की सबसे चौंकाने वाली साइबर साजिश!

Bihar News: बिहार विधान परिषद की गोपनीय शाखा से जुड़े संवेदनशील कंप्यूटर डेटा और अहम फाइलों को मिटाने या चोरी करने के सनसनीखेज मामले की जांच अब एक विशेष जांच दल (SIT) करेगी। आर्थिक अपराध इकाई (Economic Offences Unit - EOU) ने इस गंभीर मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए SIT का गठन कर दिया है।

SIT का गठन और नेतृत्व
EOU द्वारा गठित इस आठ सदस्यीय SIT का नेतृत्व एसपी (साइबर, प्रशिक्षण, पोर्टल एवं समन्वय) डी. अमरकेश करेंगे। EOU ने स्पष्ट किया है कि इस विशेष जांच टीम का गठन मामले की त्वरित, निष्पक्ष और गहन जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है।

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SIT के कार्यक्षेत्र
आरोपियों के खिलाफ सबूत जुटाना

डिजिटल साक्ष्य का विश्लेषण और सत्यापन

घटना से जुड़े सभी कर्मियों की भूमिका का परीक्षण

नामजद कर्मियों को अभियुक्त बनाने की प्रक्रिया तेज करना

निगरानी की जिम्मेदारी
SIT के कार्यों की नियमित निगरानी की जिम्मेदारी ईओयू के डीआईजी (साइबर) संजय कुमार को सौंपी गई है। DIG स्तर के अधिकारी की निगरानी से उम्मीद है कि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होगी।

प्राथमिकी और आरोपित
इस मामले में बिहार विधान परिषद के उप सचिव के आवेदन के आधार पर 9 जून 2025 को आर्थिक अपराध इकाई में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। प्रारंभिक जांच में गोपनीय शाखा के नौ कर्मियों की भूमिका सामने आई है, जिन पर प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने के बाद आरोप तय किए गए हैं।

क्यों है मामला गंभीर?
बिहार विधान परिषद की गोपनीय शाखा में मौजूद कंप्यूटरों से महत्वपूर्ण विधान, प्रशासनिक और बजट से जुड़े डेटा का डिलीशन या एक्सेस एक संवैधानिक संस्थान की साइबर सुरक्षा पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यह मामला सिर्फ आंतरिक लापरवाही नहीं, बल्कि संभवतः एक संगठित साइबर क्राइम या डेटा ब्रीच भी हो सकता है।

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