Bihar Chunav: लेफ्ट 75, कांग्रेस 76, VIP ने 60 सीटों पर ठोका दावा, महागठबंधन में क्यों नहीं हो पा रहा फैसला

Bihar Chunav 2025 (Mahagathbandhan Seat Sharing): बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। औपचारिक ऐलान बस कुछ ही दिनों में होने वाला है, लेकिन विपक्षी महागठबंधन में सीट बंटवारे की गुत्थी अब तक उलझी हुई है। राजद, कांग्रेस, लेफ्ट और अन्य सहयोगी दलों के बीच सीटों का गणित इतना पेचीदा हो गया है कि दशहरा तक तस्वीर साफ करने की कोशिशों के बावजूद सहमति बनती नहीं दिख रही।

लेफ्ट ने मांगी 75 सीटें, तेजस्वी को सौंप दी लिस्ट

महागठबंधन में इस बार लेफ्ट पार्टियों ने अपने तेवर कड़े कर दिए हैं। भाकपा माले, भाकपा और माकपा -तीनों दल मिलकर कुल 75 सीटों पर दावा कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो माले ने 40, CPI ने 24 और CPI (M) ने 11 सीटों की लिस्ट सीधे तेजस्वी यादव को थमा दी है।

Bihar Chunav 2025 Mahagathbandhan Seat Sharing

🔵 भाकपा माले 40 सीटों की तैयारी कर रही

2020 के चुनाव में लेफ्ट पार्टियां 29 सीटों पर लड़ी थीं और 16 जीत भी पाई थीं। इस बार उनकी रणनीति है कि ज्यादा जिलों में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई जाए। भाकपा माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने साफ कहा है कि पार्टी कम से कम 40 सीटों की तैयारी कर रही है। वहीं CPI के राज्य सचिव रामनरेश पांडेय का कहना है कि "हमारा संगठन सभी 38 जिलों में है, इसलिए सम्मानजनक सीटें ही स्वीकार्य होंगी।"

🔵 कांग्रेस का 76 सीटों पर दावा

राजद के निर्देश के मुताबिक सभी सहयोगियों ने सीटों के साथ उम्मीदवारों के नाम भी सौंपने शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस ने 76 सीटों पर दावेदारी की है और इन सीटों के उम्मीदवारों के नाम भी राजद को सौंप दिए हैं। कांग्रेस की रणनीति साफ है- सीट शेयरिंग पर ज्यादा दबाव बनाकर अपने लिए बेहतर डील पाना।

🔵 वीआईपी भी मैदान में, 60 सीटों पर नजर

विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने भी इस बार 60 सीटों पर दावा ठोका है। हालांकि पार्टी ने सभी सीटों पर उम्मीदवारों की लिस्ट पूरी नहीं दी, सिर्फ लगभग आधी सीटों के नाम बताए हैं। इसके बावजूद पार्टी दबाव बनाने की कोशिश कर रही है कि महागठबंधन में उसकी हिस्सेदारी मजबूत हो।

🔵 जिन सीटों पर फंसा है पेच

महागठबंधन में सबसे बड़ी मुश्किल उन 9 सीटों पर आ रही है, जहां लेफ्ट पार्टियां पारंपरिक रूप से चुनाव लड़ती रही हैं। इस बार इन सीटों पर कांग्रेस और राजद ने भी दावेदारी कर दी है। इनमें बेगूसराय की बछवाड़ा और बखरी, मधुबनी की हरलाखी, झंझारपुर, पूर्णिया की रुपौली, सीतामढ़ी की विभूतिपुर, बेगूसराय की मटिहानी, मुजफ्फरपुर की औराई और पटना की दीघा सीट शामिल हैं।

🔵 राजद का समीकरण: कम से कम 130 सीटों पर नजर

महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी राजद खुद कम से कम 130 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। साथ ही गठबंधन में रालोजपा और झामुमो जैसे नए सहयोगियों की एंट्री भी तय मानी जा रही है। इन दोनों दलों को 6-8 सीटें मिल सकती हैं।राजद ने सभी दलों से कहा है कि सीट के साथ उम्मीदवारों का नाम भी दें ताकि चुनाव की घोषणा के समय पूरे गठबंधन की ताकत एक साथ दिखाई दे।

🔵 सीट शेयरिंग के पीछे असली रणनीति

इस बार महागठबंधन सिर्फ सीटें ही नहीं बांट रहा, बल्कि उम्मीदवारों के नाम भी पहले से फाइनल करने की रणनीति बना रहा है। इसका मकसद यह है कि चुनाव की घोषणा के साथ ही जनता के बीच एक मजबूत और एकजुट छवि पेश की जा सके।

अगर किसी सीट पर दो या ज्यादा दल दावा करेंगे तो अंतिम फैसला गठबंधन के शीर्ष नेता मिलकर करेंगे। यहां यह भी संभावना है कि किसी उम्मीदवार को दूसरे दल के सिंबल पर उतारकर जीत सुनिश्चित की जाए।

243 विधानसभा सीटों वाले बिहार में महागठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है-दावों से ज्यादा सीटों का टकराव। कांग्रेस, लेफ्ट, वीआईपी और अन्य सहयोगियों की सीटों की मांग इतनी बड़ी है कि संतुलन बिठाना आसान नहीं होगा। राजद भले ही सबसे बड़ा दल है, लेकिन उसे भी सहयोगियों को नाराज करने का खतरा है। यानी बिहार चुनाव से पहले महागठबंधन का सबसे बड़ा टेस्ट यही होगा कि सीट शेयरिंग का फॉर्मूला कब और कैसे तय होता है।

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