Bihar Vigilance Raid: 10 हजार घूस लेते आपूर्ति पदाधिकारी गिरफ्तार, जाल में ऐसे फंसे सरकारी बाबू
Bihar Vigilance Raid: बिहार में भ्रष्टाचार का खेल 'पकड़म-पकड़ाई' के रोमांचक मोड़ पर है! नीतीश बाबू की निगरानी टीम फुल एक्शन मोड में है, लेकिन हमारे कुछ सरकारी 'साहब' हैं कि सुधरने का नाम ही नहीं ले रहे। ताज़ा मामला समस्तीपुर का है, जहां एक साहब 'एक्स्ट्रा राशन' के बदले 'एक्स्ट्रा कैश' की डिमांड कर रहे थे।
उन्हें लगा था कि रिश्वत की मलाई चुपचाप हजम कर लेंगे, पर बेचारे ये भूल गए कि निगरानी विभाग की नज़र बाज़ जैसी है। चलिए, इस पूरे 'रिश्वत कांड' के मज़ेदार सफरनामे पर नज़र डालते हैं।

Ration card corruption Samastipur: साहब की डिमांड और राशन का खेल
समस्तीपुर के विद्यापति नगर और उजियारपुर प्रखंड में तैनात आपूर्ति पदाधिकारी राजेश कुमार भगत जी को लगा कि राशन कार्ड धारकों का पेट भरने से पहले अपनी जेब भरना ज़रूरी है। राम एकबाल सिंह नाम के व्यक्ति ने जब अतिरिक्त खाद्य आवंटन की गुहार लगाई, तो साहब ने सीधे 'गांधी जी' के दर्शन की इच्छा जता दी। उन्हें क्या पता था कि जिस राशन को बढ़ाने के बदले वो नोट मांग रहे हैं, वही नोट उनकी सरकारी कुर्सी को 'राशन' की तरह निगल जाएंगे।
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निगरानी की 'गुप्त' बिछाई गई बिसात
जैसे ही राम एकबाल सिंह ने निगरानी ब्यूरो को इस 'लेन-देन' की खबर दी, ब्यूरो की टीम ने अपनी जासूसी वाली टोपी पहन ली। पुलिस उपाधीक्षक अखिलेश कुमार के नेतृत्व में एक धावादल बनाया गया। टीम ने पहले चुपके से साहब की बातों का सत्यापन किया। जब ये कंफर्म हो गया कि साहब वाकई में 'चाय-पानी' (रिश्वत) के शौकीन हैं, तो टीम ने एक ऐसा जाल बुना जिसमें साहब का फंसना तय था।
किराए के घर में 'रंगे हाथ' वाली फिल्म
राजेश कुमार भगत जी दलसिंहसराय के काली चौक स्थित अपने किराए के मकान में बड़े आराम से 10,000 रुपये की रिश्वत का स्वागत कर रहे थे। जैसे ही नोटों की गड्डी ने साहब के हाथों को छुआ, निगरानी की टीम ने 'सरप्राइज एंट्री' मार दी। साहब के चेहरे का रंग उड़ गया और हाथों में गुलाबी नोटों की जगह कानून की पकड़ आ गई। अब उनका वो किराए का कमरा, किसी सस्पेंस फिल्म के सेट जैसा लगने लगा था।
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मुजफ्फरपुर कोर्ट की सैर और सबक
रिश्वतखोरी के इस 'रंगे हाथ' वाले शॉट के बाद अब साहब की अगली मंज़िल मुजफ्फरपुर का विशेष निगरानी न्यायालय है। पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है कि आखिर ये 'भूख' कितनी पुरानी है। बिहार के सरकारी महकमों में ये चर्चा है कि चाहे साहब कितने भी शातिर क्यों न हों, जब निगरानी का डंडा चलता है, तो अच्छे-अच्छों की हेकड़ी निकल जाती है। अब भगत जी को राशन की नहीं, बल्कि कानूनी धाराओं की चिंता सता रही होगी।












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