Bihar Election: न वोट बैंक न संगठन फिर भी Chirag Paswan बनना चाह रहे किंगमेकर, समझें क्या है उनका असली प्लान
Chirag Paswan Bihar Election: बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Election 2025) को देखते हुए राज्य की सभी पार्टियों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। एनडीए (NDA) के सभी दल और बड़े नेता एक सुर में कह रहे हैं कि इस चुनाव में नीतीश कुमार ही उनका चेहरा होंगे। पिछले चुनाव की कड़वाहट भूलकर चिराग पासवान कई बार नीतीश कुमार से मुलाकात कर चुके हैं। चिराग बार-बार कहते रहे हैं कि वह बिहार की राजनीति करना चाहते हैं। हालांकि, उन्होंने गठबंधन धर्म निभाते हुए यह भी कहा है कि नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री का चेहरा हैं और एलजेपी (R) मजबूती के साथ एनडीए गठबंधन में है।
बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए ढंके-छुपे शब्दों में अपनी इच्छा जाहिर करने वाले चिराग के पास न तो तगड़ा वोट बैंक ही है और न इतना बड़ा संगठन। इसके बावजूद उनकी इस सक्रियता और महत्वाकांक्षा के पीछे असली खेल क्या है?

Bihar Election: चिराग पासवान एक तीर से साध रहे कई निशान
बिहार की राजनीति में जाति का गणित बहुत मायने रखता है। पासवान जाति का बिहार की जनसंख्या में 5 फीसदी हिस्सा है और पिछले 4 दशक में निर्विवाद रूप से रामविलास पासवान ही उनके सबसे बड़े नेता माने जाते रहे थे। हालांकि, उनके निधन के बाद खुद उनके ही परिवार में दरार पड़ गई है और उनकी पार्टी भी दो-फाड़ हो चुकी है। एलजेपी की कमान रामविलास के भाई पशुपति पारस संभाल रहे हैं, जबकि चिराग पासवान ने एलजेपी (आर) पार्टी बनाई है। चिराग के 5 सांसद हैं और खुद वह केंद्र सरकार में मंत्री हैं।
यह भी पढ़ें: Bihar Politics: अगर हिम्मत है तो विधानसभा चुनाव लड़कर दिखाएं, Prashant Kishor ने किसे दी चुनौती?
चिराग की अब तक राजनीति दिल्ली में बतौर सांसद और मंत्री रही है। जमुई, हाजीपुर, खगड़िया, समस्तीपुर और वैशाली से एलजेपी के सांसद जरूर बने, लेकिन लोकसभा चुनाव में पार्टी को एनडीए गठबंधन में रहने का फायदा मिला है। फिलहाल चिराग पासवान अपनी जाति के भी सर्वमान्य नेता नहीं कहे जा सकते हैं, क्योंकि उनके अपने ही परिवार में फूट पड़ी हुई है।
न वोट बैंक न संगठन फिर कैसे इतनी बड़ी महत्वाकांक्षा?
चिराग पासवान ही नहीं बिहार में सीएम के लिए कई चेहरे वेटिंग लिस्ट में हैं। इसमें प्रशांत किशोर से लेकर तेजस्वी यादव तक शामिल हैं। पीके ने अपना पूरा संगठन और जोर बिहार में लगा दिया है, लेकिन अभी उन्हें चुनावी सफलता का स्वाद चखना है। दूसरी ओर तेजस्वी यादव के पास MY (मुस्लिम और यादव) समीकरण है जिसके बिहार में लगभग 25 फीसदी वोट हैं। इसके बावजूद तेजस्वी के लिए भी सत्ता की चाबी तक पहुंचना मुश्किल ही है। वह बार-बार इसमें महिलाओं और युवाओं को शामिल करने की बात करते हैं। चिराग पासवान के पास न तो आरजेडी जैसा बड़ा वोट बैंक है और न पूरे राज्य में मजबूत संगठन ही। इसके बावजूद उनके सीएम बनने का सपना कैसे पूरा होगा, बिहार की राजनीति के जानकार भी इसकी सही गणना नहीं कर पा रहे हैं। चिराग के करीबियों का यह जरूर कहना है कि वह 2030 के लिए खुद को विकल्प बनाना चाहते हैं, लेकिन उनकी गाड़ी गठबंधन के बिना शायद ही चल पाए।
यह भी पढ़ें: Bihar Today: प्रशांत किशोर की 'बिहार बदलाव यात्रा' आज सिवान में, बारिश को लेकर 6 जिलों में ऑरेंज अलर्ट
2025 चुनाव में किंगमेकर की भूमिका में रहेंगे?
पटना के राजनीतिक गलियारों में चिराग पासवान की इस वक्त की राजनीति की काफी चर्चा हो रही है। चिराग के अपने हाव-भाव से भी यही लग रहा है कि वह फिलहाल मजबूती से एनडीए में रहना चाहते हैं और उनके पास कहीं और जाने का विकल्प भी नहीं है। चिराग पासवान की पूरी कोशिश एनडीए गठबंधन में ज्यादा से ज्यादा सीटें पाने की है, ताकि वह सरकार बनाने में एक बड़ी और मजबूत भूमिका में रहें। सूत्रों का कहना है कि अपनी पार्टी के लिए वह 30 से ज्यादा सीटें चाहते हैं जबकि बीजेपी और जेडीयू उन्हें 25 सीटों तक निपटा सकती हैं। हालांकि, चुनाव से पहले यह सब आंकड़ों और अटकलों का खेल है। असली तस्वीर साफ होने में अभी कुछ महीने तो लगेंगे ही।
यह भी पढ़ें:












Click it and Unblock the Notifications