मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार का बिहार से रहा है ख़ास ताल्लुक, जानिए उनके बारे में अहम बातें
Rajiv Kumar Life History: देशभर में चुनावी चर्चा शुरू हो गई, राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी है। इसी क्रम में आज हम आपको मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार के बारे में बताने जा रहे हैं, जो कि तीन प्रदेशों में होने वाले विधानसभा चुनाव, राज्यसभा चुनाव (राजस्थान) और लाकसभा चुनाव 2024 में अहम भूमिका निभाएंगे। IAS सर्विस का उनके पास 36 साल का तजुर्बा है। वह फरवरी 2020 में IAS की सेवा से रियार हुए।
IAS की सेवा से रिटायर होने के 2 महीने बाद ही अप्रैल 2020 में उन्हें अध्यक्ष लोक उद्यम चयन बोर्ड (PESB) की ज़िम्मेदारी मिली। 6 महीने तक PESB में ज़िम्मेदारी निभाने के बाद सितंबर 2020 में भारत निर्वाचन आयोग में बतौर इलेक्शन कमिश्नर पारी की शुरुआत की। साल 2022 में उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त की ज़िम्मेदारी संभाली।

आपको बता दें कि राजीव कुमार के नेतृत्व में ही प्रेसिडेंट और वाइस प्रेसिडेंट का चुनाव हुआ है। लोकसभा चुनाव 2024, के साथ ही मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा चुनाव के साथ राज्यसभा चुनाव भी इनके कार्यकाल में होना है। आपको बता दें कि फरवरी 2025 तक राजीव कुमार मुख्य निर्वाचन आयुक्त की भूमिका निभाते रहेंगे।
बिहार कैडर के 1984 बैच के आईएएस अधिकारी राजीव कुमार का जन्म 19 फरवरी 1960 को हुआ था। बिहार से जब झारखंड अलग हुआ तो उन्होंने झारखंड कैडर में शामिल होना पसंद किया। उनके तालीम की बात की जाए तो बीएससी के बाद उन्होंने एलएलबी PGDM और पब्लिक पॉलिसी में मास्टर डिग्री हासिल की।
राजीव कुमार की छवि एक सुलझे हुए और सादगी पसंद अधिकारियों में की है। उन्होंने केंद्र में कई अहम ज़िम्मेदारियों को बखूबी निभाया है। बतौर फाइनेंस सेक्रेट्री उन्होंने काला धन पर लगाने की ओर कई सराहनीय क़दम उठाए। बिहार में उन्होंने प्राथमिक शिक्षा उद्योग विभाग के डायरेक्टर की भी ज़िम्मेदारी उठाई है। विभिन्न जिलों में कलेक्टर की ज़िम्मेदारी निभाने के दौरान लोगों में उनकी लोकप्रियता काफी रही है।
राज्य और केंद्र सरकार में उन्होंने कई मंत्रालयों में भी अपनी सेवाएं दी हैं। आपको बता दें कि जब वह केंद्र सरकार में बतौर वित्त सचिव और डिपार्मेंट ऑफ़ फ़ाइनेंशियल सर्विसेज के सचिव थे, तो उन्होंने बैंकिंग बीमा और पेंशन रिफॉर्म में अहम किरदार निभायाथा।
'काला धन' पर लगाम लगाने की मकसद से उन्होंने हज़ारो शेल कंपनियों के बैंक खातों को फ़्रीज़ करवा दिया था। वह आर्थिक खुफिया परिषद के मेंबर के साथ वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद के मेंबर भी रह चुके हैं। वहीं बैंक बोर्ड ब्यूरो के मेंबरे और फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर रेगुलेटरी अप्वाइंटमेंट्स सर्च कमेटी मेंबर की भी ज़िम्मेदारी निभा चुके हैं। इसके अलावा वित्त सचिव (वित्त विभाग, भारत सरकार), भारतीय रिज़र्व बैंक, SBI और नाबार्ड में सेंट्रल बोर्ड डायरेक्टर की भी ज़िम्मेदारी निभाई है।
2001 से 2007 तक राजीव कुमार केंद्र सरकार के जनजाति मामलों के मंत्रालय में बतौर डायरेक्टर और जॉइंट सेक्रेटरी भी रहे हैं। 2015 से 2017 तक केंद्र के कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय में एस्टेब्लिशमेंट ऑफिसर (स्थापना विभाग) भी रहे चुके हैं। व्यय विभाग में भी जॉइंट सेक्रेटरी की ज़िम्मेदारी भी निभाई है। इसके अलावा शिक्षा विभाग, पर्यावरण वन मंत्रालय, आदिवासी मामलों के मंत्रालय में सेवाएं दे चुके हैं।
राजीव कुमार की नीति आयोग के रिफॉर्म में अहम भूमिका रही है। वह टास्क कमेटी (कुमार नीति आयोग) सदस्य भी रह चुके हैं। राजीव कुमार के टास्क कमेटी की रिपोर्ट की तर्ज़ ही नीति आयोग के मौजूदा ढांचे को मंज़ूरी मिली है।












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