Crocodile In Bihar: 'आदमखोर बाघ' के बाद अब मगरमच्छ से लोगों को खतरा , दहशत में ग्रामीण

Crocodile In Bihar: 'आदमखोर बाघ' तो मारा गया लेकिन अब बिहार के भागलपुर जिले में ग्रामीण मगमच्छ की वजह से दहशत में हैं। कोसी और गंगा नदियों में मगरमच्छ लगातार देखा जा रहा है लेकिन काबू नहीं हो पाया है।

Crocodile In Bihar: प्रदेश में आदमखोर बाघ के मारे जाने से लोगों में खुशी की लहर है। वहीं दूसरी तरफ लोगों को मगरमच्छ का खतरा सता रहा है। बिहार के कई जिलों में मगरमच्छ देखे जाने से ग्रामीणों में दहशत है। बेतिया जिले के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के तराई इलाके में लोग आदमखोर बाघ की वजह से दहशत में जिंदगी गुज़ार रहे हे थे। काफी दिनों से टीम मशक्कत कर रही थी, शनिवार को बिहार के वेस्ट चंपारण में आदमखोर को मार दिया गया। आदमखोर बाघ को पहले तो काबू करने के लिए ग्रामीण इलाकों से लेकर जंगलों तक वनकर्मियों की फौज तैनात की गई थी। लेकिन बाघ इंसान को शिकार बनाता चला जा रहा था। इसलिए उसे देखते ही गोली मार देने का आदेश जारी किया गया। शनिवार को टीम ने बाघ को मार गिराने में कामयाबी हासिल कर ली।

6 महीने में 8 लोगों को बना चुका था शिकार

6 महीने में 8 लोगों को बना चुका था शिकार

आपको बता दें कि बाघ को बाघ को रेस्क्यू करने के लिए 24 घंटे शिफ्टों में टीम काम कर रही थी। गश्ती दल के इलाकों में निगरानी करने 'आदमखोर बाघ' को काबू करने के लिए सुराग ढूंढ रही थी। ग्रामीणों को वन क्षेत्रों में जाने से मना कर दिया गया था। बाघ को पकड़ने की लगातार कोशिश करते हुए कई वनकर्मियों की तबियत बिगड़ गई थी। ग़ौरतलब है कि पिछले 6 महीने में आदमखोर बाघ ने 8 लोगों को शिकार बना लिया था। बाघ का आतंक बढ़ता ही जा रहा था, इसलिए उसे देखते ही गोली मारने का आदेश जारी किया गया। पहले बाघ को रेस्क्यू कर छोड़ने की योजना तैयार की गई थी।

'आदमखोर बाघ' के बाद मगरमच्छ से दहशत

'आदमखोर बाघ' के बाद मगरमच्छ से दहशत

'आदमखोर बाघ' तो मारा गया लेकिन अब बिहार के भागलपुर जिले में ग्रामीण मगमच्छ की वजह से दहशत में हैं। कोसी और गंगा नदियों में मगरमच्छ लगातार देखा जा रहा है लेकिन काबू नहीं हो पाया है। स्थानीय लोग डर की वजह से नदी में उतरने से भी कतरा रहे हैं। भागलपुर जिले के कहलगांव के बटेश्वर स्थान गंगा नदी में मगरमच्छ आए दिन दिख रहा है। हाल ही में आठगांवा पन्नूचक पुरानी के घोघा नदी के पास मगरमच्छ ने शिकार के मकसद से एक इंसान को दौड़ा दिया। वह किसी तरह से जान बचाकर भागा। गांव में जाकर युवक ने आपबीती सुनाई। ग्रामीणों ने वन विभाग की टीम को मामले की जानकारी दी गई। सूचना पाकर मौक़े पर पहुंची वन विभाग की टीम ने मगरमच्छ की तलाश शुरू की लेकिन कहीं नहीं मिला।

वन विभाग की टीम को नहीं मिला मगरमच्छ

वन विभाग की टीम को नहीं मिला मगरमच्छ

ब्रजकिशोर सिंह (वन रेंज अधिकारी,कहलगांव, भागलपुर) के नेतृत्व में वन विभाग की टीम गांव पहुंची। इसके साथ ही आठगांवा पन्नूचक पुरानी में मगरमच्छ की खोजबीन शुरू की, सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे अभियान चलाया गया। 6 घंटों के दौरान घोघा नदी और अन्य जगहों मगरमच्छ को पर खोजा गया लेकिन वह कहीं भी नहीं दिखा। शाम चार बजे तक अभियान चलाने के बाद भी जब मगरमच्छ नज़र नहीं आया तो वन विभाग की टीम को बेरंग लौटना पड़ गया।

बटेश्वर स्थान से लेकर घोघा तक मगरमच्छ का विचरण

बटेश्वर स्थान से लेकर घोघा तक मगरमच्छ का विचरण

ब्रजकिशोर सिंह (वन रेंज अधिकारी) ने कहा कि मगरमच्छ पानी में रहने वाला जीव है। वह एक जगह नहीं रह सकता है, उसकी फितरत में जगह बदलते शुमार है। भीड़ को देखकर मगरमच्छ यहां से चला गया होगा। वहीं ग्रामीण मगरमच्छ के नहीं पकड़े जाने से दहशत में हैं। हाल ही में बटेश्वर स्थान के पास दो बड़े मगरमच्छ दिखे थे। लोगों ने जैसे ही मगरमच्छ को देखा तो ढेला मारने लगे जिसके बाद वह नदी में उतर गए। ग्रामीणों का कहना है कि यह वही मगरमच्छ हो सकता है जो पहले बटेश्वर स्थान पर दिखा था। बटेश्वर स्थान से लेकर घोघा तक मगरमच्छ विचरण कर रहा है।

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