बिहार में बीजेपी की उम्मीदों के दीये ना बुझा दें चिराग! राजद से गठबंधन को लेकर दिए बड़े संकेत

पटना, 29 अगस्त: बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गुलाटी मारने के बाद से यह अटकलें लग रही हैं कि देर-सबेर बीजेपी खुलकर चिराग पासवान को अपने साथ जोड़ सकेगी। क्योंकि, जेडीयू ने बीजेपी के साथ नाता तोड़ने के दौरान जो आरोप लगाए हैं, उनमें यह भी है कि बीजेपी ने चिराग का इस्तेमाल करके बिहार चुनावों में जेडीयू की सीटें घटाने का काम किया था। गौरतलब है कि चिराग पासवान ने खुद को सीएम नीतीश कुमार के कट्टर आलोचक के रूप में पेश किया है। उनके खिलाफ अब बीजेपी के नेता जिस तरह के बयान दे रहे हैं, चिराग ने वैसा 2020 के चुनावों से पहले ही शुरू कर दिया था। लेकिन, चिराग अब इतनी आसानी से अपने पिता की पार्टी में हुई टूट को भुलाने के लिए तैयार नहीं हैं। वह अब जो संकेत दे रहे हैं, उससे साफ है कि उनके लिए गठबंधन के दरवाजे खुले हैं, लेकिन वह उसी के साथ जाएंगे, जिसमें उन्हें उनकी पार्टी का फायदा दिखेगा।

चाचा वाले गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेंगे चिराग

चाचा वाले गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेंगे चिराग

लोक जनशक्ति पार्टी के पूर्व अध्यक्ष चिराग पासवान ने सोमवार को दावा किया है कि वह ऐसे किसी भी राजनीतिक गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेंगे, जिसमें उनके चाचा पशुपति कुमार पारस शामिल रहेंगे। पूर्व केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के निधन के बाद उनके भाई पशुपति कुमार पारस ने अपने भतीजे से बगावत कर दी थी और अभी वे केंद्र में मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। चिराग पासवान ने अपनी शर्त को लेकर यह बातें इन अटकलों के बीच की हैं, जब उनके बारे में कहा जा रहा है कि एनडीए से अपने राजनीतिक विरोधी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाहर होने के बाद वे वापस एनडीए में शामिल हो सकते हैं।

बिहार में गठबंधन की मर्यादा खत्म- चिराग

बिहार में गठबंधन की मर्यादा खत्म- चिराग

चिराग पासवान बिहार में अपने पिता की राजनीतिक विरासत को कायम रखने की लड़ाई लड़ रहे हैं। भाजपा से दूरी आने के बाद वह तेजस्वी यादव की पार्टी राजद के साथ गठबंधन की संभावनाओं से इनकार नहीं कर रहे थे। लेकिन, अब आरजेडी का नीतीश कुमार के जेडीयू के साथ गठबंधन हो गया है और दोनों ने मिलकर सरकार बना ली है। इसपर उन्होंने कहा कि बिहार में गठबंधन की मर्यादा खत्म हो चुकी है। चुनाव से पहले आप किसी एक पार्टी के साथ गठबंधन कर सकते हैं और चुनावों के बाद किसी दूसरे के साथ हाथ मिला सकते हैं।

चाचा वाले गठबंधन का हिस्सा नहीं बनूंगा- चिराग

चाचा वाले गठबंधन का हिस्सा नहीं बनूंगा- चिराग

न्यूज एजेंसी पीटीआई को फोन पर दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने साफ कहा है, 'एक बात स्पष्ट है कि मैं कभी ऐसे किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं बन सकता, जिसमें हमारे चाचा होंगे।' दरअसल, नीतीश के एनडीए का साथ छोड़कर चले जाने के बाद मीडिया के एक वर्ग में इस तरह की चर्चाएं चल रही हैं कि भाजपा की कोशिश हो सकती है कि अब वह चिराग पासवान को फिर से अपने साथ लाने की कोशिश करे। नीतीश कुमार के खिलाफ चिराग पासवान के तेवर ने एक वक्त भाजपा नेतृत्व को काफी असहज कर दिया था। 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों में चिराग ने खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बहुत बड़े समर्थक के रूप में पेश किया था, लेकिन नीतीश कुमार के खिलाफ अभियान चलाने में कोई कमी नहीं छोड़ी थी। उन्होंने भाजपा को अपने दम पर सरकार बनाने में मदद करने का भी दावा किया था।

मोदी सरकार में शामिल हैं चिराग के चाचा पारस

मोदी सरकार में शामिल हैं चिराग के चाचा पारस

हालांकि, बाद में उनके चाचा पारस ने एलजेपी के अधिकतर सांसदों के साथ पार्टी तोड़ दी थी और बीजेपी सरकार में शामिल हो गए थे। इससे ऐसा लगा कि भाजपा ने चिराग को अकेला छोड़ दिया है। लेकिन, बीजेपी ने राम विलास पासवान के बेटे और बिहार के जमुई से सांसद को भी संदेश देना जारी रखा और उन्हें राष्ट्रपति चुनाव के दौरान एनडीए की बैठक में शामिल होने के लिए भी बुलावा भेजा था। चिराग पासवान की पार्टी को अब लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के रूप में पहचान मिली है।

राजद से गठबंधन को लेकर दिए बड़े संकेत

राजद से गठबंधन को लेकर दिए बड़े संकेत

जब चिराग पासवान से साफ पूछा गया कि अब जब राजद का नीतीश कुमार के साथ तालमेल हो गया है तो क्या अभी भी उनके दिल में आरजेडी के लिए पहले जैसा सॉफ्ट कॉर्नर बचा हुआ है। इसपर चिराग ने जवाब दिया है, 'बिहार में गठबंधन ने अपनी मर्यादा खो दी है। चुनाव से पहले आप किसी एक पार्टी के साथ गठबंधन कर सकते हैं और चुनावों के बाद किसी दूसरे के साथ हाथ मिला सकते हैं। सभी राजनीतिक पार्टी अपने हित में फैसले कर रही हैं। मैं भी अपनी पार्टी के लिए ऐसा ही करना चाहूंगा।' उन्होंने यह भी कहा, 'जहां तक महागठबंधन में नीतीश कुमार की मौजूदगी की बात है तो कोई नहीं कह सकता है कि जब राज्य में अगले चुनाव होने लगेंगे तो कितने दल इस विशाल गठबंधन में बने रहेंगे।'

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