Bihar Chunav से पहले नीतीश कुमार को बड़ा झटका, JDU विधायक RJD में होंगे शामिल, तेजस्वी यादव दिलाएंगे सदस्यता
Bihar JDU MLA Sanjeev Kumar joins RJD: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज़ हो गई है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) को एक और बड़ा झटका लगने वाला है। खगड़िया जिले के परबत्ता सीट से JDU विधायक डॉ. संजीव कुमार अब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का दामन थामने जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, वे आगामी 3 अक्टूबर को गोगरी भगवान हाई स्कूल मैदान में एक विशाल जनसभा में तेजस्वी यादव की उपस्थिति में RJD की सदस्यता ग्रहण करेंगे। इस आयोजन को RJD की शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है, जहां तेजस्वी यादव खुद डॉ. संजीव को पार्टी में शामिल कराएंगे।

डॉ. संजीव पुलिस ने झारखंड से विधानसभा पहुंचाया था
डॉ. संजीव कुमार की गिनती परबत्ता क्षेत्र में अच्छी पकड़ रखने वाले भूमिहार नेता के रूप में होती है। पिछले कुछ समय से उनकी JDU नेतृत्व के प्रति नाराज़गी खुलकर सामने आ रही थी, जिसकी जड़ें काफी गहरी हैं। जनवरी 2024 में जब नीतीश कुमार ने महागठबंधन छोड़कर NDA में वापसी की, तब भी डॉ. संजीव के रुख को लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा थी।
एक और महत्वपूर्ण और नाटकीय घटनाक्रम तब हुआ था जब नीतीश कुमार विधानसभा में बहुमत साबित करने वाले थे। उस दौरान डॉ. संजीव कुमार अचानक "लापता" हो गए थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने उन्हें झारखंड से ढूंढ कर विधानसभा तक पहुंचाया था, जिसके बाद उन्होंने NDA के पक्ष में मतदान किया था। इस घटना ने उनकी नाराज़गी और पार्टी के भीतर उनकी असहज स्थिति को और भी स्पष्ट कर दिया था।
खरीद-फरोख्त मामले में हुई थी पूछताछ
उनकी नाराज़गी का एक और बड़ा कारण यह भी हो सकता है कि विधायकों की खरीद-फरोख्त की साजिश के मामले में EOU (आर्थिक अपराध इकाई) ने उनसे पूछताछ की थी, जिससे पार्टी के भीतर उनकी स्थिति कमजोर हुई थी।
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राजद को फायदा, JDU को नुकसान?
हाल ही में डॉ. संजीव कुमार ने पटना में ब्रह्मर्षि समाज की एक बड़ी बैठक बुलाई थी, जिसे भूमिहार वोटरों के बीच अपनी पकड़ मज़बूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा था। भूमिहार समाज से आने वाले डॉ. संजीव के RJD में शामिल होने से पार्टी को भूमिहार समुदाय में बड़ा फायदा मिलने की संभावना है, जो पारंपरिक रूप से RJD का वोट बैंक नहीं माना जाता।
दूसरी ओर, JDU के लिए परबत्ता सीट पर यह एक बड़ी चुनौती खड़ी कर सकता है, खासकर तब जब विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं। नीतीश कुमार के लिए यह घटनाक्रम एक राजनीतिक नुकसान साबित हो सकता है, क्योंकि यह न केवल एक सीट का नुकसान है, बल्कि यह पार्टी के भीतर असंतोष और भूमिहार समुदाय में JDU की पकड़ ढीली पड़ने का भी संकेत है।
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