'राजनीतिक पार्टी NGO की तरह काम करें', सुप्रीम कोर्ट ने वोटर विवाद पर क्यों कहा ऐसा, अब कब होगी अगली सुनवाई?
Bihar SIR (Supreme Court): बिहार में वोटर लिस्ट को लेकर मचा विवाद मंगलवार 29 जुलाई को भी सुप्रीम कोर्ट में जारी रहा। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को इस समय NGO (गैर-सरकारी संगठन) की तरह काम करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि अगर बिहार की प्रारंभिक वोटर लिस्ट (ड्राफ्ट रोल) में 'बड़े पैमाने पर वोटरों को हटाया गया' तो वह तत्काल हस्तक्षेप करेगा। यह टिप्पणी 1 अगस्त को प्रकाशित होने वाली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को लेकर की गई, जो चुनाव आयोग (ECI) द्वारा शुरू की गई स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया का हिस्सा है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग द्वारा की जा रही वोटर लिस्ट रिवीजन पर रोक लगाने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस प्रक्रिया में असली वोटरों को हटाया जा रहा है, खासकर ऐसे लोग जिन्हें मृतक या स्थानांतरित बताया गया है।

विपक्षी दलों और कुछ NGO जैसे कि एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स (ADR) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि प्रस्तावित ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 65 लाख लोगों को हटाया गया है, जिनमें से कई या तो जीवित हैं या अभी भी बिहार में रह रहे हैं।
SC की सख्त टिप्पणी- 'आप 15 लोग लाकर दिखाए जो जिंदा हैं और फिर भी लिस्ट से बाहर हैं!'
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा, "हम एक न्यायिक संस्था के तौर पर इस प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं। अगर हमें लगे कि बड़े पैमाने पर वोटर हटाए जा रहे हैं, तो हम तुरंत हस्तक्षेप करेंगे। अगर 65 लाख में से कोई 15 लोग लाकर दिखा दें जो जिंदा हैं और फिर भी लिस्ट से हटा दिए गए हैं।"
चुनाव आयोग ने कोर्ट में क्या-क्या कहा?
चुनाव आयोग की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 65 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट से हटाए गए हैं, जिन्हें या तो मृतक माना गया है या माना गया है कि वे राज्य से बाहर चले गए हैं।
चुनाव आयोग की तरफ से वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने अदालत को बताया कि जनवरी 2025 की वोटर लिस्ट को आधार बनाकर ही 1 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट तैयार की जा रही है। जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें 31 दिन (1 सितंबर तक) का समय दिया गया है सुधार या दावा करने के लिए। लिस्ट से हटाए गए लोगों की जानकारी वेबसाइट और राजनीतिक दलों के साथ साझा की गई है।
चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों को भी चाहिए कि वे इन वोटरों की मदद करें और उनके नाम लिस्ट में जुड़वाने में सहयोग करें।
याचिकाकर्ताओं की आपत्ति
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और प्रशांत भूषण ने अदालत में कहा, "हमें यह नहीं बताया गया कि किन लोगों को मृत या राज्य से बाहर मानकर हटाया गया है। अगर वे 1 अगस्त की लिस्ट में नहीं होंगे, तो वे आपत्ति भी नहीं दर्ज करा पाएंगे।" उन्होंने मांग की कि 'मृत घोषित' लोगों की सूची उन्हें दी जाए, ताकि वे सच्चाई की जांच कर सकें।
जस्टिस बागची बोले, "जनवरी 2025 की लिस्ट इस प्रक्रिया की आधारभूत सूची है। आपका डर है कि इसमें से 65 लाख नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं आएंगे, लेकिन उन्हें सुधार का मौका मिलेगा। अगर कोई 'मृत घोषित' व्यक्ति सामने आकर कहता है कि वह जीवित है, तो कोर्ट जरूर दखल देगा।"
बिहार वोटर लिस्ट विवाद पर 12 अगस्त को अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सभी पक्षों को अपनी दलीलें जल्दी खत्म करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि जनवरी 2025 की वोटर लिस्ट को आधार मानते हुए ही विशेष संशोधन किया गया है और इस प्रक्रिया के तहत ड्राफ्ट लिस्ट प्रकाशित की जाएगी।
अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी, जिसमें यह देखा जाएगा कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया में कोई गंभीर चूक या वोटरों का बड़े पैमाने पर निष्कासन हुआ है या नहीं।












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