Bihar Pink Bus Service: बिहार में पिंक बस कि महिला ड्राइवरों को मिला अप्वाइंटमेंट लेटर, क्यों जरूरी है पहल?
Bihar Pink Bus Service: बिहार की राजधानी पटना में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक नया अध्याय जुड़ गया है। बिहार सरकार ने 'पिंक बस' (Pink Bus) सेवा की महिला ड्राइवरों को नियुक्ति पत्र वितरित किए हैं। सार्वजनिक परिवहन महिलाओं के लिए अक्सर तनाव और असुरक्षा का पर्याय रहा है।
भीड़भाड़ वाली बसें, छेड़खानी का डर और असुरक्षित ऑटो के सफर ने कई महिलाओं को शिक्षा और नौकरियों से दूर रखा है।

लेकिन अब पटना की सड़कों पर दौड़ती 'पिंक बसें' इस तस्वीर को बदल रही हैं। यह पहल केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि महिलाओं की स्वतंत्रता और आत्मविश्वास का नया प्रतीक बन गई है।
What Is Pink Bus Service: क्या है पटना पिंक बस पहल?
पटना पिंक बस पहल की शुरुआत मई 2025 में बिहार राज्य सड़क परिवहन निगम (BSRTC) ने SML इसुजु लिमिटेड के सहयोग से की थी। इसका उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा और मोबिलिटी से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना है।
22+1 सीटर सीएनजी पिंक बसों में CCTV कैमरे, GPS ट्रैकिंग, पैनिक बटन, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट और महिला कंडक्टर जैसी सुविधाएं मौजूद हैं, जो महिलाओं को सुरक्षित और भरोसेमंद यात्रा का अनुभव देती हैं।
Chalo App Bihar Transport: 6 शहरों में होगा संचालन, कितना किफायती है सफर और 'चलो' ऐप की सुविधा
फिलहाल यह सेवा छह शहरों- पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, गया, भागलपुर और पूर्णिया में संचालित हो रही है। पटना में 8, मुजफ्फरपुर में 4 और अन्य शहरों में 2-2 बसें चल रही हैं। किराया दूरी के अनुसार ₹6 से ₹25 तक रखा गया है।
वहीं, महिला छात्रों के लिए ₹400 और कामकाजी महिलाओं के लिए ₹550 में मासिक पास उपलब्ध है, जिससे यह सेवा आर्थिक रूप से भी सुलभ बनती है। बसें रोजाना सुबह 7 बजे से रात 8 बजे तक स्कूल, कॉलेज, दफ्तर और बाजारों को जोड़ने वाले प्रमुख रूट्स पर चलती हैं।
पिंक बस सेवा के साथ 'चलो ऐप' भी शुरू किया गया है, जिसके जरिए यात्री बस की रियल-टाइम लोकेशन, किराया और टाइमिंग देख सकते हैं। इससे न केवल इंतजार कम हुआ है, बल्कि यात्रा भी अधिक योजनाबद्ध और सुरक्षित बनी है।
महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाने की पहल
यह पहल केवल यात्री सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि महिला ड्राइवर और कंडक्टर को रोजगार देकर जेंडर-इन्क्लूसिव रोजगार को भी बढ़ावा देती है। दो चरणों में चलने वाले रेजिडेंशियल ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत महिलाओं को ड्राइविंग और ऑन-रोड ट्रेनिंग दी जाती है। खास बात यह है कि बिहार के मुसहर समुदाय की छह युवतियों ने 'नारी गुंजन' पहल के तहत ऑटोमोबाइल रिपेयर की ट्रेनिंग पूरी की है और अब वे पिंक बस चलाने के लिए तैयार हैं। यह आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
रोजगार में बढ़ रही महिलाओं की भागीदारी
सेवा शुरू होने के बाद से अब तक 33,000 से अधिक महिलाएं पिंक बस से सफर कर चुकी हैं। सितंबर तक रोजाना यात्रियों की संख्या 1,500 से 2,000 तक पहुंच गई। शुरुआत में 20 बसों से शुरू हुई यह योजना अब करीब 100 बसों तक पहुंच चुकी है, जिनमें पटना में ही 22 नई बसें जोड़ी गई हैं। किफायती पास के चलते छात्राओं के लिए कॉलेज जाना आसान हुआ है और कामकाजी महिलाओं के लिए नौकरी तक पहुंच बढ़ी है।
महिलाओं के लिए क्यों जरूरी थी यह पहल?
बिहार में महिलाओं के लिए एक साधारण बस यात्रा भी अक्सर चुनौती बन जाती थी। भीड़, असुरक्षित ऑटो और सामाजिक डर के कारण परिवार कई बार महिलाओं को बाहर जाने से रोक देते थे। इससे शिक्षा और रोजगार के मौके सीमित हो जाते थे।
पिंक बस ने इस डर को भरोसे में बदला है। महिला स्टाफ, तकनीकी सुरक्षा और डिजिटल सुविधा ने यात्रा को सम्मानजनक बनाया है। अब रूट्स बायटा, पालीगंज और बेली रोड जैसे इलाकों तक फैल चुके हैं, जिससे महिलाओं को असुरक्षित साधनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
डिजिटल मोबिलिटी की ओर बढ़ता बिहार
'चलो ऐप' के जरिए बिहार में मोबिलिटी का एक नया डिजिटल अध्याय शुरू हुआ है। रियल-टाइम ट्रैकिंग और डिजिटल टिकटिंग ने अनिश्चितता को कम किया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भुवनेश्वर जैसे स्मार्ट मोबिलिटी मॉडल से सीख लेकर बिहार अपनी परिवहन व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित व समावेशी बना सकता है। पिंक बस पहल बिहार में महिलाओं के लिए सिर्फ एक परिवहन सेवा नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, आज़ादी और बराबरी की दिशा में मजबूत कदम बनकर उभरी है।












Click it and Unblock the Notifications