Bihar Politics: 'कन्हैया' को CWC में शामिल करने पर छिड़ी ज़ुबानी जंग, कांग्रेस का BJP पर पलटवार

CWC Member News: लोकसभा चुनाव को लेकर बिहार में सियासी बाज़ार सज चुका है। राष्ट्रीय पार्टियों से लेकर क्षेत्रीय दलों ने सियासी ज़मीन मज़बूत करने की कवायद तेज़ कर दी है। इसी क्रम में कांग्रेस ने वर्किंग कमिटी में बिहार से मीरा कुमार, तारिक अनवर और कन्हैया कुमार को शामिल किया गया है। ग़ौरतलब है कि हाल ही में कन्हैया कुमार को NSUI के राष्ट्रीय प्रभारी की ज़िम्मेदारी दी गई थी।

कांग्रेस की नई वर्किंग कमिटी में कन्हैया कुमार को जगह मिलने पर भाजपा नेताओं ने निशाना साधा है। भाजपा प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी तुष्टीकरण की सियासत से ऊपर नहीं उठ सकती है। नई वर्किंग कमिटी में कन्हैया कुमार को शामिल कर कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि पार्टी तुष्टीकरण से ऊपर नहीं उठ सकती है। कन्हैया कुमार पर देश विरोधी नारे लगाने के आरोप है, देशद्रोह का मुकदमा दर्ज है। ऐसे लोगों को कांग्रेस बढ़ावा दे रही है।

CWC member kanhaiya kumar

भाजपा नेता के बयान पर प्रदेश कांग्रेस असित नाथ तिवारी ने पलटवार किया है। बिहार में पिछले 30 सालों से जंगल राज कहकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश की छवि ख़राब करने की कोशिश की जा रही है। भाजपा बिहार और अमित शाह के ख़िलाफ़ ही अभियान चला रही है। हिंदुस्तान के गृह मंत्री अमित शाह ही हैं।

बिहारी नेता (कन्हैया कुमार) नेशनल लेवल पर आगे आ रहा है तो भाजपा उनके ख़िलाफ़ अफवाह और बेतुकी बयानबाज़ी कर रही है। अमित शाह के अधीन ही दिल्ली पुलिस है, दिल्ली पुलिस ने ही कोर्ट में कहा था कि कन्हैया की रैली में इस तरह का कोई नारा नहीं लगा था। अब भाजपा नेता ही अमित शाह के विभाग को झुठला रहे हैं।

बिहार के सियासी गलियारों की बात की जाए तो कन्हैया कुमार की लोकप्रियता काफी ज़्यादा है। हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में कन्हैया कुमार अपनी लोकप्रियता को वोट में कैश नहीं करवा पाए। उन्हें 2 लाख 69 हज़ार 976 वोट मिले थे। वहीं गिरिराज सिंह को 6 लाख 92 हज़ार 193 वोट मिले थे। उस दौरान कन्हैया कुमार ने CPI की टिकट पर चुनावी दांव खेला था।

गिरिराज सिंह ने भारतीय जनता पार्टी की टिकट पर जीत दर्ज की थी। गिरिराज सिंह ने कन्हैया को लगभग 4 लाख वोटों से पराजित किया था। वहीं सियासी समीकरण बदलने के बाद कन्हैया ने CPI का दामन छोड़ सितंबर 2021 में कांग्रेस का हाथ थाम लिया।

कांग्रेस में शामिल होने के बाद दिन पर दिन पार्टी में कन्हैया का क़द बढ़ता ही जा रहा है। NSUI के राष्ट्रीय प्रभारी की ज़िम्मेदारी के बाद अब नई वर्किग कमिटि में भी जगह मिली है। राहुल की भारत जोड़ो यात्रा में कन्हैया कुमार भी राहुल के साथ-साथ क़दम से क़दम मिलाकर चल रहे थे। सियासी जानकारों की मानें तो कांग्रेस कन्हैया के ज़रिए बिहार में राजद पर दवाब बनाना चाहती है। क्योंकि कन्हैया कुमार लोगों के बीच तेजस्वी से ज्यादा लोकप्रिय हैं।

कांग्रसे के साथ अगर राजद सियासी दांवपेच खेलती है तो कांग्रेस कन्हैया के ज़रिए बिहार में राजद को कड़ी टक्कर दे सकती हैं। कही ऐसा ना हो कि कन्हैया कुमार बिहार में तेजस्वी के विकल्प के तौर पर खड़े हो जाएं। बिहार में सियासी समीकरण की बाद की जाए तो कन्हैया के हार का ज्यादा मार्जिन इस वजह से भी था क्योंकि राजद ने अपना उम्मीदवार भी खड़ा कर दिया था।

राजद की टिकट पर तनवीर हसन ने चुनावी ताल ठोकी थी, देश भर में भाजपा की लहर थी। कन्हैया को अगर राजद का साथ मिला होता तो नतीजे कुछ और हो सकते थे। गठबंधन की वजह से ही बिहार की सियासत से कन्हैया को दूर रखा जा रहा है। सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि 2024 लोकसभा चुनाव में कन्हैया दांव नहीं आज़माएंगे, उन्हें राज्यसभा सांसद बनाया जा सकता है।

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