Bihar News: बिहार पुलिस ने जब्त किया ट्रक, कोर्ट ने दोषी पुलिसकर्मियों पर लगाया 2.15 लाख का जुर्माना

Patna High Court Liquor Ban Case: बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया, जिसे पढ़कर शायद आप भी हैरान रह जाएं। पुलिस ने सिर्फ "शराब जैसी गंध" आने के शक में एक ट्रक जब्त कर लिया। जब जांच हुई तो ट्रक से शराब की एक बूंद भी नहीं मिली। मामला पटना हाईकोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई।

इतना ही नहीं, कोर्ट ने साफ कह दिया कि ट्रक मालिक को 2.15 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए और यह रकम सरकारी खजाने से नहीं, बल्कि दोषी पुलिसकर्मियों की जेब से वसूली जाए।

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सिर्फ गंध के भरोसे हुई पूरी कार्रवाई

मामला गोपालगंज का है। पुलिस ने दावा किया कि ट्रक के केबिन से शराब जैसी गंध आ रही थी। इसी आधार पर ट्रक जब्त कर लिया गया और FIR भी दर्ज कर दी गई। लेकिन जब पूरी जांच हुई तो ट्रक से शराब की एक भी बोतल या एक बूंद तक बरामद नहीं हुई। इसके बाद ट्रक मालिक ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और पुलिस की कार्रवाई को चुनौती दी।

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कोर्ट में दारोगा का जवाब सुनकर जज भी रह गए हैरान

सुनवाई के दौरान जब हाईकोर्ट ने दारोगा से शराबबंदी कानून के नियमों पर सवाल पूछा तो उन्होंने माना कि उन्होंने यह कानून कभी पढ़ा ही नहीं। जबकि उन्होंने अपने हलफनामे में शराबबंदी के करीब 40 मामलों की जांच करने का दावा किया था। दारोगा की यह बात सुनकर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि बिना कानून समझे कार्रवाई करना बेहद गंभीर मामला है।

ट्रक मालिक को मिलेगा पूरा मुआवजा

हाईकोर्ट ने ट्रक मालिक राजेश कुमार यादव के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि उन्हें मानसिक और आर्थिक नुकसान के लिए 2 लाख रुपये दिए जाएं। इसके अलावा 15 हजार रुपये मुकदमे का खर्च भी सरकार देगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर ट्रक जब्त रहने के दौरान उसमें कोई खराबी आई है, तो उसकी मरम्मत का खर्च भी सरकार ही उठाएगी।

बिहार के सरकारी खजाने से नहीं, पुलिसवालों की जेब से जाएगी रकम

इस फैसले की सबसे बड़ी बात यही रही कि कोर्ट ने मुआवजे का बोझ आम जनता के टैक्स पर डालने से इनकार कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि 2.15 लाख रुपये और ट्रक की मरम्मत का खर्च इस कार्रवाई के जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों से ही वसूला जाए। यानी गलती किसी अफसर की होगी तो उसकी कीमत भी वही चुकाएगा। कोर्ट का यह आदेश जवाबदेही तय करने वाला बड़ा फैसला माना जा रहा है।

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क्यों अहम है हाईकोर्ट का यह फैसला?

पटना हाईकोर्ट का यह फैसला सिर्फ एक ट्रक मालिक को राहत देने तक सीमित नहीं है। अदालत ने साफ संदेश दिया है कि बिना सबूत किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती। सिर्फ शक या गंध के आधार पर किसी की गाड़ी जब्त करना कानून के दायरे में नहीं आता। माना जा रहा है कि इस फैसले के बाद पुलिस को शराबबंदी कानून के मामलों में ज्यादा सावधानी और नियमों का पालन करना होगा।

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