बिहार: पिता पोस्टऑफिस में कर्मचारी और मां स्वास्थ्य विभाग में ANM, बेटा बना BPSC टॉपर
सुधीर ने अपनी पढ़ाई के लिए घर पर ही कोचिंग चलाया करते थे। उसके बाद उन्होंने कानपुर का रुख करते हुए बीटेक में दाखिला लिया। कानपुर पहुंचने के बाद भी उन्होंने यूपीएससी और बीपीएससी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी।
हाजीपुर, 4 अगस्त 2022। बिहार लोक सेवा आयोग ने 66वें का फाइनल रिजल्ट घोषित हो चुका है। इस साल बीपीएससी में 685 कैंडिडेट्स ने कामयाबी हासिल की है। वहीं वैशाली के रहने वाले सुधीर कुमार ने टॉप किया है। ग़ौरतलब है कि सुधीर बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं। वह वैशाली जिले के सुदूर ग्रामीण इलाके से ताल्लुक रखते हैं। विष्णुपुर (महुआ) के राहजनी के रहने वाले सुधीर की शुरुआती पढ़ाई स्थानीय स्कूल से हुई थी। वहीं उनके परिवार की बात की जाए तो पिता वीरेंद्र कुमार महुआ पोस्टआफिस में कर्मचारी हैं और मां प्रमिला कुमारी राजापकड़ स्वास्थ विभाग में एएनएम हैं। 3 भाई बहनो में सुधीर सबसे छोटे हैं।
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घर पर पढ़ाई के लिए कोचिंग चलाते थे सुधीर
सुधीर ने अपनी पढ़ाई के लिए घर पर ही कोचिंग चलाया करते थे। उसके बाद उन्होंने कानपुर का रुख करते हुए बीटेक में दाखिला लिया। कानपुर पहुंचने के बाद भी उन्होंने यूपीएससी और बीपीएससी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी। आपको बता दें कि सुधीर यूपीएसी का पीटी क्लियर केर मेंस की तैयार के लिए दिल्ली चले गए। इसी बीच बीपीएससी के नतीजे घोषित हुए जिसमें उन्होंने टॉप किया है।

पहले ही अटेम्प्ट में किया बीपीएसी टॉप
सुधीर कुमार के शिक्षा की बात करें तो वह कानपुर आईआईटी से सिविल इंजीनियरिंग कर चुके हैं। उन्होंने बिहार बोर्ड 12वीं पास करने के बाद जेईई में कामयाबी हासिल की। 2019 में पास होने के बाद गांव में ही बच्चों को तालीम देने लगे। 11वीं, 12वीं और आईआईटी की तैयारी महुआ में ही कराने लगे। आपको बता दें कि आईआईटी कानपुर से सुधीर ने सिविल इंजीनियरिंग में ग्रेजुशन की है। ग़ौरतलब है कि पहले ही अटेम्प्ट में उन्होंने बीपीएसी में टॉप मुकाम हासिल कर लिया।

परिवार वालों में जश्न का माहौल
सुधीर कुमार ने कामयाबी का मंत्र देते हुए बताया कि शॉर्टकट से इंसान कामयाब नहीं होता है। सिर्फ़ जनरल नॉलेज की किताब पढ़ने से भी परीक्षा पास नहीं कर सकते हैं। सामान्या ज्ञान के अलावा भी कई सवाल लिखित परीक्षा में आते हैं। सुधीर दिल्ली में यूपीएससी पीटी निकालने के बाद मेंस की तैयारी में जुटे थे तो वहीं उनके घर पर कामयाबी को लेकर जश्न मनाया जा रहा था। सुधीर की बहनों ने बताया कि बचपन से लेकर अभी तक उसकी हर ज़रूरतें पूरी करते आई हैं। इस वजह सुधीर अपनी बहनों को डोरेमॉन पुकारते थे। उनकी कामयाबी को लेकर परिवार वालों में काफी खुशी का माहौल है। इसके साथ घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
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