Bihar By Election: क्या नीतीश और तेजस्वी की जोड़ी होगी हिट, या BJP लहराएगी परचम

पालगंज में पूर्व मंत्री सह तत्कालीन विधायक सुभाष सिंह के निधन की वजह से उपचुनाव हो रहे हैं। गोपालगंज विधानसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है। बिहार में बदली सियासी फ़िज़ा के बाद भाजपा के लिए यह सीट नाक...

पटना, 5 अक्टूबर 2022। (Bihar By Election) बिहार में दो विधानसभा सीटों मोकामा और गोपालगंज सीट पर 3 नवंबर को मतदान की घोषणा हो गई है। उपचुनाव के मद्देनज़र दोनों सीटे हॉट मानी जा रही है। वहीं सियासी गलियारों में यह चर्चा भी तेज़ हो चुकी है कि क्या नीतीश और तेजस्वी की जोड़ी हिट होगी या फिर भारतीय जनता पार्टी परचम लहराएगी ? एक नज़र दोनों विधानसभा सीटों के सियासी समीकरण पर ड़ालते हैं, इसके साथ ही सियासी गलियारों में हो रही चर्चा पर भी नज़र डालेंगे।

मोकामा सीट पर भूमिहार समुदाय का वर्चस्व

मोकामा सीट पर भूमिहार समुदाय का वर्चस्व

1951 में मोकामा विधानसभा सीट घोषित हुई, उसके बाद से वहां बाहुबली नेताओं का क़ब्ज़ा रहा है। इस विधानसभा से पार्टी कोई भी हो लेकिन भूमिहार प्रत्याशी ही जीत दर्ज करता रहा है। मोकामा विधानसभा सीट का ज्यादातर हिस्सा ग्रामीण क्षेत्र में होने के साथ ही यहां भूमिहार समुदाय का ही वर्चस्व रहा है। यही वजह है कि विधानसभा सीट भूमिहार प्रत्याशी ही जीत दर्ज करता रहा है। 1990 से 2000 तक इस विधानसभा सीट से दिलीप सिंह (अनंत सिंह के भाई) विधायक रहे। लालू प्रसाद यादव की कैबिनेट में दिलीप सिंह मंत्री भी रहे थे।

5 बार से विधायक रहे अनंत सिंह

5 बार से विधायक रहे अनंत सिंह

2000 के विधानसभा चुनाव में बाहुबली सूरजभान सिंह ने जेल में रहते बतौर निर्दलीय उम्मीदवार जीत चुनावी दांव खेला था। नीतीश कुमार के समर्थन से चुनावी बाज़ी भी जीती थी। 2005 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की ( जनता दल यूनाइटेड) पार्टी से अनंत सिंह चुनाव लड़ते हुए जीत दर्ज की। अनंत सिंह ने दोबारा 2010 के विधानसभा चुनाव में भी जदयू की टिकट पर जीत दर्ज की। 2015 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार से अनबन की वजह से अनंत सिंह ने निर्दलीय ताल ठोकते हुए जीत दर्ज की।

क्या क़ायम रहेगा अनंत सिंह का वर्चस्व ?

क्या क़ायम रहेगा अनंत सिंह का वर्चस्व ?

2020 के विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह ने लालू यादव की पार्टी राजद से चुनाव लड़ते हुए जीत दर्ज की। उसके बाद से लगातार पांच बार से अनंत सिंह मोकामा सीट से जीत दर्ज करते रहे। अनंत सिंह भी भूमिहार समुदाय से आते हैं, इसलिए मोकामा सीट से चुनावी ताल ठोकने का उन्हें फायदा मिलता रहा है। लेकिन एके-47 और हैंड ग्रैनेड रखने के मामले में अनंत सिंह की विधायकी खत्म होने के बाद यहां उपचुनाव हो रहा है। चूंकि अनंत सिंह ने राजद की टिकट पर यहां से जीत दर्ज की थी और इस विधानसभा सीट पर अनंत सिंह का वर्चस्व रहा है। महागठबंधन की तरफ़ से राजद की टिकट पर अनंत सिंह की पत्नीनीलम देवी चुनाव लंड़ेंगी।

भाजपा के लिए उपचुनाव में नाक की लड़ाई

भाजपा के लिए उपचुनाव में नाक की लड़ाई

गोपालगंज में पूर्व मंत्री सह तत्कालीन विधायक सुभाष सिंह के निधन की वजह से उपचुनाव हो रहे हैं। गोपालगंज विधानसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है। बिहार में बदली सियासी फ़िज़ा के बाद भाजपा के लिए यह सीट नाक की लड़ाई बन चुकी है। इस सीट को दोबारा से भाजपा के खाते में लाने के लिए पार्टी रणनीति तैयार करने में जुट गई है। क्योंकि विधानसभा चुनाव में जदयू एनडीए गठबंधन दल का हिस्सा थी और अब उपचुनाव में महागठबंधन के साथ सरकार बना चुकी है।

त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावनाएं तेज़

त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावनाएं तेज़

गोपालगंज विधानसभा सीट पिछले 6 विधानसभा चुनाव के आंकड़े की बात की जाए तो पिछले चार चुनावों से इस सीट पर भाजपा का क़ब्ज़ा रहा है। उससे पहले पार्टी बदल बदल कर प्रत्याशी किस्मत आज़माते रहे हैं। चूंकि इस बार महागठंबधन से एक उम्मीदवार चुनाव में उतरेगा। वहीं भाजपा से एक उम्मीदवार होगा और बसपा से पूर्व सांसद अनिरुद्ध प्रसाद यादव (साधु यादव) के चुनावी ताल ठोकने अटकलें तेज़ है। अगर ऐसा होता है तो इस बार गोपालगंज में दिलचस्प त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है।

बिहार में बदले सियासी समीकरण

बिहार में बदले सियासी समीकरण

भारतीय जनता पार्टी का पिछले चार विधानसभा चुनावों से गोपालगंज विधानसभा सीट पर कब्जा रहा है, ऐसे में भाजपा के लिए यह शाख की लड़ाई बन चुकी है। वहीं पिछले विधानसभा चुनाव में इस सीट से महागंठबंधन की तरफ से कांग्रेस ने उम्मीदवार ने पर्चा खिल किया था। इस बार टिकट किसे मिलेगा यह देखने वाली बात होगी। पिछले विधानसभा के समीकरण कुछ और थे इस बार के समीकरण कुछ और है।

कांग्रेस भी कर रही गोपालगंज सीट जीतने का दावा

कांग्रेस भी कर रही गोपालगंज सीट जीतने का दावा

गोपालगंज विधानसभा सीट से कांग्रेस अपने जीत का दावा करते हुए टिकट लेना चाह रही है। वहीं जदयू एनडीए से अलग होने के बाद खुद के उम्मीदवार को मैदान में उतारना चाह रही है। इन सबके अलावा राजद सुप्रीमो लालू यादव का गोपालगंज गृह जिला है। हाल ही में बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने 500 करोड़ के मेडिकल कॉलेज के साथ ही जिले को 600 करोड़ भी रुपये की सौगात दी थी। इससे महागठबंधन की तरफ़ से राजद के टिकट की दावेदारी की अटकलें लगाई जा रही हैं।

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