Bihar : मजदूरों ने कहा- अब मन लग गया तो जाने को कह रहे,15 से बंद हो जाएंगे क्वारेंटाइन सेंटर

Bihar : मजदूरों ने कहा- अब मन लग गया तो जाने को कह रहे,15 से बंद हो जाएंगे क्वारेंटाइन सेंटर

चकाचक लुंगी, गंजी और गमछा। तीन टाइम का खाना। जेनेरेटर से रात भर बिजली। सोने के लिए बिस्तर और मच्छरदानी। गांव –देहात में इन छोटी-छोटी चीजों से ही बड़ी खुशियां मिल जाती हैं। दूसरे राज्यों में फजीहत झेलने के बाद जब मजदूरों को बिहार के क्वारेंटाइन सेंटर में ऐसे इंतजाम मिले तो उन्हें ऐसा लगा जैसे किसी ने जख्मों पर मरहम लगा दिया। बेगूसराय के एक ऐसे ही क्वारेंटाइन सेंटर पर मजदूर आवभगत से गदगद थे। जब 14 दिन रहने की मियाद पूरी हो गयी तो वे केन्द्र से जाना ही नहीं चाहते थे। मजदूरों ने केन्द्र प्रभारी से कहा, पहले तो हम यहां रहना नहीं चाहते थे और अब जब रहना चाहते हैं तो जाने के लिए कह रहे हैं। बहुत समझाने-बुझाने पर वे जाने को तैयार हुए। कई क्वारेंटाइन सेंटर में बदइंतजामी रही। कई मजदूर भागे भी। लेकिन बाद में बिहार सरकार ने प्रवासी मजदूरों को सुविधा मुहैया कराने के लिए पूरा जोर लगाया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये कई जिलों में मजदूरों बात की। नीतीश का नुस्खा काम कर गया। अब जब मजदूर कोरोना के भय से मुक्त हो कर घर लौट रहे हैं तो उनके चेहरों पर खुशियां हैं।

15 जून से बंद हो जाएंगे क्वारेंटाइन सेंटर

15 जून से बंद हो जाएंगे क्वारेंटाइन सेंटर

बाहर से आने वाले मजदूरों को क्वारेंटाइन सेंटर में वेलकम किट दिया गया जिसे बिहार सरकार ने डिगनिटी किट का नाम दिया। डिगनिटी किट में पुरुषों के लिए लुंगी, गंजी ,गमछा, दरी, थाली, कटोरा, ऐनक, कंघी, साबुन, टूथब्रश, टूथ पेस्ट, बाल्टी और मग था। महिलाओं के लिए साड़ी, ब्लाउज पेटीकोट और दूसरे सामान थे। बच्चों को पैंट और गंजी दिया गया। रात में सोने के लिए मच्छरदानी भी मिली थी। महिलाओं के लिए अलग से अस्थायी शौचालय और स्नानघर बनाये गये थे। जहां केन्द्र प्रभारी और अधिकारी सजग थे वहां बेहतर इंतजाम किये गये। बिहार में बाहर से लौटने वाले मजदूरों के अंतिम जत्थे की क्वारेंटाइन अवधि 15 जून तक पूरी हो जाएगा। 15 जून के बाद सभी क्वारेंटाइन सेंटर बंद कर दिये जाएंगे। चूंकि अधिकतर क्वारेंटाइन सेंटर स्कूलों में बनाये गये थे इसलिए सरकार अब इनको खाली कराने की तरफ कदम बढ़ा रही है। पढ़ाई शुरू करने से पहले स्कूलों को पहले की स्थिति में लाना है। उनको कई बार सेनिटाइज करना है। चूंकि अब कुछ शर्तों के साथ आवाजाही शुरू हो गयी है इसलिए क्वारेंटाइन का रजिस्ट्रेशन बंद कर दिया गया है।

कुछ अच्छे इंतजाम

कुछ अच्छे इंतजाम

सरकार ने क्वारेंटाउन सेंटर में रहने वाले हर मजदूर के भोजन और नास्ते के लिए एक सौ पच्चीस रुपये निर्धारित किये थे। उन्हें दिन में दो टाइम का खाना और एक बार नाश्ता दिया जाता था। इसके अलावे हर मजदूर को डिगनिटी किट दिया गया। बिहार में कुछ ऐसे भी जिलाधिकारी रहे जिन्होंने मजदूरों की देखभाल के लिए खूब मेहनत की। खगड़िया के डीएम आलोक रंजन घोष ने क्वारेंटाउन सेंटर के इंतजामों पर खुद नजर रखी। एक दिन वे मानसी प्रखंड के अकनिया गांव पहुंच गये। वहां के क्वारेंटाइन सेंटर पर बने भोजन को उन्होंने खुद खा कर उसकी गुणवत्ता परखी। मजदूरों ने बातचीत में जिलाधिकारी को बताया कि वे रोज दाल-भात का कर ऊब गये हैं। मेनू को अगर बदल दिया जाए तो मेहरबानी होगी। तब जिलाधिकारी ने मजदूरों की एक टीम बना कर उन्हें खुद मेनू तय करने का अधिकार दे दिया। फिरतब केन्द्र प्रभारी ने इस टीम की सलाह पर कभी खीर, कभी वेज बिरयानी तो कभी सत्तू पूड़ी खाने में परोसा।

अब तो आने वाले जाने भी लगे

अब तो आने वाले जाने भी लगे

क्वारेंटाइन सेंटर से घर लौट रहे मजदूरों के पास अभी कुछ दिनों का अनाज है। सेंटर से विदाई के समय उन्हें अनाज और तेल मसाला मिला है। नये राशन कार्ड पर भी चावल गेहूं मिल रहा है। कुछ दिनों का तो दाना-पानी है, लेकिन आगे क्या होगा, कुछ पता नहीं। बाहर से लौटने वाले स्किल्ड लेबर गांव में खेती या मनरेगा में मिट्टी काटने का काम कैसे करेंगे ? इसके लेकर उनमें चिंता बनी हुई है। सरकार ने वैसे तो सभी प्रवासी मजदूरों को अब बिहार में ही रहने का सुझाव दिया है, लेकिन लौटने वालों पर कोई बंदिश भी नहीं है। पंजाब में अब धान की खेती शुरू होने वाली है। वहां धान की खेती एक हद तक बिहारी मजदूरों पर निर्भर है। पंजाब के किसान बिहारी श्रमिकों के नहीं रहने से परेशान हैं। अब तो ऐसी स्थिति आ गयी है कि मजदूरों को पंजाब ले जाने के लिए वहां के किसान खुद बस लेकर बिहार पहुंचने लगे हैं। शिवहर जिले के तरियानी प्रखंड से करीब दो सौ मजदूर पंजाब पहुंच भी गये हैं। मजदूरों के हाथ खाली हैं। वे जल्द से जल्द कुछ पैसा कमाना चाहते हैं। पंजाब से आये किसानों ने उनको एक विकल्प दे दिया है। हालांकि स्थानीय प्रशासन मजदूरों के पलायन को रोकना चाहता है लेकिन मजदूर उनकी एक नहीं सुन रहे। अब बिहार सरकार पर यह दबाव है कि वे दूसरे राज्यों से आये लाखों मजदूरों को कैसे रोजगार देती है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+