22 साल पहले हुई थी युवक की हत्या, अब मिली हत्यारोपी को सज़ा, लोगों ने कहा- इंसाफ़ के नाम पर मज़ाक

Buxar News In Hindi: 22 साल बाद हत्यारोपी को सज़ा मिलने पर लोगों ने ‘कानून व्यवस्था’ पर सवाल उठाये हैं। लोगों का कहना है कि इंसाफ मिलने के नाम पर मज़ाक किया जाता है।

Crime News 22 years ago guy murdered, Now Killer Has Been Punished

Bihar News Update In Hindi: बिहार के बक्सर ज़िले से हत्यारोपियों को 22 साल बाद सज़ा मिली है। कोर्ट के फ़ैसले पर लोगों ने खुशी कम नाराज़गी ज्यादा ज़ाहिर की है। आम अदमी का कहना है कि प्रदेश में अपराधियों के हौसले दिन पर दिन बुलंद हो रहे हैं।

अपराधियों के हौसले बुलंद इस वजह से हैं कि वह अपराध करते भी हैं तो साबित होते-होते उनकी आधे से ज्यादा ज़िंदगी मज़े में कट जाती है। बाकी जब वह किसी काम के नहीं होते तो जेल के सलाखों के पीछे मुफ्त की रोटी तोड़ते रहते हैं।

कानून व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि वारदात की जांच की जाए और आरोप सिद्ध हो तो तुरंत कार्रवाई की जाए। बिहार में तो अपराध करने वाले बेखोफ़ होकर घूमते हैं, क्योंकि उन्हें पता है, दोषी पाए जाने तक वह अपने जीवन का सारा सुख भोग चुके होंगे।

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    बक्सर जिले में हुई हत्या के मामले में 22 साल बाद फैसला आने पर लोगों ने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस गम को भुलाकर पीड़ित परिवार अपनी ज़िंदगी खुशहाल तरीक़े से गुज़ारने लगा था। अब कोर्ट के फ़ैसले के बाद उनका जख्म फिर से हरा हो गया।

    22 साल बाद पीड़ित परिवार को इंसाफ मिलना एक मज़ाक है। इस तरह का इंसाफ मिले नहीं मिले बराबर है। जब हत्या हुई थी उसके 3 महीने के अंदर ही इंसाफ मिले तो इंसाफ कहेंगे। यहां तो लोग मर जाते हैं तब जाकर उन्हें दोषी करार पाया जाता है।

    बक्सर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश 4 बिजेंद्र कुमार ने बुधवार को दोनों पक्षों के गवाह और पुलिस की दलील सुनने के बाद हत्या मामले में अभियुक्तों को दोषी पाया। 90-90 हजार का जुर्माना लगाते हुए चार अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है।

    18 जून 2021 को चरित्रवन (बक्सर नगर थाना क्षेत्र) रघुवंश पांडेय लापता हो गया था। एक सप्ताह बाद नहर (सुमेश्रवरस्थान) के पास शव बरामद हुआ था। इस मामले में सुनवाई करते हुए महेंद्र पाठक, जितेंद्र पाठक, प्रकाश चन्द्र तिवारी और दशरथ चौधरी को दोषी करार देते हुए सज़ा सुनाई गई।

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