Bihar Chunav: बिहार चुनाव में फंसेगा केस तो 'किंगमेकर' बन पुराने दोस्त करेंगे NDA का बेड़ा पार?
Bihar Chunav: बिहार विधानसभा चुनाव के दिन जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं प्रदेश का सियासी पारा भी उतनी ही तेजी से बढ़ रहा है। चुनाव के माहौल में गठबंधन और सीट शेयरिंग से लेकर चुनाव बाद के समीकरणों पर भी चर्चा होने लगी है। इस बार का चुनाव कई मायनों में खास माना जा रहा है, क्योंकि राजनीतिक समीकरण बदलते दिख रहे हैं। ऐसी चर्चा है कि पीके और उनकी पार्टी जनसुराज इस बार के चुनाव मे एक्स फैक्टर बन सकते हैं। चुनाव परिणाम को प्रभावित करने से लेकर सरकार बनाने तक वह अहम कड़ी साबित हो सकते हैं।
प्रशांत किशोर चुनाव से पहले दोनों ही मुख्य गठबंधन पर लगातार हमलावर हैं। वह एनडीए पर भी बिहार में विकास नहीं होने के लिए निशाना साधते हैं और वह बार-बार दोहरा रहे हैं कि किसी के भी साथ गठबंधन नहीं करेंगे। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने पीके इस चुनाव में किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं।

Bihar Chunav में इस बार हो सकता है उलटफेर
वरिष्ठ पत्रकार सतीश के. सिंह और एक्सिस माई इंडिया के हालिया सर्वे से ऐसे संकेत मिले हैं कि जनसुराज का असर 50 सीटों पर नतीजों को प्रभावित करने की हद तक रह सकता है। कम से कम 15 सीटें ऐसी हैं जहां पीके की पार्टी मजबूत स्थिति में है। इसका असर चुनाव नतीजों पर पड़ सकता है। वरिष्ठ चुनावी विश्लेषक और पत्रकार सतीश के. सिंह ने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान की एलजेपी ने जेडीयू का खेल बिगाड़ा था, लेकिन इस बार वैसा असर नहीं दिख रहा। इसके बजाय प्रशांत किशोर की रणनीति और उनकी पकड़ बड़ा अंतर ला सकती है।
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प्रशांत किशोर सक्रिय राजनीति में उतरने से पहले पीएम नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार दोनों के लिए चुनावी प्रचार कर चुके हैं। पीएम मोदी से अलग होने के बाद वह बिहार पहुंचे थे। 2015 विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के लिए प्रचार अभियान संभाला था। हालांकि, बाद में नीतीश कुमार से उनके रिश्ते बेहद खराब हो गए। फिर भी बिहार की राजनीति के जानकारों का कहना है कि अगर प्रशांत किशोर किंगमेकर की भूमिका में आते हैं, तो इसकी संभावना ज्यादा है कि वह एनडीए के साथ जाएंगे।
Prashant Kishor जनता से लगातार संवाद पर दे रहे जोर
बीजेपी ने अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत कर दी है। बिहार प्रदेश प्रभारी और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 27 सितंबर को घर-घर जाकर प्रचार अभियान की शुरुआत की। वहीं दूसरी ओर इंडिया गठबंधन भी बीजेपी को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। प्रशांत किशोर जनता से सीधे जुड़ रहे हैं। उन्हें स्थानीय भाषा की अच्छी समझ है, जिसकी वजह से लोग उन्हें सहजता से अपना रहे हैं। उनका तर्क है कि जनसुराज उन प्रत्याशियों को टिकट दे रही है जिनकी स्थानीय पकड़ मजबूत है। वह बिहार में खास तौर पर युवाओं को रोजगार और पलायन रोकने जैसे मुद्दों पर जोर दे रहे हैं। अब चुनाव के बाद नतीजे ही तय करेंगे कि कौन इस बार हीरो बनता है और किसके हाथ खाली रहते हैं।
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