Jaspal Rana Last Rites: कब और कहां होगा मनु भाकर के कोच जसपाल राणा का अंतिम संस्कार, कौन देगा मुखाग्नि
Jaspal Rana Last Rites: भारतीय खेल जगत से शुक्रवार सुबह एक बेहद दुखद खबर सामने आई। एशियन गेम्स में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने वाले दिग्गज निशानेबाज और देश के सबसे सफल शूटिंग कोचों में शामिल जसपाल राणा का गुरुवार रात दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। जसपाल राणा 49 वर्ष के थे।
खिलाड़ी, कोच और खेल प्रेमी उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। जसपाल राणा ने खिलाड़ी के रूप में भारत को कई बड़ी उपलब्धियां दिलाईं, वहीं कोच बनने के बाद नई पीढ़ी के निशानेबाजों को तैयार कर देश की शूटिंग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। मनु भाकर समेत कई स्टार खिलाड़ियों की सफलता के पीछे उनका अहम योगदान माना जाता है।

कहां होगा जसपाल राणा का अंतिम संस्कार?
मिली जानकारी के अनुसार जसपाल राणा का अंतिम संस्कार दिल्ली में किया जाएगा। उनके अंतिम दर्शन के लिए खेल जगत से जुड़े कई खिलाड़ी, कोच और अधिकारी पहुंच सकते हैं। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई प्रमुख हस्तियों ने दुख जताया है।
कौन देगा मुखाग्नि?
जसपाल राणा के बेटे का नाम युवराज राणा और बेटी देवांशी राणा हैं, शायद उनका बेटा उनको मुखाग्नि दे सकता है। अंतिम संस्कार में उनके परिवार और रिलेटिव भी शामिल होंगे, राजनीति से भी बड़ी हस्तियों के शामिल होने की उम्मीद है, राणा बीजेपी और कांग्रेस दोनों में रहे हैं।
म्यूनिख से लौटने पर करा रहे थे इलाज
बताया जा रहा है कि जसपाल राणा हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित ISSF वर्ल्ड कप से भारतीय दल के साथ लौट रहे थे। वापसी की उड़ान के दौरान उनकी तबीयत खराब हो गई थी। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने स्टेंट भी लगाया। हालांकि इलाज के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका और गुरुवार रात उन्होंने अंतिम सांस ली।
भारतीय पिस्टल शूटिंग की बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे थे
जसपाल राणा भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में काम कर रहे थे। फरवरी 2025 में राष्ट्रीय राइफल संघ (NRAI) ने उन्हें 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा का हाई-परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया था। खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत तैयारी कराने में उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जाती थी।
जसपाल राणा भारत के सबसे सफल निशानेबाजों में गिने जाते थे। उन्होंने अपने करियर में एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ खेलों में कई पदक जीते। एशियन गेम्स में उनका स्वर्ण पदक भारतीय शूटिंग इतिहास की बड़ी उपलब्धियों में शामिल है। खेल के प्रति उनका जुनून इतना था कि एक बार गंभीर दर्द के बावजूद उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा लेकर स्वर्ण पदक और विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया था।
मनु भाकर समेत कई सितारों को तराशा
खेल से संन्यास लेने के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली और युवा प्रतिभाओं को तैयार करने में जुट गए। उन्होंने 2012 से जूनियर पिस्टल कोच के रूप में काम करते हुए कई खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। मनु भाकर, सौरभ चौधरी, अनीश भानवाला और चिंकी यादव जैसे निशानेबाजों के विकास में उनकी अहम भूमिका रही। पेरिस ओलंपिक 2024 में मनु भाकर के ऐतिहासिक दो कांस्य पदकों के पीछे भी उनके मार्गदर्शन को महत्वपूर्ण माना जाता है।
दबाव में प्रदर्शन करना सिखाते थे
जसपाल राणा की कोचिंग शैली बाकी कोचों से अलग मानी जाती थी। वह खिलाड़ियों को ऐसे माहौल में अभ्यास कराते थे, जो ओलंपिक और विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं जैसा दबाव पैदा करता था। उनका मानना था कि बड़े मंच पर सफलता के लिए मानसिक मजबूती सबसे जरूरी है। यही वजह रही कि उनके मार्गदर्शन में कई युवा निशानेबाज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमके।
द्रोणाचार्य पुरस्कार से हुए थे सम्मानित
भारतीय निशानेबाजी में उनके योगदान और युवा खिलाड़ियों को तैयार करने में निभाई गई भूमिका के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2020 में उन्हें प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया था। यह सम्मान भारतीय खेलों में उनके लंबे और प्रभावशाली योगदान की पहचान माना जाता है।












Click it and Unblock the Notifications