Bihar Exit Poll 2025: बिहार में इस बार NDA 200 पार? इस एग्जिट पोल ने किए चौंकाने वाले दावे
Bihar Exit Poll 2025 Poll Diary: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के एग्जिट पोल ने राजनीतिक गलियारों में तहलका मचा दिया है। Poll Diary के ताज़ा आंकड़े तो ऐसे सामने आए हैं कि विपक्षी महागठबंधन के होश उड़ गए होंगे।
सर्वे में नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस (NDA) को 184 से 209 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है यह अब तक किसी भी एग्जिट पोल एजेंसी का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला आंकड़ा है। अगर ये अनुमान सच साबित हुआ, तो NDA को लगभग दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज़ होने का मौका मिलेगा।

दूसरी ओर, महागठबंधन को केवल 32 से 49 सीटों का अनुमान है, जबकि अन्य छोटे दलों की स्थिति बेहद कमजोर दिख रही है। Poll Diary के इस सर्वे ने राजनीतिक रोमांच और सस्पेंस को चरम पर पहुंचा दिया है।
NDA की लहर
Poll Diary का दावा है कि इस चुनाव में भाजपा-जदयू गठबंधन ने एक मजबूत सामाजिक समीकरण और विकास के मुद्दे पर वोटर्स को अपने पक्ष में किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की "सुशासन" छवि ने मिलकर ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में एनडीए को बढ़त दिलाई।
विशेष रूप से महिलाओं और पहली बार वोट देने वाले युवा मतदाताओं के बीच एनडीए को भारी समर्थन मिला है। महिलाओं के वोट पर नीतीश कुमार की कल्याणकारी योजनाओं - जैसे महिला रोजगार योजना, साइकिल योजना और शराबबंदी - का असर साफ देखा गया।
महागठबंधन की हालत पतली
वहीं महागठबंधन (राजद, कांग्रेस, वाम दल) की स्थिति बेहद कमजोर नजर आ रही है। Poll Diary के मुताबिक, तेजस्वी यादव की सभाओं में भीड़ तो रही, लेकिन वह वोटों में तब्दील नहीं हो पाई। सर्वे का कहना है कि बेरोज़गारी, महंगाई और पलायन जैसे मुद्दों पर महागठबंधन की अपील सीमित रही। दूसरी तरफ एनडीए ने "स्थिरता और सुरक्षा" का संदेश देकर आम वोटर का भरोसा जीत लिया।
जातीय समीकरण भी बदले
Poll Diary के विश्लेषण के अनुसार, एनडीए को इस बार न केवल सवर्णों बल्कि पिछड़े वर्गों और दलित समुदायों का भी व्यापक समर्थन मिला है। वहीं, महागठबंधन का पारंपरिक मुस्लिम-यादव (MY) वोट बैंक एकजुट नहीं दिखा। जन सुराज पार्टी (प्रशांत किशोर) और छोटे दलों के मैदान में उतरने से MGB के वोट बंट गए।
Poll Diary के अनुमान एक नजर में
- NDA: 184-209 सीटें
- महागठबंधन (MGB): 32-49 सीटें
- अन्य: 1-5 सीटें
इन आंकड़ों से यह साफ संकेत मिलता है कि बिहार की जनता ने इस बार स्थिरता और विकास के नाम पर वोट किया है। एनडीए की महिलाओं, युवाओं और अति पिछड़ों में मजबूत पकड़ ने उन्हें फिर बढ़त दिलाई है। राजद और कांग्रेस गठबंधन इस बार बेरोजगारी, महंगाई और पलायन जैसे मुद्दों को भुनाने में विफल दिखे। तेजस्वी यादव की रैलियों में भीड़ तो दिखी, लेकिन मतों में तब्दील नहीं हो पाई।












Click it and Unblock the Notifications