Bihar Chunav 2025: बिहार चुनाव के परिणाम पर टिकी UP की सियासत!, बिहार मॉडल से BJP बनाएगी 2027 चुनाव की रणनीति
Bihar Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों पर सिर्फ बिहार की नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की सियासत की भी निगाहें टिकी हैं। यूपी के भाजपा नेता इस बार बिहार के चुनाव परिणामों को लेकर बेहद उत्सुक हैं, क्योंकि इन नतीजों से ही पार्टी की 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति तय होगी।
भाजपा ने बिहार में टिकट बंटवारे से लेकर जातीय समीकरण तक हर स्तर पर सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है। पार्टी का मानना है कि बिहार में आजमाया गया यह "सामाजिक फार्मूला" यूपी में भी कारगर साबित हो सकता है।

एनडीए का सामाजिक समीकरण मॉडल
बिहार में एनडीए के तहत भाजपा ने अपने हिस्से की सीटों में पिछड़ा वर्ग के 6 यादव समेत कुल 24 उम्मीदवारों को टिकट दिया है, जबकि अति पिछड़ा वर्ग के 16 प्रत्याशी मैदान में हैं। सवर्ण समुदाय से राजपूत, भूमिहार और कायस्थ समाज के 49 उम्मीदवार उतारे गए हैं। अनुसूचित जाति में पार्टी ने पासवान समाज को प्राथमिकता दी है।
वहीं, जदयू ने अपने हिस्से की सीटों में पिछड़ा वर्ग के 37 और अति पिछड़ा वर्ग के 22 प्रत्याशियों को मौका दिया है। इनमें 8 यादव उम्मीदवार शामिल हैं। इससे संकेत मिलता है कि यूपी में भी एनडीए, पीडीए गठबंधन की चुनौती का सामना इसी सामाजिक समीकरण के ज़रिये करेगा।
यूपी में "बिहार मॉडल" का असर
भाजपा नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि बिहार के जातीय संतुलन वाले फॉर्मूले को यूपी में भी लागू किया जाएगा। लखनऊ से दिल्ली तक इस पर मंथन जारी है। पार्टी के संगठन से जुड़े रणनीतिकार पहले ही पिछड़े, दलित और अति पिछड़े वर्ग को केंद्र में रखकर कई अभियान चला रहे हैं। यह रणनीति न केवल विधानसभा बल्कि पंचायत चुनावों में भी परखी जाएगी। सफल होने पर यही फार्मूला 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में लागू किया जाएगा।
लोकसभावार क्लस्टर से होगी मॉनिटरिंग
बिहार में एनडीए ने लोकसभा क्षेत्रों के हिसाब से "क्लस्टर" बनाकर माइक्रो लेवल पर रणनीति तैयार की है। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता और मौजूदा विधायकों के फीडबैक के आधार पर चुनावी समीक्षा की जा रही है। अगर यह मॉडल बिहार में सफल रहता है, तो भाजपा इसे यूपी में भी दोहराएगी। यानी बिहार के नतीजे केवल एक राज्य की सरकार नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति का रोडमैप भी तय कर सकते हैं।












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