Nitish Kumar Viral Video: 'चुपचाप बैठिए, हम 2002 हैं', नीतीश बाबू ने फिर कर दी 'गलती से मिस्टेक'
Nitish Kumar Viral Video: बिहार विधानसभा में एक बार फिर 'नीतीश कुमार वाला अंदाज' देखने को मिला है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है। दफादार और चौकीदारों पर हुए लाठीचार्ज के मुद्दे पर जब विपक्ष ने सदन में शोर मचाया, तो मुख्यमंत्री का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
उन्होंने न सिर्फ विपक्ष को उनकी 'संख्या' याद दिलाई, बल्कि इशारों-इशारों में पुराने रिश्तों पर ऐसी चोट की कि पूरा सदन सन्न रह गया। नीतीश बाबू का यह 'रौद्र रूप' और 2002 (202) विधायकों वाला गणित अब चर्चा का विषय बन गया है।

'2002' बनाम '202': नंबर का वो कन्फ्यूजन!
सदन में जब मुख्यमंत्री ने दहाड़ते हुए कहा, "अब हम 2002 हैं," तो एक पल के लिए विपक्षी विधायक भी दंग रह गए। असल में, 2025 के चुनाव नतीजों के बाद एनडीए का आंकड़ा 202 के पार है, लेकिन नीतीश बाबू की ज़ुबान ने उन्हें 24 साल पीछे '2002' में पहुंचा दिया। सोशल मीडिया पर लोग मज़े लेते हुए कह रहे हैं कि शायद मुख्यमंत्री जी को अपना पुराना दौर याद आ गया या फिर उनके लिए नंबर्स अब महज़ एक आंकड़ा बनकर रह गए हैं।
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"चुपचाप बैठिए...": जब सीएम का खो गया आपा
विपक्ष के शोर-शराबे और दफादार-चौकीदार लाठीचार्ज के सवालों ने नीतीश कुमार के धैर्य की परीक्षा ले ली। जब विपक्षी सदस्य वेल में आकर नारेबाजी करने लगे, तो सीएम अपनी सीट से खड़े हो गए और तल्ख अंदाज़ में बोले, "चुपचाप बैठ जाइए, आप लोग कभी कोई काम किए हैं क्या?" उनका यह 'एंग्री यंग मैन' वाला अवतार वीडियो में साफ दिख रहा है, जहाँ वह विपक्ष को उनकी कम होती संख्या का आइना दिखा रहे थे।
विजय चौधरी की वो 'शांति दूत' वाली भूमिका
वायरल वीडियो में एक और दिलचस्प पहलू संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी का है। जब नीतीश कुमार गुस्से में लगातार बोले जा रहे थे और बार-बार फंबल कर रहे थे, तब विजय चौधरी बड़े ही प्यार से उनका हाथ पकड़कर उन्हें बिठाने की कोशिश कर रहे थे। मंत्री जी का चेहरा ऐसा लग रहा था मानो कह रहे हों, "हुजूर, अब बस कीजिए, वायरल होने भर का मसाला मिल चुका है।" यह दृश्य राजनीति के शौकीनों के लिए किसी कॉमेडी सर्कस से कम नहीं था।
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फंबल और राजनीति: जब ज़ुबान बन गई मुद्दा
नीतीश कुमार के लिए फंबल करना अब कोई नई बात नहीं रही है। कभी वह मुख्यमंत्री को 'प्रधानमंत्री' कह देते हैं, तो कभी अपने ही सहयोगियों का नाम भूल जाते हैं। लेकिन इस बार '2002' वाले फंबल ने विपक्ष को एक नया हथियार दे दिया है। आरजेडी और कांग्रेस के नेता चुटकी ले रहे हैं कि मुख्यमंत्री जी अब न केवल भविष्य बल्कि वर्तमान के गणित में भी 'कन्फ्यूज' रहने लगे हैं। अब यह फंबल चुनाव में कितना भारी पड़ेगा, यह तो वक्त ही बताएगा।












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