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Jan Suraaj: प्रशांत किशोर के दावे ध्वस्त, हुआ BSP से भी बुरा हाल, वोट प्रतिशत देख PK पीट लेंगे माथा!

Jan Suraaj Vote Percentege: बिहार में इस बार का चुनाव सिर्फ नेताओं और पार्टियों की टक्कर नहीं था, बल्कि एक ऐसे चेहरे की परीक्षा भी था। जिसने पिछले कई सालों में देश की राजनीति की दिशा बदलने में बडी भूमिका निभाई थी। प्रशांत किशोर, वही PK, जिन्होंने देश के कई राज्यों में राजनीतिक रणनीति लिखी, कई नेताओं को सत्ता दिलाई और खुद को चुनाव जीत का मास्टरमाइंड साबित किया।

लेकिन जब बात अपने राज्य बिहार की आई, जहां वे दावा करते रहे कि लोग बदलाव चाहते हैं, नई राजनीति चाहते हैं, और जनसुराज उस बदलाव की शुरुआत है। वहीं जनता ने उनके लिए दरवाजे लगभग बंद कर दिए। PK ने 1280 दिनों तक बिहार की धूल खाई, गांव-गांव पैदल घूमे, हजारों सभाएं कीं, अपने खर्च से 98 करोड़ रुपये पार्टी को दान किए, 1300 प्रोफेशनल्स की टीम बनाई, और बार-बार कहा कि "2025 में बिहार इतिहास बनाएगा।"

Jan Suraaj

इतिहास तो बना, बस PK की उम्मीदों के उलट। जिन दावों को वे सौ बार दोहराते रहे, जनता ने एक झटके में नकार दिया। नतीजों में जनसुराज का खाता तक नहीं खुला, और प्रदर्शन ऐसा कि AIMIM व BSP जैसी पार्टियां भी उससे आगे निकल गईं। यह चुनाव न सिर्फ राजनीतिक मुक़ाबला था, बल्कि यह भी दिखा गया कि रणनीतिकार होना और जननेता होना-दोनों बिल्कुल अलग बातें हैं।

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एक भी सीट नहीं जीती जनसुराज पार्टी

चुनाव मैदान में उतरते समय जनसुराज पार्टी ने 1 करोड से ज्यादा सदस्यों का दावा किया था। कहा गया था कि यह बिहार की सबसे बडी जन आंदोलन आधारित पार्टी है। पर नतीजों में पार्टी को 10 लाख वोट भी नहीं मिले। 238 सीटों पर उम्मीदवार उतारे गए, जिनमें से 233 की जमानत जब्त हो गई है। किसी भी सीट पर उनके उम्मीदवार बढ़त तक नहीं बना पाए। यह 98 परसेंट सीटें हैं। पार्टी को कुल वोट का 1 परसेंट भी हासिल नहीं हुआ। मायावती की बसपा, जिसे बिहार में बड़ी ताकत नहीं माना जाता, उसने भी इससे ज्यादा वोट लिया और उसका वोट शेयर 1.52 परसेंट रहा।

सबसे बुरा प्रदर्शन PK के अपने घर में

प्रशांत किशोर रोहतास जिले से आते हैं, जहां सात विधानसभा सीटें हैं। इन सभी सीटों पर जनसुराज उम्मीदवार अपनी जमानत बचाने में भी असफल रहे। उनकी अपनी विधानसभा करगहर में पार्टी को सिर्फ 3 परसेंट वोट मिले। यह बताता है कि लोकल स्तर पर भी PK की स्वीकार्यता नहीं बन पाई।

AIMIM और BSP का प्रदर्शन बेहतर

जहां जनसुराज का खाता भी नहीं खुला, वहां AIMIM ने 28 सीटों पर चुनाव लड कर 2 परसेंट वोट शेयर हासिल किया और 5 सीटें जीतता दिख रहा है। BSP ने 181 सीटों पर चुनाव लडा और उसे 1.5 परसेंट वोट के साथ एक सीट मिल रही है। दोनों पार्टियों ने जनसुराज से बेहतर प्रदर्शन किया।

1280 दिन की पदयात्रा, 6000 KM की यात्रा, नतीजा फिर भी शून्य

जनसुराज ने दावा किया कि पार्टी बनाने से पहले PK ने 5 मई 2022 से 2 अक्टूबर 2024 तक 6 हजार किलोमीटर की पदयात्रा की। 5 हजार गांवों में गए, हजारों सभाएं कीं। PK ने पूरे कैंपेन में हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल नहीं किया, रोज सडक से 200 KM का सफर तय किया और रोज 8 से 10 विधानसभा क्षेत्रों में पहुंचे। इतनी मेहनत के बावजूद जनता ने उन्हें विकल्प नहीं माना।

पार्टी को अकेले 98 करोड का चंदा दिया PK ने

सितंबर में PK ने बताया कि उन्होंने सलाहकार काम से 3 साल में 241 करोड रुपये कमाए और इसी में से 98 करोड रुपये अपनी पार्टी को दान दिए। इतने पैसे और बडी प्रोफेशनल टीम के बावजूद जनता को पार्टी पर भरोसा नहीं हुआ।

जनसुराज को चलाने के लिए PK ने JSPT नाम की कंसल्टेंसी कंपनी बनाई। इसमें IT प्रोफेशनल्स, पूर्व पत्रकार, सोशल वर्कर और कई विशेषज्ञ शामिल हैं। 38 जिलों में 25 से ज्यादा टीमें काम कर रहीं थीं। हर जिले में DI, DPoC और हर विधानसभा में DPR मौजूद थे। इतनी बडी मशीनरी के बावजूद पार्टी जन समर्थन नहीं जुटा सकी।

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