Bihar Election 2025: सीट शेयरिंग को लेकर NDA में महामंथन, जानें किस फॉर्मूले पर JDU-BJP दोनों होंगे राजी?

Bihar Election 2025: बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियां जोर शोर से चल रही है। सीट शेयरिंग को लेकर महागठबंधन की 4 अहम बैठक हो चुकी है। एनडीए में भी सीटों के बंटवारे पर सहमति बनाने के लिए पटना से दिल्ली तक मंथन चल रहा है। आरजेडी और कांग्रेस किसी भी तरीके से इस बार बहुमत के जादुई आंकड़े को छूना चाहती है। दूसरी ओर नीतीश कुमार के लिए यह अस्तित्व बचाने की लड़ाई है।

बीजेपी (BJP) भी हिंदी पट्टी में अपने दबदबे को बरकरार रखने के लिए गठबंधन में सबको साथ लेकर चलने की कोशिश कर रही है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में भाजपा, जनता दल यूनाइटेड (JDU), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM), लोजपा (RLJP) जैसे दल शामिल हैं। इस बार सीट शेयरिंग का गणित आसान नहीं लग रहा है।

Bihar Election 2025

JDU कम सीटों पर नहीं होगी राजी

एनडीए में पिछले चुनाव के प्रदर्शन के आधार पर कहें तो सबसे बड़ा घटक दल भाजपा है। हालांकि, नीतीश कुमार अभी भी बिहार में मजबूत जनाधार रखते हैं और उनके चेहरे पर ही चुनाव लड़ा जाएगा। 2020 विधानसभा चुनाव में JDU को भाजपा से कम सीटें मिली थीं, बावजूद इसके नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने थे। अब 2025 में नीतीश कुमार की पाला बदलने वाली छवि और उम्रदराज़ नेतृत्व जैसे तथ्य भी हैं। सीट शेयरिंग इस बार काफी माथा पच्ची का काम साबित होगा।

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Bihar Election 2025: बीजेपी के सामने सबको साथ लेकर चलने की चुनौती

सूत्रों की मानें तो BJP इस बार 243 में से 130-135 सीटों पर खुद लड़ना चाहती है, जबकि JDU को लगभग 95-100 सीटों की पेशकश कर सकती है। हालांकि, जेडीयू से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अभी भी कम से कम 110-115 सीटों की मांग कर रही है, जो 2020 के मुकाबले कहीं ज्यादा है। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के जीतनराम मांझी कुछ दलित बहुल सीटों पर दावा ठोक सकते हैं और वह भी चाहते हैं कि उन्हें सम्मानजनक स्थान मिले। इसके अलावा, उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोकमंच भी कुशवाहा समुदाय के वोटबैंक के आधार पर कम से कम 10 सीटें मांग सकती है। बीजेपी के सामने सबको साथ लेकर चलने की चुनौती है।

आधी-आधी सीटों के बंटवारे पर बनेगी बात?

बीजेपी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि एक समझौता यह हो सकता है कि बीजेपी और जेडीयू दोनों ही आधी-आधी सीटों पर लड़े। ऐसे में दोनों के पास 243 में से 120-120 सीटें आ सकती हैं। 3 सीटें किसी छोटे सहयोगी दल को दी जा सकती है या उन पर कोई समझौता हो सकता है।

बीजेपी अपनी सीटों के कोटे में से चिराग पासवान को अडजस्ट करेगी, जबकि जेडीयू के कोटे में से उपेंद्र कुशवाहा और हम को सीटें दी जाएंगी। हालांकि, इस पर सभी दलों की सहमति बना पाना काफी मुश्किल होगा। अब तक के हालात में तो यही लग रहा है कि एनडीए के सभी दल मिलकर ही चुनाव लड़ेंगे। चिराग पासवान 30 सीटों की बात कर रहे हैं, लेकिन सूत्रों के मुताबिक उन्हें 20 से 25 सीटों में अडजस्ट किया जा सकता है। एक संभावना यह भी है कि चिराग की पार्टी से बीजेपी के कुछ उम्मीदवार चुनाव लड़ सकते हैं।

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बीजेपी की रणनीति: नीतीश कुमार पर कम करना चाहती है निर्भरता

भाजपा इस बार नीतीश कुमार पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहती है। बीजेपी की कोशिश है कि चुनाव में इस तैयारी के साथ उतरा जाए कि नतीजों के बाद नीतीश कुमार पर निर्भरता कम हो। नीतीश के इतिहास को देखते हुए उनके पलटी मारने की आशंकाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है। भाजपा का मकसद है कि जेडीयू के साथ मिलकर चुनाव लड़ते हुए भी आंतरिक रूप से नेतृत्व की कमान खुद के पास रखे। साथ ही, गठबंधन के सहयोगियों का भी विश्वास जीतकर रखे।

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