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Bihar Rajya Sabha Election: नितिन नबीन, रीना पासवान, उपेंद्र कुशवाहा या पवन सिंह? राज्यसभा की रेस में कौन आगे

Bihar Rajya Sabha Election 2026: बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। 16 मार्च को होने वाली वोटिंग से पहले एनडीए और महागठबंधन के खेमे में दांव-पेंच का दौर जारी है। इस बार मुकाबला सिर्फ सीटों का नहीं, बल्कि साख का भी है। बीजेपी जहां अपने वफादार नितिन नबीन और भोजपुरी स्टार पवन सिंह जैसे चेहरों पर विचार कर रही है,

वहीं चिराग पासवान अपनी मां रीना पासवान के लिए 'सम्मान' की लड़ाई लड़ रहे हैं। विधानसभा के गणित के हिसाब से एनडीए 4 सीटें आसानी से जीत रहा है, लेकिन असली रोमांच 'पांचवीं सीट' को लेकर है। इस चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा का भविष्य और नीतीश कुमार की नई रणनीति भी दांव पर लगी है।

Bihar Rajya Sabha Election

Nitin Nabin Rajya Sabha: संगठन में कद या राज्यसभा का पद?

बीजेपी के दिग्गज नेता नितिन नबीन का नाम रेस में सबसे आगे चल रहा है। वर्तमान में वे बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जैसी बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। चर्चा है कि बीजेपी उन्हें राज्यसभा भेजकर दिल्ली की राजनीति में और ज्यादा सक्रिय कर सकती है। हालांकि, पार्टी के भीतर एक तबका ऐसा भी है जो मानता है कि संगठन की मजबूती के लिए उनका पद पर बने रहना जरूरी है।

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Reena Paswan Rajya Sabha: चिराग की 'मां' के लिए एनडीए में 'सम्मान' की जंग

चिराग पासवान अपनी मां रीना पासवान को राज्यसभा भेजने के लिए एनडीए के भीतर पूरी राजनीतिक ताकत लगा रहे हैं। चिराग का दावा बेहद मजबूत है; लोकसभा चुनाव में 100% स्ट्राइक रेट के बाद विधानसभा चुनावों में भी उनकी पार्टी ने 29 में से 19 सीटें जीतकर अपनी धमक दिखाई है। चिराग का तर्क है कि इस शानदार प्रदर्शन के बदले उन्हें राज्यसभा में उचित प्रतिनिधित्व मिलना ही चाहिए। पिता स्वर्गीय रामविलास पासवान की विरासत को उच्च सदन में बरकरार रखना चिराग के लिए एक बड़ा 'इमोशनल कार्ड' भी है। अगर बीजेपी इस मांग पर मुहर लगाती है, तो चिराग अपनी मां रीना पासवान को सदन भेजकर न केवल परिवार की विरासत सुरक्षित करेंगे, बल्कि अपने वोट बैंक को भी एक बड़ा संदेश देंगे।

Pawan Singh BJP Rajya Sabha: क्या 'पावर स्टार' को मिलेगा संसद का टिकट?

भोजपुरी के 'पावर स्टार' पवन सिंह का नाम इस लिस्ट में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला है। चुनाव से पहले उनके बीजेपी नेताओं के साथ बढ़ते तालमेल ने इन चर्चाओं को हवा दी है। बीजेपी पवन सिंह को राज्यसभा भेजकर पूर्वांचल और बिहार के युवाओं के बीच अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है। हालांकि, उपेंद्र कुशवाहा के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने का उनका पिछला इतिहास रोड़ा बन सकता है, लेकिन उनकी भारी लोकप्रियता बीजेपी के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट साबित हो रही है।

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उपेंद्र कुशवाहा: क्या फिर खुलेगी किस्मत की चाबी?

उपेंद्र कुशवाहा के लिए यह चुनाव 'करो या मरो' जैसा है। उनका मौजूदा कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो रहा है और वे दोबारा सदन जाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। हालांकि, विधानसभा में उनकी पार्टी के पास सिर्फ 4 विधायक हैं, जिससे उनकी स्थिति कमजोर दिख रही है। कुशवाहा लगातार बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में हैं, लेकिन चिराग पासवान और अन्य दावेदारों की मजबूती ने उनकी राह में कांटे बिछा दिए हैं। अब सब कुछ बीजेपी के 'बड़े दिल' पर निर्भर है।

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Bihar Rajya Sabha Equation 2026: पांचवीं सीट का रोमांच

बिहार की 5 सीटों में से 4 पर एनडीए का कब्जा पक्का है, लेकिन पांचवीं सीट ने सबका चैन छीन लिया है। एनडीए के पास 4 सीटें जीतने के बाद 38 वोट बचते हैं, जो जीत के आंकड़े (41) से सिर्फ 3 कम हैं। दूसरी ओर, तेजस्वी यादव और महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं। अगर तेजस्वी एआईएमआईएम और निर्दलीय विधायकों को साथ ले आते हैं, तो मुकाबला कांटे का हो जाएगा। क्या लालू और तेजस्वी हार का जोखिम उठाएंगे या एनडीए को वॉकओवर देंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।

नीतीश का 'नो रिपीट' कार्ड: हरिवंश और रामनाथ पर संकट

जेडीयू कोटे से हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर का कार्यकाल खत्म हो रहा है। आमतौर पर नीतीश कुमार राज्यसभा में दो से ज्यादा कार्यकाल देने के पक्ष में नहीं रहते। अगर नीतीश अपने 'नो रिपीट' फॉर्मूले पर अड़े रहे, तो जेडीयू की तरफ से नए चेहरे सामने आ सकते हैं। यह देखना अहम होगा कि क्या नीतीश कुमार अपने पुराने साथियों पर भरोसा जताते हैं या 2025 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए किसी नए सामाजिक समीकरण को मौका देते हैं।

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