Bihar में 'पाताल लोक' में शराब का खजाना! गुप्त तहखाने से 100 पेटियों में छिपी 955 लीटर विदेशी बोतलें-VIDEO
Bihar Illicit Alcohol Hidden Underground Warehouse: बिहार के शराबबंदी कानून को धता बताने वाले माफिया अब भूमिगत होकर भी कारोबार चला रहे हैं। समस्तीपुर जिले के कर्पूरीग्राम थाना क्षेत्र में पुलिस की एक छापेमारी ने सबको हैरान कर दिया। जमीन के नीचे 'पाताल लोक' सरीखा सीक्रेट तहखाना बनाकर छिपाई गई 955 लीटर महंगी विदेशी शराब बरामद हुई, जो करीब 100 पेटियों में पैक थी।
मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग की टीम ने इस 'फिल्मी' छिपाने की कला को नाकाम कर दिया। छापेमारी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, जिसमें अधिकारी खुदाई कर शराब की पेटियां निकालते नजर आ रहे हैं।

यह कार्रवाई शनिवार को गुप्त सूचना पर की गई। उत्पाद विभाग के अवर निरीक्षक मुकेश कुमार के नेतृत्व में टीम ने नीरपुर वार्ड संख्या-1 के एक खेत में पहुंचकर सघन तलाशी ली। ऊपर से सामान्य दिखने वाली जमीन के नीचे माफिया ने गहरा तहखाना खोद रखा था- ऐसा कि किसी को भनक भी न लगे। तहखाने से निकली शराब में रॉयल स्टैग, रॉयल चैलेंज जैसी प्रीमियम ब्रांड की तीन वैरायटी शामिल हैं। बरामद शराब की अनुमानित कीमत लाखों में बताई जा रही है, जो अवैध बाजार में आसानी से बिक जाती।
माफिया की चालाकी: जमीन खोदकर बनाया 'अदृश्य' गुप्त कक्ष
उत्पाद अधीक्षक मनोज कुमार सिंह ने बताया, 'शराब कारोबारियों ने बेहद सोच-समझकर यह तहखाना तैयार किया था। खेत के बीचोंबीच गहराई तक खुदाई की गई और ऊपर मिट्टी-पत्थरों से ढक दिया, ताकि हवाई निगरानी या सामान्य जांच से बच सकें। लेकिन हमारी खुफिया टीम की सतर्कता ने उनके मंसूबों को ध्वस्त कर दिया।' इस बरामदगी से न केवल माफिया को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि जिले में शराब तस्करी के नेटवर्क पर भी सवाल खड़े हो गए। विभाग ने साफ कहा कि आगे ऐसे अभियानों की तीव्रता बढ़ाई जाएगी, ताकि शराबबंदी कानून को मजबूत किया जा सके।
वीडियो में दिख रहा है कि टीम ने खुदाई मशीनों का सहारा लिया। जैसे-जैसे मिट्टी हटी, पेटियां बाहर आईं- एक के बाद एक। स्थानीय लोग भी इस 'भूमिगत खजाने' को देखकर दंग रह गए। एक ग्रामीण ने कहा, 'यह तो किसी थ्रिलर फिल्म जैसा लग रहा है। माफिया कितने बेशर्म हैं!'
बिहार में शराबबंदी: माफिया के नए-नए जुगाड़, लेकिन सख्ती जारी
बिहार में 2016 से लागू शराबबंदी एक क्रांतिकारी कदम था, जिसका उद्देश्य नशे के दुष्प्रभावों को कम करना, महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाना और सामाजिक सुधार लाना था। इस कानून के तहत शराब की खरीद-बिक्री, निर्माण, भंडारण, परिवहन और सेवन पर सख्त पाबंदी है। उल्लंघन करने वालों को 10 साल तक की सजा और भारी जुर्माना हो सकता है। लेकिन माफिया रुके नहीं- पिछले महीनों में एंबुलेंस, फल-सब्जियों के ट्रकों और यहां तक कि वाहनों के तहखानों में शराब तस्करी के कई केस पकड़े गए। जून में जमुई में कटहल के नीचे छिपाकर 710 लीटर शराब लाई जा रही थी, जबकि अक्टूबर में कैमूर में वाहनों के गुप्त कक्षों से 310 लीटर जब्त हुई।
समस्तीपुर जैसे जिलों में तस्करी का केंद्र बनने की आशंका है, क्योंकि यहां झारखंड और उत्तर प्रदेश की सीमाएं सटी हैं। उत्पाद विभाग का दावा है कि 2025 में अब तक 5,000 लीटर से अधिक शराब नष्ट की जा चुकी है। फिर भी, विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता अभियान और तकनीकी निगरानी (जैसे ड्रोन सर्विलांस) बढ़ाने की जरूरत है।
यह घटना बिहार सरकार के लिए चुनौती तो है, लेकिन विभाग की तत्परता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कानून का पालन कराने का इरादा पक्का है। माफिया के 'पाताल लोक' अब भी सुरक्षित नहीं रहेंगे।












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