बिहार चुनाव 2020: क्या तेजस्वी और चिराग के आत्मविश्वास से डर गए हैं नीतीश कुमार?

Recommended Video
“कोई क्रिकेट में था, कोई सिनेमा में, ये क्या घेरेंगे मुझे ? मुझे कोई नहीं घेर सकता। हमारे खिलाफ बोल के ये पब्लिसिटी पाते हैं। मेरी बधाई है। पब्लिसिटी लेते रहो। भीड़ (तेजस्वी) जुट रही है, लेकिन ये कौन लोग हैं, कभी एनालिसिस किया है ? भीड़ में उछलकूद कर रहे ये कौन लोग हैं, पहचानिए। पब्लिक तो पहचान गयी है और उसकी प्रतिक्रिया भी शुरू हो गयी है। 2010 में लालू जी के साथ पासवान जी भी थे। भीड़ भी थी। रिजल्ट क्या हुआ था ? इन सब बातों का कोई मतलब नहीं है। अगर भीड़ से खुश हो तो मस्त रहो। मैं तो इनकी बातों का नोटिस भी नहीं लेता।” मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक इंटरव्यू में उपर्युक्त बातें कहीं हैं। नीतीश कुमार का दावा है कि उन्हें चुनावी रण में कोई नहीं घेर सकता। नीतीश के मुताबिक, नातजुर्बेकर तेजस्वी यादव या चिराग पासवान में इतनी क्षमता नहीं है कि वे उनकी राजनीतिक घेराबंदी कर सकें।

“तेजस्वी और चिराग क्या घेरेंगे ?”
नीतीश कुमार के कहने का मतलब है कि तेजस्वी यादव और चिराग पासवान आम आदमी की नयी पीढ़ी नहीं हैं। ये खास परिवार की नयी पीढ़ी हैं। जब ये अलग-अलग क्षेत्रों में नाकाम हो गये तो इन्हें विरासत की राजनीति सौंप दी गयी। नीतीश के मुताबिक, चूंकि पूरा बिहार उनका परिवार है इसलिए आम आदमी की युवा पीढ़ी उनके साथ है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी इसी मुद्दे के के जरिये बिहार विधानसभा चुनाव के नैरेटिव को बदलने में लगे हैं। नरेन्द्र मोदी ने रविवार को बिहार की चुनावी सभा में कहा, नीतीश जी और मेरा कोई रिश्तेदार राजनीति में नहीं है जबकि विपक्षी दलों को सिर्फ अपने परिवार की चिंता है। विरोधियों को राज्य की चिंता नहीं है। नरेन्द्र मोदी और नीतीश कुमार, दोनों हर सभा में इस बात को बताने की कोशिश कर रहे हैं कि तेजस्वी अनुभवहीन हैं और जंगलराज के प्रतीक हैं। नरेन्द्र मोदी ने तेजस्वी के लिए जुमला ही गढ़ दिया है- जंगलराज के युवराज। अगर ये सत्ता में आये तो क्या हाल होगा बिहार का ? नीतीश कुमार ने तेजस्वी के साथ- साथ चिराग पासवान को भी निशाने पर ले रखा है। उन्होंने 2010 में रामविलास पासवान के चुनावी हस्र की याद दिलायी है। 2010 में रामविलास पासवान लालू यादव के साथ थे। दोनों की सभा में खूब भीड़ भी जुटती थी। लेकिन जब नतीजे निकले तो लोजपा को 75 में से केवल 3 सीटें मिलीं थीं।

क्या राजद की भीड़ की प्रतिक्रिया में अतिपिछड़े गोलबंद हुए ?
नीतीश कुमार के इंटरव्यू से इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि ऐन चुनाव के बीच अतिपिछड़े वोटरों की गोलबंदी तेज हो गयी है। नीतीश कुमार ने शनिवार को चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि शराब माफिया मुझे हराने की साजिश रच रहे हैं। इसलिए ऐसे लोगों को चुनाव में हराना है। नीतीश की इस अपील का असर हुआ दिखता है। तेजस्वी की सभा में जुड़ रही भीड़ पर एनडीए समर्थकों का कहना है कि ये भीड़ शराब माफिया और बालू माफिया की मदद से जुटायी जा रही है। सरकार की सख्ती की वजह से चूंकि इनका धंधा बंद हो गया है इसलिए ये लोग नीतीश कुमार को हराना चाहते हैं। राजद के कोर वोटरों की गोलबंदी की प्रतिक्रिया में अब अतिपिछड़े तेजी से एकजुट हो रहे हैं। बाढ़ की पीड़ा और कोरोना का कष्ट भुला कर फिर एक साल पहले की तरह सामाजिक समीकरण तैयार होने लगा है। नीतीश कुमार ने अपने इंटरव्यू में क्रिया (राजद की भीड़) के विरूद्ध प्रतिक्रिया का जिक्र किया भी है। जानकारों का कहना है कि ‘जंगलराज के युवराज' मुद्दे ने दूसरे और तीसरे चऱण के चुनावी बयार की दिशा एक हद तक बदल दी है।

नीतीश को जीत का भरोसा क्यों ?
पूर्णिया के कसबा विधानसभा क्षेत्र की एक गरीब मुस्लिम महिला का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस वीडियो में कसबा विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस प्रत्याशी अफाक आलम वोट मांगने के लिए अल्पसंख्यक टोला में जाते हैं। वे अपने लिए वोट मांगते हैं। तभी एक गरीब और बेवा मुस्लिम महिला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नाम लेने लगती है। वह कहती है कि मोदी ने उनको लॉकडाउन में अनाज दिये, धनजन योजना के खाता में पैसे भेजे। अगर ये मदद नहीं मिलती तो हम बंदी में भूखे मर जाते। हम तो वोट मोदी को ही देंगे। नरेन्द्र मोदी अपनी हर चुनावी सभा में इस वीडियो का जिक्र कर रहे हैं। वे ये बताना चाहते हैं कि जनता इस बार बिहार और केन्द्र के काम का इनाम देने वाली है। सुशासन बनाम जंगलराज की लड़ाई के रंग दिखाने से नीतीश कुमार का आत्मविश्वास बढ़ा हुआ दिख रहा है।












Click it and Unblock the Notifications