Bihar SIR: सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद चुनाव आयोग हुआ राजी, अब शेयर करेगा बिहार में हटाए गए वोटरों की सूची
Bihar SIR: भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) से संबंधित सुनवाई के दौरान "राजनीतिक दलों के संघर्ष के बीच फंस गया है।" आयोग का कहना है कि जब कोई राजनीतिक दल चुनाव जीतता है, तो इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को अच्छा माना जाता है, लेकिन हारने पर यही EVM अचानक खराब हो जाती है।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से उन मतदाताओं के नाम सार्वजनिक करने को कहा था जिन्हें राज्य की मतदाता सूची से हटा दिया गया है। कड़ी पूछताछ के बाद आयोग इस पर सहमत हो गया। जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष ये दलीलें पेश की गईं। यह पीठ 24 जून के चुनाव आयोग के बिहार में SIR आयोजित करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

चुनाव आयोग ने अदालत में कहा, "हम राजनीतिक दलों के संघर्ष के बीच फंसे हैं; यदि वे जीतते हैं तो EVM अच्छी है, यदि वे हारते हैं तो EVM खराब है।" शीर्ष अदालत ने आयोग से पूछा, "आप उन लोगों के नाम क्यों नहीं बता सकते जिनकी मृत्यु हो गई है, जो पलायन कर गए हैं, या अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में स्थानांतरित हो गए हैं?"
चुनाव आयोग के अनुसार, ऐसे नाम पहले ही राज्य के राजनीतिक दलों को दिए जा चुके हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, "आप इन नामों को डिस्प्ले बोर्ड पर या वेबसाइट पर क्यों नहीं डाल सकते? प्रभावित लोग 30 दिनों के भीतर उपचारात्मक उपाय कर सकते हैं।" अदालत ने यह भी कहा कि वह नहीं चाहती कि नागरिक राजनीतिक दलों पर निर्भर रहें।
शीर्ष अदालत की कड़ी टिप्पणी के बाद चुनाव आयोग बिहार SIR में हटाए गए मतदाताओं के नाम साझा करने पर सहमत हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को एक सार्वजनिक सूचना जारी करने पर विचार करने के लिए भी कहा, जिसमें वेबसाइटों या स्थानों का विवरण हो जहां मृत, पलायन कर चुके या स्थानांतरित हुए लोगों की जानकारी साझा की गई है।
बिहार SIR का विरोध कर रहे विपक्षी नेताओं में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस के साथ-साथ गैर-सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) भी शामिल हैं। इन सभी ने बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने 13 अगस्त को कहा था कि मतदाता सूची "स्थिर" नहीं रह सकती और इसमें संशोधन होना तय है।
अदालत ने यह भी कहा कि बिहार के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) के लिए पहचान दस्तावेजों की स्वीकार्य सूची को सात से बढ़ाकर ग्यारह करना वास्तव में "मतदाता-अनुकूल और गैर-बहिष्करण" था। सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड के साथ बिहार SIR में नाम हटाने के खिलाफ दावों की अनुमति भी दी है।












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