Cockroach Janta Party का ट्विटर अकाउंट हुआ एक्टिव? दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, कंटेंट पर क्या कहा?

Delhi High Court on Cockroach Janta Party: सोशल मीडिया पर तेजी से उभरी 'कॉकरोच जनता पार्टी' को दिल्ली हाईकोर्ट से फिलहाल बड़ी राहत नहीं मिली है। पार्टी फाउंडर अभिजीत दीपके की उस याचिका पर अदालत ने तुरंत आदेश देने से इनकार कर दिया, जिसमें X (ट्विटर का बदला हुआ नाम) अकाउंट को दोबारा बहाल करने की मांग की गई थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि इस मामले में कुछ पोस्ट "slightly offensive" यानी "कुछ हद तक आपत्तिजनक" दिखाई देते हैं।

कोर्ट ने यह भी माना कि मामला सिर्फ एक सोशल मीडिया अकाउंट का नहीं, बल्कि इससे जुड़े बड़े कानूनी और संवैधानिक सवालों का भी है। यही वजह रही कि हाई कोर्ट ने बिना केंद्र सरकार और X प्लेटफॉर्म का पक्ष सुने कोई अंतरिम राहत देने से मना कर दिया। हालांकि कोर्ट ने अभिजीत दीपके को पूरी तरह निराश भी नहीं किया और उनके मामले को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की रिव्यू कमेटी के सामने रखने का रास्ता खोल दिया।

Delhi High Court on Cockroach Janta Party

क्या है पूरा मामला और अदालत ने क्यों नहीं दी तुरंत राहत?

जस्टिस पुरूषेंद्र कुमार कौरव की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने जब यह मामला आया, तो कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके की तरफ से देश के दिग्गज वकील अखिल सिबल ने पैरवी की। उन्होंने अदालत से गुहार लगाई कि पार्टी के मुख्य 'X' हैंडल को तुरंत अनब्लॉक (Unblock) करने का आदेश दिया जाए। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर सरकार को कुछ चुनिंदा ट्वीट्स से आपत्ति है, तो उन्हें भले ही ब्लॉक रहने दिया जाए, लेकिन पूरे अकाउंट पर पाबंदी लगाना गलत है।

अपनी दलील को मजबूत करने के लिए वकील अखिल सिबल ने पिछले कुछ पुराने मामलों का भी हवाला दिया, जिनमें अदालतों ने सोशल मीडिया अकाउंट्स को अंतरिम राहत देते हुए बहाल करने के आदेश दिए थे। लेकिन इस पर बेंच ने बेहद दिलचस्प और तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि पुराने मामलों और इस मामले में एक बड़ा अंतर है। इस केस में जो पूरी गतिविधि दिखाई दे रही है, वह अपने आप में ही थोड़ी आपत्तिजनक लगती है। इसी वजह से अदालत ने केंद्र सरकार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' का पक्ष सुने बिना कोई भी जल्दबाजी में आदेश पारित करने से मना कर दिया।

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IT नियमों का हवाला और रिव्यू कमेटी को कोर्ट का निर्देश

भले ही दिल्ली हाईकोर्ट ने अभिजीत दिपके को तुरंत कोई राहत नहीं दी, लेकिन उनके लिए एक कानूनी रास्ता जरूर खोल दिया है। अदालत ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeiTY) की समीक्षा समिति (Review Committee) को इस पूरे मामले की जांच करने का निर्देश दिया है।

🔹वर्चुअल पेशी की आजादी: अदालत ने साफ कहा है कि याचिकाकर्ता अभिजीत दिपके को इस समिति के सामने डिजिटल यानी वर्चुअल माध्यम से अपना पक्ष रखने की पूरी आजादी होगी।

🔹चार हफ्ते का समय: कोर्ट ने केंद्र सरकार को अपना जवाब (Counter Affidavit) दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है।

🔹नियम 14 का जिक्र: कोर्ट ने आईटी नियमों के नियम 14 (Rule 14 of IT Rules) का जिक्र करते हुए कहा कि इस कमेटी को हर दो महीने में बैठक करनी होती है। अगर कमेटी को लगता है कि अकाउंट को ब्लॉक करने का फैसला सही नहीं था, तो उसके पास इसे पलटने और अनब्लॉक करने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले यह कमेटी दिपके की दलीलों पर विचार कर अपना फैसला रिकॉर्ड पर लाए।

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कोर्ट में सरकार और याचिकाकर्ता के बीच तीखी बहस

सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम का माहौल काफी गरमा-गरम रहा। केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया (SGI) तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने मोर्चा संभाला। जब याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उन्हें बिना सुने ही अकाउंट ब्लॉक करने का आदेश जारी कर दिया गया, तो सरकारी वकीलों ने इसका कड़ा विरोध किया।

याचिकाकर्ता के वकील अखिल सिबल ने चिंता जताते हुए कहा, "यह छठा ऐसा मामला है जब किसी सोशल मीडिया अकाउंट को इस तरह अचानक बंद कर दिया गया है। आखिर यह सिलसिला कब तक चलेगा? यह पूरी तरह से एक सैटायर (व्यंग्य) यानी मजाक के तौर पर शुरू किया गया अकाउंट है।" इस पर अदालत ने बहुत ही व्यावहारिक टिप्पणी करते हुए कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल पाबंदियों से जुड़े कानून अभी अपने शुरुआती चरण (Nascent Stage) में हैं, इसलिए इसमें कई तकनीकी और दूरगामी पहलू शामिल हैं।

सबसे बड़ी बात यह रही कि अदालत के सामने अभी तक वह मुख्य 'ब्लॉकिंग ऑर्डर' (Blocking Order) ही पेश नहीं हो पाया था, जिसके तहत एक्शन लिया गया था। सिर्फ एक कम्यूनिकेशन (सूचना) ही रिकॉर्ड पर थी। इसे लेकर कोर्ट ने कहा कि जब तक पूरी सामग्री सामने नहीं आती, तब तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जा सकता।

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'ब्लॉकिंग ऑर्डर' पर भी उठा सवाल (Blocking Order Controversy)

सुनवाई के दौरान एक अहम मुद्दा यह भी उठा कि आखिर अकाउंट ब्लॉक करने का वास्तविक आदेश क्या है और वह रिकॉर्ड पर क्यों नहीं है। कोर्ट ने कहा कि फिलहाल रिकॉर्ड पर सिर्फ सूचना है, असली ब्लॉकिंग ऑर्डर नहीं। अदालत ने यह भी माना कि न तो याचिकाकर्ता और न ही अदालत ने अभी तक वह आदेश देखा है।

अखिल सिब्बल ने दलील दी कि अगर X प्लेटफॉर्म के पास ब्लॉकिंग ऑर्डर मौजूद है तो उसे अदालत के सामने लाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गोपनीयता का मतलब यह नहीं हो सकता कि प्रभावित व्यक्ति को ही आदेश की जानकारी न दी जाए।

MeitY Review Committee को क्या निर्देश मिला?

दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। साथ ही अदालत ने MeitY की रिव्यू कमेटी को निर्देश दिया कि वह अभिजीत दिपके की शिकायत की जांच करे। कोर्ट ने दिपके को वर्चुअली पेश होने की अनुमति भी दी है। अदालत ने कहा कि आईटी नियमों के तहत बनी रिव्यू कमेटी के पास यह अधिकार है कि वह पूरे मामले की समीक्षा करे और अगर उसे लगे कि अकाउंट ब्लॉक करना गलत था तो अनब्लॉक करने की सिफारिश कर सकती है।

मजाक से शुरू हुई 'कॉकरोच जनता पार्टी' कैसे बनी सोशल मीडिया की 'सनसनी'?

अब आपके मन में यह सवाल जरूर उठ रहा होगा कि आखिर यह 'कॉकरोच जनता पार्टी' है क्या, जिसके लिए देश के इतने बड़े वकील और सरकारी अमला अदालत में आमने-सामने आ गए? दरअसल, इस पार्टी की शुरुआत राजनीति के मैदान में नहीं, बल्कि सोशल मीडिया की दुनिया में एक शुद्ध मजाक और तीखे व्यंग्य (Satire) के रूप में हुई थी।

🔹नाम के पीछे की कहानी: कुछ समय पहले देश के सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने देश के कुछ युवाओं को लेकर एक टिप्पणी की थी, जिसमें 'कॉकरोच' शब्द का इस्तेमाल हुआ था। इस टिप्पणी को लेकर काफी विवाद हुआ था। इसी के बाद युवाओं ने तंज कसते हुए 'कॉकरोच जनता पार्टी' का गठन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कर दिया।

🔹युवाओं का जबरदस्त समर्थन: देखते ही देखते देश के करोड़ों युवा और विपक्षी दल इस नाम और इसके पीछे छिपे तीखे राजनीतिक व्यंग्य से जुड़ते चले गए। इस पेज की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर इसके फॉलोअर्स की संख्या देश की बड़ी राष्ट्रीय पार्टियों (जैसे भाजपा) से भी आगे निकल गई थी।

डिजिटल फ्रीडम बनाम सरकारी नियम: आगे क्या होगा?

जब यह पार्टी अपने लोकप्रियता के शिखर पर थी, तभी अचानक इसके मुख्य 'X' हैंडल को भारत में 'विथहेल्ड' (Withheld यानी प्रतिबंधित) कर दिया गया। इसके तुरंत बाद संस्थापक अभिजीत दिपके ने दावा किया कि उनकी वेबसाइट और इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी इसी तरह की पाबंदियां लगाने की कोशिश की जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक सोशल मीडिया अकाउंट के बंद होने का नहीं है, बल्कि यह डिजिटल स्पेस में अभिव्यक्ति की आजादी और सरकारी नियंत्रण के बीच चल रही एक बहुत बड़ी खींचतान का हिस्सा है। अब सबकी नजरें इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeiTY) की समीक्षा समिति के फैसले पर टिकी हैं। देखना होगा कि क्या यह कमेटी इस 'कॉकरोच' के व्यंग्य को लोकतंत्र का हिस्सा मानकर राहत देती है या फिर अदालत की अगली सुनवाई में सरकार कोई नया और बड़ा सबूत पेश करती है।

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