Bihar Election 2025: महागठबंधन में इस बार किसे कितनी मिलेगी सीटें? कांग्रेस को सिर्फ 40+ सीटें मिलने की चर्चा!
Bihar Election 2025 (Mahagathbandhan Seat Sharing): बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। शनिवार (12 जुलाई) को INDIA गठबंधन के नेताओं की एक अहम रणनीतिक बैठक राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव के आवास पर हुई। बैठक का मुख्य फोकस सीट बंटवारे को लेकर था। करीब 6 घंटे तक चली इस बैठक की अगुवाई तेजस्वी यादव ने की, जो गठबंधन की समन्वय समिति के प्रमुख भी हैं।
तेजस्वी यादव ने मीडिया से बातचीत में उन्होंने पुष्टि की कि सीटों को लेकर बातचीत शुरू हो गई है, लेकिन उन्होंने फिलहाल ब्योरा साझा करने से इनकार कर दिया। बैठक में कांग्रेस के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु, वीआईपी पार्टी के अध्यक्ष मुकेश सहनी, वामदलों के प्रतिनिधि और अन्य सहयोगी शामिल हुए। बैठक के बाद VIP प्रमुख मुकेश सहनी ने बताया कि सीट शेयरिंग को लेकर चर्चा हुई है। साथ ही चुनाव समन्वय समिति और वोटर लिस्ट की विशेष समीक्षा जैसे मुद्दे भी एजेंडे में रहे। जब सहनी से पूछा गया कि अगर तेजस्वी मुख्यमंत्री बनते हैं तो उपमुख्यमंत्री कौन होगा, तो उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, "और कौन? मैं ही रहूंगा!"

बिहार 2025: सीट बंटवारे पर तेजस्वी-कांग्रेस में बनती दिख रही है बात!
महागठबंधन के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर रणनीतिक बैठकों का दौर शुरू हो गया है और अंदरखाने बातचीत भी तेज हो गई है। लेकिन इस बार समीकरण कुछ अलग हैं -कांग्रेस ज्यादा सीटों की मांग कर रही है, वीआईपी को भी उम्मीदें हैं, वहीं वामदल और जेएमएम जैसे दल भी अपना वजूद साबित करने के लिए सीटें मांग रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस ने इस बार भी 70 सीटों की मांग रखी है, जैसा उसने पिछले विधानसभा चुनावों में किया था। हालांकि, 2020 में कांग्रेस को सिर्फ 17 सीटों पर ही जीत हासिल हो पाई थी, जो उसके प्रदर्शन के मुकाबले बहुत कम थी। ऐसे में राजद इस बार कांग्रेस को 40 से 45 सीटें देने पर विचार कर रही है।
राजद ने पिछले चुनाव में 140 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार पार्टी सहयोगी दलों के साथ मिलकर चलने की रणनीति बना रही है। सूत्रों के मुताबिक, राजद अपने कोटे से झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और रालोजपा को भी कुछ सीटें देने के लिए तैयार है।
वीआईपी के मुखिया मुकेश सहनी ने कम से कम 20 सीटों की मांग की है, हालांकि राजद उन्हें 10 सीटें देने पर विचार कर रहा है। सहनी एनडीए छोड़ने के बाद से महागठबंधन के साथ बने हुए हैं और खुद को मजबूत साझेदार के तौर पर स्थापित करने में लगे हैं।
सीपीआई, सीपीएम और भाकपा-माले जैसे वामदलों ने पिछले चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया था। इस बार महागठबंधन उन्हें 40 से 45 सीटें देने पर विचार कर रहा है। वामपंथी दलों की पकड़ विशेष रूप से सीमांचल और मगध क्षेत्र में बनी हुई है।
जेएमएम का दबाव - सम्मान चाहिए, नहीं तो अकेले लड़ने की चेतावनी
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी जेएमएम ने भी बिहार चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। जेएमएम का कहना है कि उसने झारखंड में राजद को सम्मान दिया है, इसलिए अब बारी बिहार में जेएमएम को उचित सीटें देने की है। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो पार्टी अकेले भी चुनाव मैदान में उतरने के लिए तैयार है। इससे तेजस्वी यादव पर दबाव बन गया है कि वे जेएमएम को महागठबंधन में शामिल करें।
कांग्रेस की चुप्पी रणनीतिक या संकोच?
वहीं कांग्रेस अब तक इस मुद्दे पर चुप है। न तो जेएमएम को लेकर कोई रुख साफ किया गया है और न ही सीटों के बंटवारे को लेकर कोई अंतिम राय सामने आई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस सहयोगियों के साथ तालमेल बैठा पाती है या फिर खुद की शर्तों पर अड़ी रहती है।
महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन इतना तय है कि इस बार का चुनाव सिर्फ एनडीए बनाम महागठबंधन नहीं, बल्कि "महागठबंधन के भीतर का सामंजस्य" भी एक बड़ा मुद्दा बनने वाला है। तेजस्वी यादव की अगुवाई में क्या सब दलों को साथ रखा जा सकेगा, या फिर असंतोष उभरकर अलग चुनावी राह बनाएगा - इसका जवाब आने वाले हफ्तों में मिल जाएगा।












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